AIN NEWS 1: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अब सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि परिवहन विभाग की सख्त जांच का हिस्सा बन गया है। राज्य सरकार ने 20 अगस्त 2026 से इस नियम को लागू कराने के लिए पूरे महाराष्ट्र में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। पहले ही दिन हजारों चालकों की जांच हुई और पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं पाए जाने पर बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए।
इस अभियान का मकसद केवल भाषा की परीक्षा लेना नहीं बताया गया है। सरकार का कहना है कि ऑटो और टैक्सी चालक रोजाना अलग-अलग इलाकों से आने वाले यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उन्हें कम से कम इतनी मराठी जरूर आनी चाहिए, जिससे वे यात्री की मंजिल, रास्ता, किराया, मीटर और दूसरी जरूरी बातों को आसानी से समझ सकें और जवाब दे सकें।

20 अगस्त से शुरू हुई राज्यव्यापी जांच
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यभर में ऑटो और टैक्सी चालकों के मराठी के व्यावहारिक ज्ञान की जांच शुरू की। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी RTO की टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर चालकों से बातचीत की और 16 सवालों के जरिए उनकी भाषा समझने और बोलने की क्षमता परखी।
पहले दिन कुल 8,217 व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों की जांच की गई। इनमें मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR के 3,995 चालक शामिल थे, जबकि महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में 4,222 चालकों की जांच हुई।
जांच के दौरान 1,268 चालकों को नोटिस जारी किया गया। इनमें MMR के 604 और राज्य के बाकी हिस्सों के 664 चालक शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 85 प्रतिशत चालकों ने पहले दिन निर्धारित स्तर पर प्रदर्शन किया।
16 सवालों में क्या पूछा जा रहा है?
यह परीक्षा किसी स्कूल की मराठी परीक्षा जैसी नहीं है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि चालक वास्तविक परिस्थितियों में यात्रियों से मराठी में बातचीत कर सकता है या नहीं।
सवालों में यात्री से उसकी मंजिल पूछना, रास्ता समझना, किराए और मीटर के बारे में बातचीत करना, वाहन शेयरिंग में है या नहीं बताना और सामान्य यात्रा संबंधी जानकारी समझना शामिल है। उदाहरण के तौर पर चालक को ऐसी मराठी पंक्तियों का अर्थ समझने और जवाब देने में सक्षम होना चाहिए, जिनका इस्तेमाल वह रोजमर्रा में कर सकता है।
यानी सरकार फिलहाल चालकों से कठिन मराठी साहित्य, लिखित व्याकरण या उच्च स्तर की भाषा दक्षता की मांग नहीं कर रही है। मुख्य जोर Working Knowledge यानी कामकाजी/व्यावहारिक मराठी पर है।
नोटिस मिलने के बाद क्या होगा?
