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यूपी के किसानों के लिए बड़ी खबर: सोलर पंप पर सब्सिडी, डीजल का खर्च होगा कम; अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई का मौका

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सौर ऊर्जा से जुड़ी PM-KUSUM योजना सिंचाई की लागत कम करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत किसानों को कृषि सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने और पहले से लगे बिजली के कृषि पंपों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने में सरकारी सहायता दी जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान सिंचाई के लिए डीजल पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है और धूप के समय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर खेतों की सिंचाई कर सकता है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर PM-KUSUM के तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने का दावा तेजी से प्रसारित होता रहा है। सरकारी दस्तावेजों की जांच करने पर तस्वीर थोड़ी अलग सामने आती है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सामान्य राज्यों में स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप के लिए केंद्र सरकार की सहायता 30 प्रतिशत और राज्य सरकार की सहायता कम से कम 30 प्रतिशत है। इस तरह सामान्य स्थिति में कुल सहायता 60 प्रतिशत तक हो सकती है और शेष राशि किसान को देनी होती है। बैंक से ऋण की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।

क्या है PM-KUSUM योजना?

PM-KUSUM का पूरा नाम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है। केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय यानी MNRE ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और किसानों को ऊर्जा के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी।

योजना का उद्देश्य केवल सोलर पंप उपलब्ध कराना नहीं है। इसके तहत कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, डीजल आधारित सिंचाई पंपों को सोलर पंप में बदलने और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरीकरण करने पर जोर दिया गया है।

किसानों को कैसे फायदा मिलेगा?

किसान के लिए सबसे बड़ा फायदा सिंचाई की लागत में कमी है। डीजल पंप चलाने में लगातार डीजल खरीदना पड़ता है। डीजल की कीमत बढ़ने पर खेती की लागत भी बढ़ती है। इसके विपरीत सोलर पंप में ईंधन के रूप में डीजल की जरूरत नहीं पड़ती।

एक बार सोलर पंप स्थापित होने के बाद किसान सूर्य की रोशनी से पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर सकता है। इससे लंबे समय में डीजल और ऊर्जा खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

योजना का एक दूसरा फायदा यह है कि कुछ परिस्थितियों में सोलर पंप या सोलर सिस्टम से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को बिजली वितरण कंपनी यानी DISCOM को बेचने की व्यवस्था भी हो सकती है। यह सुविधा मुख्य रूप से PM-KUSUM के ग्रिड-कनेक्टेड घटकों से जुड़ी है और इसके लिए संबंधित राज्य की व्यवस्था तथा बिजली खरीद की शर्तें लागू होती हैं।

PM-KUSUM में तीन प्रमुख घटक

PM-KUSUM को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझा जा सकता है।

1. Component-A: सोलर पावर प्लांट

इस घटक के तहत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, FPO और अन्य पात्र संस्थाएं विकेंद्रीकृत सोलर पावर प्लांट स्थापित कर सकती हैं।

इन परियोजनाओं की क्षमता सामान्यतः 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक हो सकती है। पैदा होने वाली बिजली को निर्धारित व्यवस्था के तहत DISCOM द्वारा खरीदा जा सकता है। उत्तर प्रदेश की व्यवस्था में भी किसानों की जमीन पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से बिजली उत्पादन और बिक्री का प्रावधान किया गया है।

2. Component-B: डीजल पंप की जगह सोलर पंप

यह हिस्सा उन किसानों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है जिनके क्षेत्र में ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है और वे सिंचाई के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल करते हैं।

इस घटक के तहत 7.5 HP तक के स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप लगाए जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की आधिकारिक PM-KUSUM वेबसाइट भी Component-B के तहत किसानों को स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताती है।

3. Component-C: पुराने बिजली पंप का सौरीकरण

यदि किसान के पास पहले से ग्रिड से जुड़ा कृषि पंप है तो उसे भी सोलर सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।

इस व्यवस्था में किसान अपने सिंचाई पंप की जरूरत के लिए सौर बिजली का इस्तेमाल कर सकता है। यदि सिस्टम जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करता है तो योजना के नियमों के अनुसार अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेचने का प्रावधान हो सकता है।

क्या यूपी में 90% सब्सिडी मिलती है?

