AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र से सामने आई 14 वर्षीय अतुल की मौत की घटना ने एक बार फिर रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लापरवाही के खतरों को उजागर किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सतारन गांव के रहने वाले अतुल की उंगली में करीब दो महीने पहले एक कुत्ते का नाखून लगने से खरोंच आई थी। परिवार ने इसे मामूली चोट समझा और समय पर रेबीज से बचाव का टीका नहीं लगवाया। बाद में उसकी तबीयत बिगड़ी और दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार और संपर्क में आए लोगों को लेकर आवश्यक सावधानी बरतने तथा ग्रामीणों को रेबीज के प्रति जागरूक करने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। यह घटना बताती है कि जानवर के काटने या खरोंच लगाने के बाद समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना कितना जरूरी है।
कुत्ते को रोटी खिलाते समय लगी थी खरोंच
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अतुल मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र के सतारन गांव का रहने वाला था और कक्षा सात में पढ़ता था। उसे मोहल्ले में घूमने वाले कुत्तों को रोटी खिलाने की आदत थी। करीब दो महीने पहले एक कुत्ते को रोटी खिलाते समय उसके हाथ की उंगली में नाखून लग गया था।
खरोंच को मामूली समझकर उसने इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय एंटी-रेबीज वैक्सीन भी नहीं लगवाई गई। शुरुआती दिनों में उसकी तबीयत सामान्य रही, इसलिए परिवार को किसी गंभीर बीमारी की आशंका नहीं हुई।
हालांकि, किसी जानवर के संपर्क में आने के बाद चोट छोटी दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि उसे नजरअंदाज कर दिया जाए। त्वचा छिलने या घाव बनने की स्थिति में संक्रमण के खतरे का आकलन स्वास्थ्य विशेषज्ञ से कराना जरूरी होता है।
स्कूल में अचानक बिगड़ी तबीयत
रिपोर्टों के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को स्कूल पहुंचने के बाद अतुल को सांस लेने में परेशानी और घुटन महसूस होने लगी। उसकी हालत देखकर स्कूल की शिक्षामित्र ने मदद करने की कोशिश की। जब उसे पानी पिलाने के लिए गिलास दिया गया, तो वह पानी देखकर घबराने लगा।
उसकी स्थिति असामान्य होने पर परिवार को सूचना दी गई। इसके बाद परिजन और स्कूल की शिक्षामित्र उसे बिलारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
अस्पताल में भी उसकी हालत गंभीर बताई गई। उसे सांस लेने और पानी निगलने में परेशानी हो रही थी। चिकित्सकों ने स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए आगे रेफर कर दिया।
बिलारी से दिल्ली तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान
अतुल की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे पहले उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा गया। मीडिया रिपोर्टों में जिला अस्पताल और मेरठ के रास्ते दिल्ली में उपचार के लिए ले जाने का उल्लेख है।
परिवार को उम्मीद थी कि बेहतर अस्पताल में उपचार मिलने से अतुल की जान बच जाएगी, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार सुबह 11 अक्टूबर को दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
एक बच्चे की इस तरह मौत होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना ने स्थानीय लोगों के बीच भी रेबीज और जानवरों से होने वाले संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ा दी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद बीमारी का उपचार बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम संभावित संक्रमण के तुरंत बाद उचित चिकित्सा सहायता लेना है।
क्या कुत्ते के नाखून से भी हो सकता है रेबीज?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या केवल कुत्ते का नाखून लगने से रेबीज हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि खरोंच से त्वचा छिली या नहीं और संक्रमित जानवर की लार घाव तक पहुंचने की आशंका थी या नहीं। कुत्ते के पंजों पर लार लगी होने और उसके संपर्क से त्वचा पर चोट आने की स्थिति में जोखिम का चिकित्सकीय आकलन जरूरी हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बिना खून निकले मामूली खरोंच या त्वचा पर घर्षण भी संभावित जोखिम की श्रेणी में आ सकता है। ऐसी स्थिति में घाव धोने के साथ रेबीज वैक्सीन की जरूरत हो सकती है। त्वचा के भीतर तक पहुंचने वाली खरोंच या संक्रमित लार के टूटे हुए त्वचा-भाग से संपर्क जैसी गंभीर स्थितियों में वैक्सीन के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी दिया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर खरोंच से रेबीज हो जाएगा। सही निर्णय चोट की प्रकृति और जानवर के संपर्क के आधार पर चिकित्सक करते हैं। इसलिए स्वयं जोखिम का अनुमान लगाकर टीकाकरण टालना खतरनाक हो सकता है।
कुत्ता काट ले या खरोंच लगा दे तो क्या करें?