जिन चालकों को जांच में पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं आता मिला, उन्हें तत्काल काम से हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्हें एक महीने का समय दिया गया है ताकि वे जरूरी स्तर की मराठी सीख सकें।
अगर एक महीने बाद दोबारा जांच में चालक अपेक्षित स्तर की मराठी नहीं दिखा पाता है, तो उसका बैज तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार इसके बाद भी चालक को भाषा सीखने का अवसर दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं होने पर आगे कार्रवाई जारी रह सकती है।
इसका मतलब यह है कि पहली जांच में मराठी कमजोर पाए जाने पर सीधे तीन महीने का बैज निलंबन नहीं होगा। पहले चालक को सुधार के लिए समय दिया जा रहा है।
नए ऑटो-टैक्सी बैज के लिए भी मराठी सत्यापन
इस व्यवस्था का असर केवल पहले से सड़क पर चल रहे चालकों तक सीमित नहीं है। नए ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के बैज और परमिट की प्रक्रिया में भी मराठी के व्यावहारिक ज्ञान का सत्यापन किया जा रहा है।
परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था में सत्यापन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य जांच में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी चालकों का आकलन एक समान तरीके से किया जाए।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों का यात्रियों के साथ सीधा संपर्क होता है। इसलिए भाषा का व्यावहारिक ज्ञान यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी चालक की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि आवश्यक भाषा ज्ञान सुनिश्चित करना है।
सरकार ने इससे पहले गैर-मराठी भाषी चालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया था। परिवहन विभाग के अनुसार 1.65 लाख चालक 105 दिन चले मराठी प्रशिक्षण अभियान में प्रशिक्षण लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके हैं।
क्या यह बिल्कुल नया नियम है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सरकार के अनुसार व्यावहारिक मराठी ज्ञान की आवश्यकता महाराष्ट्र में 1989 से नियमों में मौजूद है, लेकिन इसे लंबे समय तक सख्ती से लागू नहीं किया गया। अब राज्य सरकार ने संशोधित कानूनी प्रावधानों के जरिए इसकी निगरानी और जांच को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से लागू करने का फैसला किया है। संबंधित संशोधन की अधिसूचना 12 अगस्त को जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, इस नियम को लेकर कुछ ड्राइवर यूनियनों और पूर्व RTO अधिकारियों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि नियमों में “working knowledge” की स्पष्ट परिभाषा और एक समान मूल्यांकन मानक को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। इससे यह सवाल उठ सकता है कि किस स्तर की मराठी को पर्याप्त माना जाएगा।
अभियान कब तक चलेगा?
परिवहन मंत्री के अनुसार राज्यव्यापी जांच अभियान 30 सितंबर 2026 तक जारी रहने वाला है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों और जिलों में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की जांच जारी रहेगी।
मुंबई के अलावा ठाणे, वसई और पुणे जैसे क्षेत्रों में भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। पुणे RTO ने मराठी में बातचीत करने में असमर्थ पाए गए 10 ऑटो चालकों को नोटिस जारी किए हैं।
यात्रियों और चालकों पर क्या पड़ेगा असर?
इस नियम का सबसे सीधा असर उन चालकों पर पड़ेगा जिन्हें मराठी समझने या बोलने में परेशानी होती है। उन्हें अब भाषा सीखने के लिए समय निकालना होगा। दूसरी तरफ सरकार को उम्मीद है कि इससे यात्रियों और चालकों के बीच गलतफहमी कम होगी और रोजमर्रा की बातचीत आसान होगी।
हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करते समय यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच पारदर्शी, समान और स्पष्ट मानकों के आधार पर हो। क्योंकि चालक अलग-अलग राज्यों और भाषाई पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए व्यावहारिक भाषा ज्ञान की जांच का उद्देश्य यात्रियों से संवाद बेहतर करना होना चाहिए।
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अब गंभीरता से लागू किया जा रहा है। 20 अगस्त से शुरू हुए अभियान के पहले दिन 8,217 चालकों की जांच हुई और 1,268 को नोटिस दिया गया। नोटिस पाने वालों को मराठी सुधारने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। इसके बाद भी निर्धारित स्तर हासिल नहीं करने पर बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। अभियान 30 सितंबर तक चलने की जानकारी दी गई है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मराठी न बोल पाने पर पहली जांच में चालक का बैज तुरंत निलंबित नहीं किया जा रहा है। पहले उसे सुधार का अवसर दिया जा रहा है।
Maharashtra Marathi Language Rule 2026 has introduced a practical Marathi language test for auto-rickshaw, taxi and commercial passenger vehicle drivers. The Maharashtra RTO has started statewide inspections from August 20, checking drivers through a 16-question practical Marathi test focused on everyday passenger communication. Drivers who fail to demonstrate adequate working knowledge of Marathi receive a one-month notice to improve their language skills, while continued non-compliance may lead to a three-month badge suspension. The Maharashtra Transport Department says the initiative is aimed at improving passenger communication, convenience and safety.



















