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मेरठ में ईद की नमाज को लेकर प्रशासन का सख्त रुख, सड़क पर नमाज पर कार्रवाई की चेतावनी; अबू आज़मी ने जताई नाराज़गी!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ में ईद की नमाज को लेकर प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस बार भी शहर की सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है।

हालांकि इस निर्देश के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेता Abu Azmi ने इस पर नाराज़गी जताते हुए प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल ईद के त्योहार से पहले Meerut में पुलिस और प्रशासन ने शांति समिति की बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि शहर की सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों से अपील की गई कि वे मस्जिदों या ईदगाहों में ही नमाज अदा करें।

इस दौरान Avinash Pandey ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति सड़क पर नमाज पढ़ते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच कर सकती है, जिससे व्यक्ति के पासपोर्ट से जुड़े मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट सीधे पुलिस द्वारा रद्द नहीं किया जाता, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होता है और जांच में उसके रिकॉर्ड पर असर पड़ता है तो संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कोई नया आदेश नहीं है। पिछले कई वर्षों से इसी तरह के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़कों पर भीड़ जमा होने से यातायात और सुरक्षा संबंधी समस्याएं न पैदा हों।

मेरठ में नमाज के लिए पर्याप्त इंतजाम का दावा

प्रशासन का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में मस्जिदें और ईदगाह मौजूद हैं, जहां लोग आराम से नमाज अदा कर सकते हैं। पुलिस के मुताबिक जिले में सैकड़ों मस्जिदें और कई ईदगाह हैं, जिनकी कमेटियों से भी बात की गई है और उन्होंने नियमों का पालन करने का भरोसा दिया है।

अधिकारियों के अनुसार यह कदम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

अबू आज़मी ने जताई नाराज़गी

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अबू आज़मी ने प्रशासन के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को सड़क पर नमाज पढ़ने के कारण पासपोर्ट तक जब्त करने की बात कही जा रही है तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है।

उनका कहना है कि धार्मिक त्योहारों के दौरान प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो किसी समुदाय को निशाना बनाने जैसा लगे।

अबू आज़मी ने यह भी कहा कि देश में संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है और प्रशासन को ऐसे मामलों में संतुलित रवैया अपनाना चाहिए।

राजनीतिक हलकों में छिड़ी बहस

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग प्रशासन के फैसले का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़कें सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं और किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम के कारण यदि यातायात बाधित होता है तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब सड़क पर नमाज को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कई शहरों में प्रशासन ने ऐसी पाबंदियां लगाई हैं।

पिछले वर्षों में मेरठ में ऐसे मामलों में पुलिस ने कार्रवाई भी की थी। कुछ मामलों में सड़कों पर नमाज पढ़ने से यातायात बाधित होने की शिकायतों के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी।

इसी वजह से प्रशासन हर साल त्योहारों से पहले स्थानीय धर्मगुरुओं और संगठनों के साथ बैठक कर नियमों को स्पष्ट करता है।

प्रशासन का क्या कहना है

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी धार्मिक कार्यक्रम को रोकना नहीं है। वे सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नमाज या किसी अन्य आयोजन के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो।

अधिकारियों के मुताबिक लोगों से अपील की गई है कि वे समय से पहले मस्जिदों या ईदगाहों में पहुंचें ताकि किसी को सड़क पर नमाज पढ़ने की जरूरत ही न पड़े।

आगे क्या हो सकता है

इस मुद्दे पर फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी जारी है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है।

कई लोग प्रशासन के फैसले को कानून-व्यवस्था के लिहाज से जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में ईद के करीब आते-आते यह मामला और राजनीतिक रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से यही संदेश दिया जा रहा है कि सभी लोग नियमों का पालन करें और त्योहार को शांति और सौहार्द के साथ मनाएं।

The Meerut Eid namaz controversy has intensified after police warned that offering Eid prayers on public roads could lead to legal action and possible passport scrutiny. Samajwadi Party leader Abu Azmi criticized the decision, calling it unfair and raising concerns about religious freedom. The issue has triggered a broader debate in Uttar Pradesh politics about law and order, public space regulations, and the rights of citizens during religious festivals such as Eid.

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