मेरठ: छात्रा हत्याकांड के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
AIN NEWS 1: मेरठ में अनुसूचित जाति की बीए छात्रा की हत्या के मामले को लेकर हुए प्रदर्शन और सड़क जाम के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया, मुख्य मार्ग को अवरुद्ध किया और कानून-व्यवस्था प्रभावित की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। वहीं, घटनास्थल के वीडियो फुटेज और सोशल मीडिया पोस्ट की भी गहन जांच की जा रही है ताकि अन्य आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा सके।

क्या है पूरा मामला?
रोहटा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली बीए की छात्रा की हत्या के बाद परिजनों और समाज के लोगों में भारी आक्रोश था। इसी के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में लोग मेरठ के कलक्ट्रेट और कमिश्नरी कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य आरोपी के भाई, जो पीएसी में सिपाही है, तथा उसकी मां की गिरफ्तारी की मांग की। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मामले में दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने और विवेचना में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई।
करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो पुलिस ने जाम हटाने के लिए बल प्रयोग किया।
पुलिस ने आठ लोगों को भेजा जेल
सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में रवि गौतम, दिग्विजय सिंह भाटी, लवी प्रधान उर्फ शुभम, ऋतिक गौतम, नवनीत कुमार, अरविंद, हिमांशु सिद्धार्थ और अंकित कुमार शामिल हैं। सभी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में चौधरी चरण सिंह जिला कारागार भेज दिया गया।
इसके अलावा पुलिस ने लगभग 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से अज्ञात आरोपियों की पहचान की जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी पुलिस की कड़ी नजर
मेरठ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले में सोशल मीडिया की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस के अनुसार कुछ लोग इस घटना को जातीय रंग देकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया लैब और साइबर विशेषज्ञ ऐसे सभी पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की जांच कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति भड़काऊ, भ्रामक या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सामग्री साझा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वायरल ऑडियो की जांच
प्रकरण के बीच एक ऑडियो कॉल भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि कॉल करने वाले युवक ने पुलिस जनसंपर्क अधिकारी (PRO) से बात करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को धमकी दी। ऑडियो में कथित तौर पर एसएसपी को चुनौती देने जैसी बातें सुनाई दे रही हैं। पुलिस ने इस वायरल ऑडियो की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कॉल किसने की और उसका उद्देश्य क्या था।
एसएसपी द्वारा थप्पड़ मारने का वीडियो बना चर्चा का विषय
प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें एसएसपी अविनाश पांडेय एक प्रदर्शनकारी को पुलिस वाहन के अंदर थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. बीपी अशोक ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस पहले बातचीत, समझाइश या अन्य वैकल्पिक तरीकों का उपयोग कर सकती थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता थी।
इंस्टाग्राम वीडियो भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार “राज एक्सप्रेशन” नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो अपलोड किया गया, जिसमें पुलिस के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। वीडियो में दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ पुलिस ने मारपीट की। पुलिस ने इस वीडियो को भी जांच के दायरे में लिया है और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्य आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि इस मामले के प्रमुख आरोपियों में दिग्विजय सिंह भाटी, रवि गौतम, सुशील गौतम और हिमांशु सिद्धार्थ शामिल हैं। पुलिस के अनुसार दिग्विजय सिंह भाटी के खिलाफ पहले से नौ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें बैंक मैनेजर को धमकाने, टोल प्लाजा पर कर्मचारियों से विवाद, टोल बैरियर तोड़ने, एससी-एसटी एक्ट तथा अन्य गंभीर मामलों से जुड़े केस शामिल हैं।
पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि दिग्विजय सिंह भाटी को कुछ दिन पहले अमरोहा से जिला बदर किया गया था। वहीं ऋतिक के खिलाफ भी हत्या के प्रयास और सड़क जाम जैसे मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
नाबालिगों और महिलाओं को भड़काने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने महिलाओं और नाबालिगों को आगे कर माहौल को अधिक उग्र बनाने की कोशिश की। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा रही है।
स्टंटबाजी का पुराना मामला भी आया सामने
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति का पहले भी पुलिस स्टिकर लगी गाड़ी से स्टंटबाजी और हुड़दंग करने का वीडियो वायरल हुआ था। उस मामले में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
मेरठ पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी है। वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान की जाएगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, छात्रा की हत्या के मूल मामले की जांच भी जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं पर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएंगे।
The Meerut Student Murder Case has intensified after eight accused were arrested and sent to judicial custody following a major protest and road blockade outside the Collectorate. Meerut Police are investigating a viral audio allegedly threatening SSP Avinash Pandey, while CCTV footage and social media posts are being examined to identify additional suspects. The case has gained significant attention across Uttar Pradesh, making it one of the most discussed law and order incidents in recent days.


















