ऑनलाइन फर्जी फ्रेंडशिप क्लब के नाम पर चल रहा लूट का खेल बेनकाब, महिलाओं समेत 6 आरोपी गिरफ्तार
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी और लूट की घटनाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा पुलिस ने सेक्टर-24 क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन फर्जी फ्रेंडशिप क्लब संचालित कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह में शामिल महिलाएं पहले लोगों से दोस्ती करती थीं, फिर मुलाकात के बहाने उन्हें सुनसान स्थान पर बुलाया जाता था। वहां पहले से मौजूद गिरोह के अन्य सदस्य पीड़ित के साथ मारपीट कर नकदी, मोबाइल, आभूषण और अन्य कीमती सामान लूट लेते थे।

पुलिस ने इस मामले में तीन महिलाओं समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में इसी तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहा था। पुलिस का मानना है कि इस गैंग के शिकार कई लोग सामाजिक बदनामी और शर्मिंदगी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराते थे, जिसका फायदा आरोपी लगातार उठाते रहे।
ऐसे बिछाया जाता था जाल
पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया, ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। गिरोह की महिला सदस्य खुद को अकेली, दोस्ती की इच्छुक या साथी की तलाश में बताकर बातचीत शुरू करती थीं।
धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद वे पीड़ित को मिलने के लिए तैयार करती थीं। मुलाकात के लिए ऐसी जगह तय की जाती थी जहां आसपास ज्यादा लोगों की आवाजाही न हो। जैसे ही पीड़ित वहां पहुंचता, गिरोह के अन्य सदस्य मौके पर पहुंच जाते और उसे घेर लेते।
इसके बाद पीड़ित के साथ मारपीट की जाती, उसे डराया-धमकाया जाता और उसके पास मौजूद नकदी, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सोने की चेन, अंगूठी तथा अन्य कीमती सामान लूट लिया जाता। कई मामलों में पीड़ितों को धमकी देकर वहां से भगा दिया जाता था ताकि वे पुलिस तक न पहुंच सकें।
तीन महिलाएं निभाती थीं अहम भूमिका
पुलिस ने जिन महिलाओं को गिरफ्तार किया है उनकी पहचान निधि यादव, प्रियंका यादव और रिया यादव के रूप में हुई है। वहीं गिरोह के अन्य गिरफ्तार सदस्य ओमवीर यादव, मंजेश यादव और पंकज यादव हैं।
जांच में पता चला है कि महिलाओं की भूमिका इस पूरे अपराध में सबसे महत्वपूर्ण थी। वे ही लोगों से बातचीत कर भरोसा जीतती थीं और मुलाकात तय कराती थीं। इसके बाद बाकी आरोपी मौके पर पहुंचकर लूट की वारदात को अंजाम देते थे।
दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से सक्रिय था गिरोह
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह कोई एक-दो दिन का अपराध नहीं था। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि गिरोह लंबे समय से दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और एनसीआर के अन्य इलाकों में सक्रिय था।
हर वारदात के बाद आरोपी अपना ठिकाना बदल लेते थे और नए मोबाइल नंबरों व सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल करते थे, जिससे पुलिस तक उनकी पहचान आसानी से नहीं पहुंच पाती थी।
शिकायत नहीं होने से बढ़ता गया गिरोह का हौसला
पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि अधिकांश पीड़ित शिकायत दर्ज कराने से बचते थे। कई लोगों को डर था कि यदि वे पुलिस के पास जाएंगे तो परिवार और समाज में उनकी बदनामी होगी।
यही कारण रहा कि आरोपी लगातार वारदात करते रहे और उनके खिलाफ पर्याप्त शिकायतें सामने नहीं आ सकीं। पुलिस का मानना है कि वास्तविक पीड़ितों की संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक हो सकती है।
लूट के पैसों से खरीदी लग्जरी गाड़ियां
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह ने लूट की रकम से काफी संपत्ति बनाई थी। आरोपियों ने एक टोयोटा फॉर्च्यूनर सहित दो अन्य कारें खरीदी थीं। उनकी जीवनशैली भी पूरी तरह बदल चुकी थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी महंगे कपड़े पहनते थे, आलीशान जीवन जी रहे थे और उनके खर्च आम लोगों की तुलना में काफी अधिक थे। अधिकारियों का मानना है कि अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल लग्जरी लाइफस्टाइल बनाए रखने में किया जा रहा था।
पुलिस कर रही है गहन जांच
नोएडा सेक्टर-24 पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस उनके बैंक खातों, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह से अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।
पुलिस की लोगों से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया या ऑनलाइन फ्रेंडशिप प्लेटफॉर्म पर दोस्ती करते समय सतर्क रहें। यदि कोई व्यक्ति पहली मुलाकात के लिए सुनसान स्थान पर बुलाता है तो वहां जाने से बचें।
यदि किसी के साथ इस प्रकार की घटना होती है तो बिना झिझक तुरंत पुलिस को सूचना दें। समय पर शिकायत मिलने से ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है और अन्य लोगों को भी उनका शिकार बनने से बचाया जा सकता है।
ऑनलाइन फ्रेंडशिप के नाम पर बढ़ रहे अपराध
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी और फ्रेंडशिप के नाम पर होने वाले अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर मुलाकात या निवेश, नौकरी अथवा अन्य बहानों से लोगों को फंसाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
नोएडा पुलिस द्वारा फर्जी ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब चलाने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी जल्द खुलासा होगा। पुलिस की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। नागरिकों को भी चाहिए कि वे ऑनलाइन दोस्ती और मुलाकात के मामलों में पूरी सावधानी बरतें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को जानकारी दें।
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