AIN NEWS 1 नोएडा, 7 अक्टूबर 2026: नोएडा और गौतमबुद्ध नगर की हाईराइज सोसाइटियों में वर्षों से अटकी फ्लैट रजिस्ट्रियों का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है। अब इस मामले को प्रशासनिक बैठकों और आश्वासनों से आगे ले जाकर न्यायालय तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। नोएडा हाईराइज फेडरेशन (NHRF) के अध्यक्ष निखिल सिंघल ने कहा है कि यदि लंबित रजिस्ट्रियों को लेकर जल्द ठोस समाधान सामने नहीं आता है तो फेडरेशन प्रभावित फ्लैट खरीदारों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करेगा।
निखिल सिंघल का कहना है कि फ्लैट खरीदार पिछले कई वर्षों से अपने घर की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने फ्लैट की पूरी या बड़ी राशि का भुगतान कर दिया है, ईएमआई चुकाई है और लंबे समय से उन्हीं घरों में रह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम संपत्ति का वैधानिक दस्तावेज पूरा नहीं हो पा रहा है।
उनके मुताबिक, अब सिर्फ बैठकें करने और आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रभावित परिवारों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उनकी रजिस्ट्री किस वजह से रुकी हुई है, जिम्मेदारी किस स्तर पर है और उसे पूरा करने की समयसीमा क्या है।
रजिस्ट्री के मुद्दे पर सोसाइटीवार डेटा जुटाएगा NHRF
NHRF ने लंबित रजिस्ट्रियों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए सोसाइटीवार जानकारी जुटाने का अभियान शुरू करने की बात कही है। इसके तहत अलग-अलग हाईराइज सोसाइटियों में यह पता लगाया जाएगा कि कितने फ्लैटों की रजिस्ट्री लंबित है और प्रत्येक मामले में रुकावट की वजह क्या है।
फेडरेशन के मुताबिक, जानकारी में यह भी देखा जाएगा कि कहीं बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बकाया या अन्य विवाद तो रजिस्ट्री में बाधा नहीं बन रहे हैं। साथ ही यह भी दर्ज किया जाएगा कि किन खरीदारों ने अपनी ओर से सभी जरूरी भुगतान और औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
इस पूरी कवायद का मकसद अलग-अलग सोसाइटियों की शिकायतों को एक साझा मंच पर लाना है। NHRF का कहना है कि जब प्रत्येक परियोजना से जुड़े दस्तावेज और तथ्य व्यवस्थित तरीके से सामने होंगे तो प्रशासन, सरकार और जरूरत पड़ने पर न्यायालय के समक्ष मामला ज्यादा स्पष्ट तरीके से रखा जा सकेगा।
नोएडा में रजिस्ट्री का विवाद नया नहीं है। इस वर्ष मई में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अथॉरिटी और बिल्डरों के बीच बकाये को लेकर 21 परियोजनाओं में करीब 8,000 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री प्रभावित होने की बात सामने आई थी।
खरीदारों का सवाल- बिल्डर और अथॉरिटी के विवाद की कीमत क्यों चुकाएं?
निखिल सिंघल ने कहा कि आम फ्लैट खरीदार ने अपना घर खरीदने के लिए जीवनभर की बचत लगाई है। कई लोगों ने बैंक से लोन लिया और वर्षों तक ईएमआई चुकाई। ऐसे में यदि बिल्डर और प्राधिकरण के बीच भुगतान, बकाया या अन्य मुद्दों को लेकर विवाद है तो उसका सीधा असर खरीदार पर नहीं पड़ना चाहिए।
उनका कहना है कि किसी परिवार के लिए रजिस्ट्री केवल एक कागज नहीं है। यह उसके घर, संपत्ति के अधिकार, निवेश और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इसलिए पात्र खरीदारों को अनिश्चितकाल तक रजिस्ट्री का इंतजार कराना गंभीर विषय है।
यह मुद्दा न्यायिक स्तर पर भी सामने आता रहा है। मार्च 2026 में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से संबंधित कार्यवाही के दौरान ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की एक परियोजना में रजिस्ट्रेशन में देरी और प्राधिकरण के बकाये के बीच संबंध का उल्लेख हुआ था। अदालत ने सभी हितधारकों को शामिल करते हुए व्यापक समाधान की जरूरत पर जोर दिया था।
सितंबर में नोएडा अथॉरिटी ने भी रजिस्ट्री तेज करने की बात कही
लंबित रजिस्ट्री के बीच सितंबर 2026 में नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में फ्लैट खरीदारों के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ी नई नीति को मंजूरी दिए जाने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य तैयार फ्लैटों से संबंधित भुगतान व्यवस्था को आसान बनाकर रजिस्ट्री प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।
इसके बाद भी कई खरीदारों के सामने सवाल यही है कि नीतिगत फैसलों का लाभ उनके स्तर पर कब दिखाई देगा। NHRF इसी बिंदु को प्रमुखता से उठा रहा है।
निखिल सिंघल का कहना है कि नीति बनाना पहला कदम हो सकता है, लेकिन असली सफलता तभी मानी जाएगी जब पात्र फ्लैट खरीदारों के नाम रजिस्ट्रियां वास्तव में शुरू हों और प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।
हाईकोर्ट जाने से पहले जुटाए जाएंगे दस्तावेज
