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ईरान में आर्थिक संकट गहराया: महंगाई आसमान पर, लोग जमा कर रहे राशन और पानी!

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AIN NEWS 1: ईरान इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। हाल ही में अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव और हमलों के बाद भले ही युद्धविराम लागू हो गया हो, लेकिन इसके असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगे हैं। बाजार खुल गए हैं, सड़कों पर गाड़ियां चल रही हैं, कैफे में लोग नजर आ रहे हैं—लेकिन अंदर ही अंदर हालात बेहद खराब हैं।

सबसे बड़ा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ा है। आम नागरिक अब जरूरत की चीजें खरीदने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं। कई परिवारों के लिए एक वक्त का खाना भी महंगा हो गया है। लोग अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं और सिर्फ जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च कर रहे हैं।

सरकार को बदलनी पड़ी नीति

ईरान सरकार ने कुछ महीने पहले अपने बजट में एक बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए दी जाने वाली सस्ती विदेशी मुद्रा दर को खत्म करने का निर्णय लिया था। इसका तर्क था कि इससे भ्रष्टाचार बढ़ता है और आम लोगों को फायदा नहीं होता।

लेकिन हालात बिगड़ने के बाद सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। अब फिर से गेहूं, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और बच्चों के दूध जैसी जरूरी चीजों के लिए सस्ती विनिमय दर लागू कर दी गई है।

सरकार ने तय किया है कि लगभग 2,85,000 रियाल प्रति डॉलर की दर से इन चीजों का आयात किया जाएगा, जबकि खुले बाजार में डॉलर की कीमत करीब 15.5 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि सरकार बाजार से लगभग पांच गुना सस्ती दर पर जरूरी सामान मंगाने की कोशिश कर रही है।

राष्ट्रीय कोष से निकाले जा रहे पैसे

स्थिति को संभालने के लिए सरकार अब अपने राष्ट्रीय विकास कोष (सॉवरेन वेल्थ फंड) का इस्तेमाल भी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फंड से करीब एक अरब डॉलर निकाले जा रहे हैं ताकि जरूरी खाद्य पदार्थों का आयात किया जा सके।

इनमें चीनी, चावल, जौ, मक्का, सोयाबीन, लाल मांस और चिकन शामिल हैं। सरकार का मकसद है कि देश में खाद्य भंडार बना रहे और लोगों को जरूरी चीजों की कमी न हो।

हालांकि, सरकार यह दावा कर रही है कि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा और सोने का भंडार है, लेकिन इसके ठोस आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

तेल निर्यात में आ रही दिक्कत

ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस पर निर्भर है। लेकिन हालिया हमलों के बाद तेल निर्यात में भी परेशानी आ रही है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि बंदरगाहों तक खाली टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे तेल को लोड कर बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। खार्ग और जस्क जैसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनल प्रभावित हुए हैं।

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने में समस्या नहीं है, बल्कि तेल को बाहर भेजने की प्रक्रिया बाधित हो रही है।

लोगों में डर और अनिश्चितता

देश के भीतर लोगों के बीच डर का माहौल है। कई लोग घरों में राशन जमा कर रहे हैं—जैसे डिब्बाबंद खाना, पानी और अन्य जरूरी चीजें।

बाहर खाना खाना, घूमना-फिरना या ऑनलाइन ऑर्डर करना अब काफी कम हो गया है। लोग हर खर्च सोच-समझकर कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोग महंगाई को लेकर अपनी नाराजगी और हैरानी जाहिर कर रहे हैं। एक यूजर ने बताया कि कुछ साल पहले 14 लोगों का खाना जितने पैसे में आता था, अब एक व्यक्ति के एक वक्त के खाने में उससे कई गुना ज्यादा खर्च हो रहा है।

 इंटरनेट बंदी से बढ़ी परेशानी

इस संकट का एक और बड़ा पहलू है इंटरनेट बंदी। पिछले दो महीनों से इंटरनेट पर काफी सख्ती है, जिससे लाखों लोगों का काम प्रभावित हुआ है।

ऑनलाइन बिजनेस, फ्रीलांसिंग और डिजिटल सेवाओं पर निर्भर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं।

जो लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं, उन्हें या तो सरकारी अनुमति वाले नेटवर्क का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर महंगे VPN खरीदने पड़ रहे हैं।

क्या अकाल का खतरा है?

हालांकि सरकारी एजेंसियां कह रही हैं कि देश में अकाल का खतरा नहीं है। ईरान की सीमाएं इराक, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देशों से जुड़ी हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर आयात किया जा सकता है।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोगों में डर बना हुआ है। इसी वजह से वे जरूरत से ज्यादा सामान जमा कर रहे हैं।

ईरान में मौजूदा हालात दिखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। महंगाई, बेरोजगारी, इंटरनेट बंदी और युद्ध के असर ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है।

सरकार राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन हालात कब तक सुधरेंगे, यह कहना अभी मुश्किल है।

Iran is currently facing a severe economic crisis in 2026, with rising food inflation, supply shortages, and disruptions in oil exports due to ongoing geopolitical tensions. The impact of war and sanctions has significantly weakened the Iranian economy, forcing citizens to struggle with skyrocketing prices and limited access to essential goods. As the crisis deepens, concerns around food security, inflation, and economic stability in Iran continue to grow, making it a critical global issue.

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