यह सवाल किसानों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकारी दस्तावेजों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश के हर किसान को PM-KUSUM के तहत सोलर पंप पर 90 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।

MNRE की मौजूदा आधिकारिक जानकारी के अनुसार सामान्य राज्यों में स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता 30 प्रतिशत और राज्य सरकार की सहायता कम से कम 30 प्रतिशत है। शेष अधिकतम 40 प्रतिशत किसान के हिस्से में आता है। बैंक फाइनेंस मिलने की स्थिति में किसान को शुरुआती तौर पर कम राशि जमा करनी पड़ सकती है।

उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति में PM-KUSUM Component-C1 के तहत कुछ किसान श्रेणियों के लिए राज्य की ओर से अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी दर्ज है। नीति के अनुसार अनुसूचित जनजाति, वनटांगिया और मुसहर किसानों के लिए 70 प्रतिशत तथा अन्य किसानों के लिए 60 प्रतिशत अतिरिक्त राज्य सहायता का उल्लेख किया गया है। इसलिए वास्तविक किसान अंशदान उसकी पात्रता, घटक और लागू सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग हो सकता है।

इसलिए किसान को किसी एजेंट या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर 90 प्रतिशत सब्सिडी मानकर पैसा जमा नहीं करना चाहिए। आवेदन से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल पर लागू दर और पात्रता की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

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यूपी के किन किसानों को मिल सकता है लाभ?

PM-KUSUM के अलग-अलग घटकों में पात्रता अलग है। Component-B में व्यक्तिगत किसान, जल उपयोगकर्ता संघ और सामुदायिक या क्लस्टर आधारित सिंचाई व्यवस्था से जुड़े लाभार्थियों को शामिल किया जा सकता है। Component-C में ग्रिड से जुड़े कृषि पंप वाले किसान पात्र हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के PM-KUSUM पोर्टल पर विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारियों की जानकारी भी उपलब्ध है। पोर्टल पर आवेदन की स्थिति, लाभार्थी विवरण और संबंधित एजेंसियों की जानकारी देखने की सुविधा भी दी गई है।

आवेदन करने से पहले सावधान रहें

PM-KUSUM के नाम पर फर्जी वेबसाइट और एजेंटों के जरिए ठगी की शिकायतों को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को केवल सब्सिडी दिलाने के नाम पर पैसे न दें।

किसान को आधिकारिक पोर्टल और संबंधित सरकारी विभाग से ही आवेदन की प्रक्रिया, पंप की क्षमता, कीमत, किसान अंशदान और सब्सिडी की जानकारी लेनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल पर अधिकृत एजेंसियों और पंप से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की लागत खेती के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। जहां बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं है, वहां किसान अक्सर डीजल पंप पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सोलर पंप किसान के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध करा सकता है।

सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से डीजल की खपत कम हो सकती है और कृषि क्षेत्र में प्रदूषण घटाने में भी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम के मामले में अतिरिक्त बिजली से किसान की आय का एक अतिरिक्त स्रोत बनने की संभावना भी है।

सरकार का बड़ा लक्ष्य

केंद्र सरकार ने PM-KUSUM के तहत देश में बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और लाखों कृषि पंपों के सौरीकरण का लक्ष्य रखा था। आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल के डैशबोर्ड पर 31 जुलाई 2026 तक Component-A, B और C के तहत स्वीकृत तथा स्थापित/सौरीकृत परियोजनाओं के आंकड़े भी उपलब्ध हैं।

यानी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सोलर पंप और कृषि पंपों के सौरीकरण का काम चल रहा है।

किसानों को क्या करना चाहिए?

अगर आप उत्तर प्रदेश के किसान हैं और सोलर सिंचाई पंप लगवाना चाहते हैं तो सबसे पहले यह पता करें कि आपके जिले में PM-KUSUM के तहत किस घटक में आवेदन उपलब्ध है। इसके बाद अपनी पात्रता, पंप की क्षमता, कुल लागत, केंद्र और राज्य की सहायता तथा किसान के हिस्से की राशि की जानकारी लें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 90 प्रतिशत सब्सिडी के दावे को बिना जांचे सही न मानें। सरकारी सहायता किसान की श्रेणी और योजना के लागू घटक के अनुसार बदल सकती है।

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल पर योजना, आवेदन की स्थिति, लाभार्थी सूची, अधिकृत एजेंसियों और जिला स्तर के अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध है।

कुल मिलाकर PM-KUSUM किसानों के लिए सिंचाई की लागत घटाने, डीजल पर निर्भरता कम करने और खेती में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना है। लेकिन सब्सिडी की सही राशि जानने के लिए किसान को अपने जिले में लागू वर्तमान नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

PM-KUSUM Scheme in Uttar Pradesh is designed to help farmers adopt solar irrigation pumps, reduce dependence on diesel-powered agricultural pumps and lower irrigation costs. Under PM KUSUM, eligible farmers can receive government financial assistance for standalone solar agriculture pumps and solarisation of existing grid-connected agricultural pumps. In eligible grid-connected projects, farmers can also use solar power for irrigation and may be able to sell surplus electricity to DISCOMs under applicable state regulations. Farmers should verify the latest subsidy, eligibility, application process and approved vendors through the official PM-KUSUM portal before making any payment.

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Pawan Chaudhary
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पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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