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लखनऊ में मायावती की बड़ी बैठक: 250 बसपा नेताओं संग चुनावी रणनीति पर मंथन, दलित वोट बैंक पर खास फोकस!

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AIN NEWS 1: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो Mayawati ने मंगलवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में एक अहम बैठक की शुरुआत की। इस बैठक में प्रदेश भर से करीब 250 वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें जिला अध्यक्ष और मंडल कोऑर्डिनेटर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी और पार्टी के संगठन को फिर से मजबूत बनाना बताया जा रहा है।

बैठक का माहौल और प्रमुख चेहरे

सुबह करीब 11 बजे मायावती अपने भतीजे Akash Anand के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचीं। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव Satish Chandra Mishra और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल भी शामिल रहे। दिलचस्प बात यह रही कि बैठक में मायावती की कुर्सी बीच में रखी गई थी, जबकि अन्य वरिष्ठ नेता किनारे बैठे दिखाई दिए। इसे पार्टी में उनके केंद्रीय नेतृत्व और निर्णय लेने की भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है।

बैठक के मुख्य मुद्दे

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में दो बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है—

डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की तैयारी

B. R. Ambedkar की जयंती 14 अप्रैल को इस बार बड़े स्तर पर मनाने की योजना है। पार्टी छोटे-छोटे कार्यक्रमों की जगह लखनऊ में एक विशाल आयोजन करने की तैयारी कर रही है, जिसमें पूरे प्रदेश से कार्यकर्ताओं को बुलाया जाएगा।

आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति

बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है। बैठक में कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने, बूथ स्तर तक पकड़ बढ़ाने और मतदाताओं से जुड़ाव बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

शक्ति प्रदर्शन की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती एक बार फिर शक्ति प्रदर्शन की रणनीति पर काम कर रही हैं। इससे पहले 9 अक्टूबर को Kanshi Ram की जयंती के मौके पर लखनऊ में बड़ा आयोजन किया गया था। अब अंबेडकर जयंती पर भी उसी तरह का बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर पार्टी अपनी ताकत दिखाना चाहती है।

लगातार बैठकों का दौर

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 9 अक्टूबर 2025 के बाद से मायावती अब तक करीब 10 बैठकें कर चुकी हैं। इन बैठकों का मुख्य फोकस संगठन को सक्रिय करना और पार्टी के कोर वोट बैंक को बचाए रखना है।

क्यों जरूरी है यह रणनीति?

बसपा के लिए मौजूदा राजनीतिक हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पार्टी का पारंपरिक दलित वोट बैंक अब अन्य पार्टियों की ओर भी आकर्षित हो रहा है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं—

1. कांग्रेस का दलित वोट बैंक पर फोकस

Rahul Gandhi ने हाल ही में लखनऊ में दलित नेताओं के साथ बैठक की थी। इस दौरान कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग भी उठाई गई। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस भी दलित वोटरों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।

2. आजाद समाज पार्टी की सक्रियता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो कभी बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां अब Chandrashekhar Azad की सक्रियता बढ़ गई है। वे लगातार रैलियां कर रहे हैं और दलित युवाओं को जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।

3. समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति

Akhilesh Yadav भी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी द्वारा प्रदेशभर में कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे साफ है कि वह भी बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।

बसपा का गिरता ग्राफ

एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे मजबूत पार्टी मानी जाने वाली बसपा का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरा है।

2007 विधानसभा चुनाव: 206 सीटें, 30.4% वोट शेयर

2012: 80 सीटें, 25.9% वोट शेयर

2017: 19 सीटें, 22.4% वोट शेयर

2022: सिर्फ 1 सीट, 13% वोट शेयर

2022 के चुनाव में बसपा को करीब 12.9% वोट मिले, जो संख्या के लिहाज से लगभग 1.18 करोड़ वोट थे, लेकिन सीटों में तब्दील नहीं हो सके।

लोकसभा चुनाव में भी निराशा

2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा को बड़ा झटका लगा।

2019: 10 सीटें, 19.43% वोट

2024: 0 सीट, 9.35% वोट

इस गिरावट ने पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।

आगे की राह

मायावती की यह बैठक साफ संकेत देती है कि बसपा अब 2027 के चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। पार्टी का फोकस संगठन को मजबूत करने, पुराने वोट बैंक को वापस लाने और नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने पर है।

विशेष रूप से Akash Anand को आगे लाने की रणनीति भी इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बसपा युवाओं और सोशल मीडिया के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

लखनऊ में हो रही यह बैठक बसपा के लिए सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्जीवन की शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले महीनों में पार्टी किस तरह अपनी रणनीति को जमीन पर उतारती है, यह देखना बेहद अहम होगा।

Mayawati’s meeting with 250 BSP leaders in Lucknow marks a crucial step in preparing for the 2027 Uttar Pradesh Assembly elections. The BSP strategy focuses on strengthening its core Dalit vote bank, countering opposition from parties like Congress and Samajwadi Party, and rebuilding its organizational structure. With leaders like Akash Anand and Satish Chandra Mishra present, the meeting highlights BSP’s efforts for political revival after its poor performance in recent elections.

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