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महाकाल मंदिर में बड़ा बदलाव: शिवलिंग क्षरण रोकने के लिए अब भांग का सीमित उपयोग, जानें नए नियम

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AIN NEWS 1 | उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे भारत की आस्था का केंद्र है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। विशेषकर भस्म आरती और भव्य श्रृंगार की झलक श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर का अनुभव बन जाती है।

लेकिन अब मंदिर प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। कारण है शिवलिंग का क्षरण (Erosion), जो समय के साथ बढ़ता जा रहा है।

1. क्षरण की समस्या और रिपोर्ट

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने हाल ही में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि:

  • शिवलिंग पर बार-बार भस्म रगड़ने से क्षरण हो रहा है।

  • पूजा सामग्री के कण चिपककर छोटे-छोटे बैक्टीरिया पैदा कर रहे हैं।

  • इनसे शिवलिंग के पत्थर में छोटे छिद्र बनते हैं और नुकसान बढ़ता है।

रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन को सुझाव दिया गया कि श्रृंगार की प्रक्रिया में बदलाव किए जाएं।

2. भांग की मात्रा पर नियंत्रण

अब तक महाकालेश्वर मंदिर में बाबा के श्रृंगार में 5 से 7 किलो भांग का उपयोग किया जाता था। लेकिन नए नियम के तहत इसे घटाकर अधिकतम 3 किलो कर दिया गया है।

  • मंदिर में भांग का नाप-जोख करने के लिए तोला-कांटा (वजन करने की मशीन) लगाया गया है।

  • पुजारी अब 3 किलो से अधिक भांग का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

  • श्रृंगार से पहले भांग का वजन मंदिर समिति की निगरानी में होगा।

मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट कहा है कि भगवान महाकाल के श्रृंगार में अब सिर्फ 3 किलो भांग का ही प्रयोग होगा।

3. भव्य श्रृंगार की परंपरा

महाकाल मंदिर में श्रृंगार का महत्व बहुत बड़ा है।

  • तड़के सुबह होने वाली भस्म आरती में बाबा को भस्म से अलंकृत किया जाता है।

  • शाम के समय भांग और पूजन सामग्री से विशेष श्रृंगार किया जाता है।

  • भगवान को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाता है, जैसे – गणेश, श्रीकृष्ण, बालाजी, हनुमान, शेषनाग, तिरुपति आदि।

श्रृंगार के दौरान भक्तों को दिव्य दर्शन कराए जाते हैं, जिससे उनकी आस्था और गहरी हो जाती है।

4. श्रृंगार की प्रक्रिया और खर्च

  • भगवान महाकाल का श्रृंगार कराने के लिए श्रद्धालुओं को ₹1100 की रसीद कटवानी होती है।

  • इस श्रृंगार में भांग, सूखे मेवे, वस्त्र और पूजा सामग्री शामिल रहती है।

  • कुल खर्च लगभग ₹5000 से ₹6000 तक आता है।

  • इस अवसर पर श्रद्धालुओं को नंदी हॉल में बैठकर संध्या आरती में शामिल होने की अनुमति मिलती है।

  • भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं।

इससे भक्तों को न केवल पूजा का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है बल्कि महाकाल का भव्य रूप देखने का सौभाग्य भी।

5. सुप्रीम कोर्ट की पहल और 2017 की याचिका

साल 2017 में सारिका गुरु नामक श्रद्धालु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में शिवलिंग के क्षरण को रोकने की मांग की गई थी।

  • कोर्ट ने ASI और GSI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई।

  • इस समिति ने कई सुझाव दिए, जिनमें भांग की मात्रा घटाना भी शामिल था।

  • तब से प्रशासन लगातार सुधार की दिशा में कदम उठा रहा है।

6. आरतियों में श्रृंगार

महाकाल मंदिर में प्रतिदिन 5 आरतियाँ होती हैं। इनमें से सुबह 4 बजे की भस्म आरती और शाम 7 बजे की संध्या आरती सबसे खास मानी जाती हैं।

  • इन आरतियों के दौरान पुजारी भगवान का चंदन, कुमकुम, भांग, सूखे मेवे और मावे से अलग-अलग श्रृंगार करते हैं।

  • यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, लेकिन अब इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और सुरक्षित बनाया जा रहा है ताकि शिवलिंग को नुकसान न पहुंचे।

महाकालेश्वर मंदिर में किए गए ये बदलाव भले ही परंपरा में थोड़ा बदलाव लाते हों, लेकिन इनका उद्देश्य शिवलिंग की सुरक्षा और दीर्घायु है।

  • भक्तों के लिए दर्शन और श्रृंगार की परंपरा जस की तस रहेगी।

  • सिर्फ भांग की मात्रा को सीमित किया गया है ताकि शिवलिंग को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

यह निर्णय आस्था और विज्ञान का संतुलित मेल है। इससे आने वाली पीढ़ियाँ भी उसी श्रद्धा और भक्ति से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकेंगी।

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