AIN NEWS 1 अयोध्या: भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर दीपों की रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है। इस साल दीपावली के मौके पर होने वाला 10वां दीपोत्सव कई मायनों में खास रहने वाला है। 5 से 7 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित इस आयोजन के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राम की पैड़ी समेत सरयू तट के प्रमुख घाटों को लाखों मिट्टी के दीयों से सजाने की योजना है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस बार करीब 33 लाख मिट्टी के दीये जलाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अलग-अलग चरणों की रिपोर्टों में दीयों की संख्या 30 से 33 लाख के बीच बताई गई है। 6 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 लाख दीये जलाने के लक्ष्य के लिए 32 लाख दीयों की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। वहीं 5 अक्टूबर की रिपोर्टों में 33 लाख दीयों का लक्ष्य बताया गया है। इसलिए अंतिम संख्या आयोजन के समय प्रशासन की व्यवस्था और सत्यापन के बाद स्पष्ट होगी।
करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में सजेगी दीपों की कतार
दीपोत्सव की तैयारियों का सबसे आकर्षक हिस्सा राम की पैड़ी और उसके आसपास का क्षेत्र होगा। करीब दो किलोमीटर के दायरे में घाटों पर दीप सजाने की तैयारी की जा रही है। राम की पैड़ी से लेकर सरयू के प्रमुख घाटों तक दीपों की कतारें बनाई जाएंगी।
इस बार 55 प्रमुख घाटों पर दीप सजाने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग घाटों पर स्वयंसेवक दीपों को निर्धारित पैटर्न में सजाएंगे। इससे दीप प्रज्ज्वलन के दौरान पूरे क्षेत्र में एक साथ रोशनी दिखाई देने की उम्मीद है।
55 हजार लीटर सरसों के तेल की तैयारी
लाखों दीयों को एक साथ जलाने के लिए बड़ी मात्रा में तेल की जरूरत होगी। इसके लिए करीब 55 हजार लीटर सरसों के तेल की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही लगभग 65 लाख बातियों की तैयारी की जा रही है।
दीप प्रज्ज्वलन से जुड़ी अन्य सामग्री में करीब 150 किलो कपूर, मोमबत्तियां और स्वयंसेवकों के लिए टी-शर्ट भी शामिल हैं। आयोजन से जुड़ी सामग्री और व्यवस्थाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
34 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
इतने बड़े स्तर पर दीपोत्सव को सफल बनाने में हजारों युवाओं और छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के अनुसार करीब 34 हजार वालंटियर और छात्र आयोजन से जुड़ेंगे।
इनकी जिम्मेदारी केवल दीप सजाने और जलाने तक सीमित नहीं रहेगी। घाटों पर व्यवस्थाएं बनाए रखने, दीप प्रज्ज्वलन में सहयोग करने और आयोजन के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं में भी स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी।
इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने के कारण उनके भोजन और दूसरी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की जा रही है। 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार 34 हजार वालंटियर के लिए टी-शर्ट, मोमबत्ती और भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
राम की पैड़ी पर होगा सांस्कृतिक कार्यक्रम
दीपोत्सव केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं रहेगा। राम की पैड़ी पर विशेष मंच तैयार किया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा अयोध्या के प्रमुख मंदिरों को एलईडी लाइटों से सजाने की तैयारी है। सरयू तट और अलग-अलग घाटों पर भी विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऐसे में दीपोत्सव के दौरान अयोध्या का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप और अधिक आकर्षक नजर आने की उम्मीद है।
स्थानीय कुम्हारों को भी मिलेगा काम
दीपोत्सव के लिए बड़ी संख्या में मिट्टी के दीयों की जरूरत होगी। इस वजह से स्थानीय कुम्हारों और दीये तैयार करने वाले वेंडरों को भी इससे काम मिलने की संभावना है।
अमृत विचार की रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद स्थानीय कुम्हारों और वेंडरों के साथ समन्वय कर रही है, ताकि अधिक से अधिक दीयों की आपूर्ति स्थानीय स्तर से हो सके। इससे दीपोत्सव की तैयारियों के साथ स्थानीय कारीगरों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
तीन नवंबर से शुरू होगी दीप सजाने की प्रक्रिया
तैयारियों के अगले चरण में घाटों पर दीपों को सजाने का काम शुरू किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 नवंबर से दीप सजाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है और 7 नवंबर को दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। इसके लिए सरयू तट के प्रमुख घाटों का निरीक्षण भी किया जा रहा है।
अधिकारियों ने घाटों पर साफ-सफाई, पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं को समय रहते दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी जोर
दीपोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना होगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए घाटों, राम की पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। सफाई, बिजली, पेयजल और यातायात के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नए रिकॉर्ड की तैयारी, लेकिन अंतिम पुष्टि बाद में
अयोध्या का दीपोत्सव पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में दीप जलाने के कारण चर्चा में रहा है। इस बार भी प्रशासन की योजना पिछले रिकॉर्ड से आगे निकलने की है। 5 अक्टूबर की रिपोर्टों में 33 लाख दीयों का लक्ष्य बताया गया है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 33 लाख अभी आयोजन का लक्ष्य है, बना हुआ रिकॉर्ड नहीं। अंतिम रिकॉर्ड कितने दीयों के साथ बनता है, यह वास्तविक दीप प्रज्ज्वलन और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
अयोध्या के लिए धार्मिक आयोजन के साथ पर्यटन का भी बड़ा अवसर
दीपोत्सव अब अयोध्या के प्रमुख वार्षिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। दीपों से सजे घाट, रोशनी से जगमगाते मंदिर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सरयू तट का दृश्य बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
2026 का 10वां दीपोत्सव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासन इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में घाटों की सजावट, दीपों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की ट्रेनिंग और सुरक्षा इंतजामों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
फिलहाल अयोध्या में तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अगर निर्धारित योजना के मुताबिक दीप जलाए जाते हैं, तो नवंबर में राम की पैड़ी और सरयू के घाट लाखों दीपों की रोशनी से जगमगाते नजर आएंगे। हालांकि दीयों की अंतिम संख्या और किसी नए रिकॉर्ड की पुष्टि आयोजन के बाद ही मानी जानी चाहिए।
Ayodhya Deepotsav 2026 is set to be a major Diwali celebration in Uttar Pradesh, with preparations for millions of earthen diyas at Ram Ki Paidi and the Saryu Ghats. The 10th Ayodhya Deepotsav is scheduled from November 5 to 7, with plans involving up to 33 lakh diyas, 55,000 litres of mustard oil, 65 lakh cotton wicks and thousands of volunteers. The event will also feature cultural programmes, illuminated temples, decorated ghats and extensive arrangements for visitors, security, cleanliness and traffic management.



