NHRF के अनुसार, हाईकोर्ट जाने से पहले प्रभावित सोसाइटियों से जुड़े दस्तावेज और तथ्यों को व्यवस्थित किया जाएगा। इनमें लंबित रजिस्ट्रियों की संख्या, खरीदारों की स्थिति, बिल्डर से जुड़े मुद्दे, प्राधिकरण के स्तर पर लंबित प्रक्रियाएं और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल हो सकती है।
फेडरेशन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी एक बिल्डर या किसी एक प्राधिकरण को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उन खरीदारों के अधिकारों को सामने रखना है जो लंबे समय से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं।
निखिल सिंघल ने कहा कि फेडरेशन की कोशिश रहेगी कि न्यायालय के सामने मामला भावनात्मक आरोपों के बजाय दस्तावेजों और तथ्यों के साथ रखा जाए।
चुनाव से पहले जवाब मांगने की बात
प्रेस विज्ञप्ति में NHRF ने आगामी चुनाव से पहले लंबित फ्लैट रजिस्ट्री को हाईराइज निवासियों का प्रमुख मुद्दा बताया है। सिंघल के मुताबिक, निवासियों को स्पष्ट जानकारी चाहिए कि किस परियोजना की रजिस्ट्री कब शुरू होगी, किस कारण से रुकी है, जिम्मेदारी किसकी है और समस्या के समाधान के लिए क्या समयसीमा तय की गई है।
उन्होंने कहा कि हाईराइज निवासी अब केवल चुनावी घोषणाओं या बैठकों के भरोसे नहीं रहना चाहते। उनकी मांग है कि उनके घर से जुड़े मामलों में ठोस और मापने योग्य परिणाम सामने आएं।
हालांकि, रजिस्ट्री के अलावा भी हाईराइज क्षेत्रों से जुड़े कई नागरिक मुद्दे फेडरेशन उठा रहा है। इनमें ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो कनेक्टिविटी, नोएडा अथॉरिटी की जवाबदेही, सोसाइटी से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे और निवासियों की अन्य समस्याएं शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों में भी NHRF की ओर से लंबित रजिस्ट्री और ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो समेत कई मुद्दे उठाए जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो पर भी स्पष्ट रोडमैप की मांग
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो को लेकर भी निवासियों में लंबे समय से इंतजार है। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, एक्वा लाइन के ग्रेटर नोएडा वेस्ट विस्तार की डीपीआर अंतिम मंजूरी के लिए पीएमओ भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। वहीं सितंबर की रिपोर्ट में प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर केंद्रीय मंजूरी की उम्मीद जताई गई थी।
NHRF का कहना है कि मेट्रो परियोजना को लेकर भी निवासियों को स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप मिलना चाहिए, ताकि उन्हें यह पता रहे कि परियोजना किस चरण में है और आगे की प्रक्रिया क्या है।
‘लड़ाई किसी दल के खिलाफ नहीं’
निखिल सिंघल ने स्पष्ट किया कि NHRF का अभियान किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि संगठन का उद्देश्य हाईराइज निवासियों की समस्याओं को संबंधित विभागों, प्रशासन और जरूरत पड़ने पर न्यायालय के सामने रखना है।
उन्होंने कहा कि नोएडा और गौतमबुद्ध नगर के निवासी अब अपने घर की रजिस्ट्री, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर स्पष्ट परिणाम चाहते हैं।
NHRF के अनुसार, आने वाले दिनों में सोसाइटियों से लंबित रजिस्ट्रियों का डेटा जुटाने और संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित करने पर जोर रहेगा। इसके बाद कानूनी विकल्पों पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
निखिल सिंघल ने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है तो हाईराइज निवासियों की आवाज न्यायालय तक पहुंचाई जाएगी। उनका कहना है कि अब यह आवाज केवल सोसाइटी की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर अदालत तक उठाई जाएगी।
इस बीच, फ्लैट खरीदारों की नजर अब इस बात पर है कि सितंबर में घोषित नीतिगत फैसलों का जमीनी असर कितनी तेजी से दिखाई देता है और लंबित रजिस्ट्रियों के मामलों में संबंधित प्राधिकरण तथा बिल्डर आगे क्या कदम उठाते हैं।
Noida flat registry remains a major concern for thousands of homebuyers in Noida and Gautam Buddh Nagar. Noida Highrise Federation (NHRF) President Nikhil Singhal has announced plans to approach the Allahabad High Court over pending flat registries and demand a clear, time-bound resolution. The issue involves homebuyers waiting for property registration due to builder-authority disputes and other pending formalities. The latest Noida flat registry update also comes after the Noida Authority approved measures aimed at facilitating registrations. Residents are now seeking transparency, accountability, a project-wise timeline and concrete action on pending registrations, along with a clear roadmap for Greater Noida West Metro connectivity.



















