AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों धार्मिक आयोजनों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की प्रस्तावित कथाओं को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने की अपील की है। दूसरी ओर, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से प्रतापगढ़ के कुंडा में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा का आयोजन कराया जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर कुंडा में होने वाले इस धार्मिक आयोजन को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान को लेकर धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर विवाद जारी है।

कुंडा में 17 नवंबर से प्रस्तावित है बड़ा धार्मिक आयोजन
प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक राजा भैया की ओर से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा का आयोजन कराया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर जारी जानकारी के अनुसार, कथा का आयोजन राजा भैया के राजभवन परिसर, बेंती स्थित योगीराज देवरहा बाबा कथा मंडपम में होना प्रस्तावित है।
बागेश्वर धाम के कार्यक्रम कैलेंडर में कुंडा का श्री हनुमंत कथा आयोजन 17 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक दर्ज है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों और शुरुआती आयोजन संबंधी खबरों में 17 से 19 नवंबर तक तीन दिवसीय श्रीराम कथा का उल्लेख किया गया है।
इस प्रकार आयोजन की अवधि को लेकर प्रकाशित जानकारियों में अंतर देखने को मिला है। नवीनतम कार्यक्रम कैलेंडर में 17 से 20 नवंबर तक चार दिनों का उल्लेख है। इसलिए श्रद्धालुओं को अंतिम कार्यक्रम और समय-सारिणी के लिए आयोजकों की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
इस आयोजन को लेकर राजा भैया ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को भी निमंत्रण दिया है। इससे कार्यक्रम की राजनीतिक और सामाजिक चर्चा और बढ़ गई है।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित उनकी टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विशेष रूप से यादव और रघुवंशी समाज से जुड़े लोगों के बीच इस टिप्पणी को लेकर नाराजगी की चर्चा हुई।
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए माफी भी मांगी। उनका कहना था कि उनकी बात का उद्देश्य किसी भगवान या उनके भक्तों की भावनाओं को आहत करना नहीं था।
हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद राजनीतिक विवाद शांत नहीं हुआ। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए धार्मिक भावनाओं के सम्मान का सवाल खड़ा कर दिया।
अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन से की रोक लगाने की अपील
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
अखिलेश यादव ने तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को ब्रज और अवध में स्वागत नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर ऐसे लोगों के प्रवेश को लेकर प्रतिबंधात्मक संदेश वाला बोर्ड लगाने जैसी टिप्पणी भी की।
इसके बाद अखिलेश यादव ने अपने विरोध को और आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार तथा प्रशासन से धीरेंद्र शास्त्री के प्रस्तावित सार्वजनिक आयोजनों को अनुमति नहीं देने की अपील की।
उन्होंने कुंडा के अलावा अंबेडकरनगर, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा में प्रस्तावित कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
अखिलेश यादव का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से ऐसी टिप्पणियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। उनका विरोध केवल कुंडा के आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में प्रस्तावित अन्य कार्यक्रमों को लेकर भी है।
राजा भैया के आयोजन ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
इस पूरे विवाद में कुंडा का कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इसका आयोजन राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है।
राजा भैया उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं। वह लंबे समय से कुंडा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
राजा भैया और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच धार्मिक जुड़ाव पहले भी सार्वजनिक रूप से दिखाई दे चुका है। दोनों सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के दौरान भी साथ नजर आए थे। राजा भैया बागेश्वर धाम भी जा चुके हैं।
अब कुंडा में कथा के आयोजन की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर राजनीतिक विरोध चल रहा है। यही वजह है कि इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर राजा भैया के नाम से चुनौतीपूर्ण बयान भी प्रसारित हो रहे हैं। इस संबंध में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में चुनौती भरे शब्द मुख्य रूप से राजा भैया के समर्थकों की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आए हैं। इसलिए किसी प्रमाणित वीडियो या आधिकारिक बयान के बिना यह लिखना उचित नहीं होगा कि राजा भैया ने स्वयं किसी को कथा रोकने की खुली चुनौती दी है।
दूसरे जिलों में भी प्रस्तावित हैं धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित आयोजनों को लेकर विवाद केवल प्रतापगढ़ तक सीमित नहीं है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रदेश के कई जिलों में उनके धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इनमें गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा जैसे शहर शामिल हैं। कुछ आयोजनों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी जोड़ा जा रहा है।
इन कार्यक्रमों को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन से अनुमति देने के मामले में सतर्कता बरतने की अपील की है।
दूसरी ओर, धार्मिक आयोजनों के समर्थकों का मानना है कि कथा और प्रवचन जैसे कार्यक्रम आस्था से जुड़े विषय हैं। किसी भी कार्यक्रम के संबंध में निर्णय कानून, प्रशासनिक नियमों और निर्धारित शर्तों के आधार पर होना चाहिए।
बीजेपी और सपा के बीच भी बढ़ी बयानबाजी
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल रही है।
सपा की ओर से धार्मिक भावनाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया जा रहा है, जबकि भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर सवाल खड़े किए हैं।
भाजपा की ओर से यह तर्क भी दिया जा रहा है कि धार्मिक विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, समाजवादी पार्टी का कहना है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके संबंध में सार्वजनिक मंच से बोलते समय मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
इस तरह एक कथावाचक की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन चुका है।
क्या कुंडा में कथा के आयोजन पर पड़ेगा कोई असर?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अखिलेश यादव की आपत्ति और प्रशासन से की गई अपील का कुंडा में होने वाले आयोजन पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बागेश्वर धाम के कार्यक्रम कैलेंडर में कुंडा का आयोजन दर्ज है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण से संबंधित अंतिम स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कुंडा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।
धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो, इसके लिए आयोजकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
अब सभी की निगाहें 17 नवंबर पर
कुंडा में राजा भैया की ओर से आयोजित होने वाली धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा अब केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं का भी हिस्सा बन गई है।
एक तरफ अखिलेश यादव इस आयोजन और अन्य प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजा भैया की ओर से कथा के आयोजन की तैयारियां और निमंत्रण प्रक्रिया चर्चा में है।
आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और आयोजकों की तैयारियां इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 17 नवंबर से कुंडा में प्रस्तावित यह धार्मिक आयोजन उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से काफी चर्चा में रहने वाला है। अब देखना होगा कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है या इसके आसपास राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला और तेज होता है।
AIN NEWS 1 की अपील: धार्मिक आस्था और राजनीतिक विचारों पर अपनी राय रखते समय मर्यादा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। किसी भी अपुष्ट बयान या भ्रामक वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।
Raja Bhaiya is organizing a major religious event featuring Bageshwar Dham’s Pandit Dhirendra Krishna Shastri in Kunda, Pratapgarh, Uttar Pradesh. The proposed Kunda Katha scheduled from November 17 to 20, 2026, has become a political talking point after Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav opposed Dhirendra Shastri’s upcoming public programmes. The controversy involves religious sentiments, political reactions, the Shri Hanumant Katha, and the role of Raja Bhaiya in organizing the event. Read the latest updates on Raja Bhaiya Kunda News, Dhirendra Krishna Shastri, Bageshwar Dham and Uttar Pradesh politics.



