भारत सरकार के राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संभावित जोखिम के बाद शुरुआती देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है।
1. घाव को तुरंत धोएं: प्रभावित जगह को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे घाव में मौजूद वायरस का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
2. तुरंत अस्पताल जाएं: घाव छोटा हो, खून न निकला हो या केवल खरोंच दिखाई दे, फिर भी डॉक्टर से सलाह लें। उपचार का निर्णय चोट की प्रकृति और जोखिम के आधार पर किया जाता है।
3. वैक्सीन में देरी न करें: चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा निर्धारित कोर्स लगवाएं। जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी दिया जा सकता है।
4. घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें: घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ लगाने से बचें। घाव को धोने और चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें।
5. लक्षणों का इंतजार न करें: रेबीज का खतरा होने पर बुखार, घबराहट, पानी निगलने में परेशानी या सांस की तकलीफ शुरू होने का इंतजार करना गंभीर भूल हो सकती है। बचाव का उपचार लक्षण आने से पहले शुरू करना आवश्यक है।
रेबीज के लक्षण दिखने पर क्यों बढ़ जाता है खतरा?
रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित स्तनधारी जानवर की लार के माध्यम से काटने, खरोंच या संक्रमित लार के घाव से संपर्क में आने पर फैल सकती है। संक्रमण के बाद लक्षण आने में कई सप्ताह या महीने भी लग सकते हैं। यह अवधि हर व्यक्ति में अलग हो सकती है।
शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और चोट वाली जगह पर दर्द या असामान्य संवेदना शामिल हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर बेचैनी, निगलने में परेशानी, पानी से संबंधित असामान्य प्रतिक्रिया और तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
लक्षण शुरू होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा होता है। इसके विपरीत, संभावित संपर्क के बाद घाव की सही सफाई और समय पर निर्धारित उपचार संक्रमण को रोकने में प्रभावी हो सकते हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
मुरादाबाद के अतुल की मौत से जुड़ी खबर लोगों को यह संदेश देती है कि जानवरों के प्रति संवेदनशील रहने के साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। किसी कुत्ते या अन्य स्तनधारी जानवर से चोट लगने पर उसे मामूली समझकर छोड़ देना उचित नहीं है।
अभिभावकों को बच्चों को समझाना चाहिए कि कुत्ते के काटने या खरोंच लगाने पर घटना तुरंत परिवार को बताएं। स्कूलों और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से भी लोगों को रेबीज के लक्षणों, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जानी चाहिए।
मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र में 14 वर्षीय अतुल की मौत की खबर गंभीर चेतावनी है। कुत्ते के नाखून से खरोंच लगने के बाद समय पर रेबीज से बचाव का उपचार न लेने की बात मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, हर खरोंच से संक्रमण नहीं होता, लेकिन संभावित जोखिम को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। घाव को 15 मिनट तक धोना, तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना और निर्धारित टीकाकरण पूरा करना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्रोत: 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मुरादाबाद की मीडिया रिपोर्टें; भारत सरकार का राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम; विश्व स्वास्थ्य संगठन के रेबीज संबंधी दिशा-निर्देश।
Moradabad news: A 14-year-old boy named Atul from Bilari, Uttar Pradesh, reportedly died of rabies after a dog scratch on his finger went untreated. The tragic incident highlights the importance of rabies prevention, timely anti-rabies vaccination and proper wound care after dog bites or scratches. Health authorities recommend washing the affected area with soap and running water for at least 15 minutes and seeking immediate medical attention. Learn about rabies symptoms, dog scratch infection risks, rabies vaccine guidelines and preventive measures under India’s National Rabies Control Programme.



















