‘दाने-दाने में केसर’ के दावे पर उठे सवाल, राजस्थान उपभोक्ता आयोग ने भेजा नोटिस
AIN NEWS 1: राजस्थान में पान मसाला विज्ञापन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। मशहूर पान मसाला ब्रांड विमल और उसके विज्ञापन में दिखाई देने वाले बॉलीवुड सितारे अब कानूनी सवालों के घेरे में आ गए हैं। राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के साथ-साथ अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला विज्ञापन की उस लाइन से जुड़ा है जिसमें कहा जाता है — “दाने-दाने में केसर का दम।”
इस मामले ने सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब असली केसर की कीमत लाखों रुपये प्रति किलो है, तो मात्र पांच रुपये के पाउच में आखिर कितना केसर हो सकता है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
जयपुर निवासी महेंद्र सिंह ठाकुर ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग में एक याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि विमल पान मसाला अपने विज्ञापन में “केसर” होने का दावा कर ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बाजार में असली केसर की कीमत करीब 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है। ऐसे में बेहद सस्ते पाउच में “केसर का दम” होने का दावा लोगों को भ्रमित कर सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि विज्ञापन देखने वाले लोग, खासकर युवा वर्ग, इन मशहूर सितारों से प्रभावित होते हैं। क्योंकि शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ करोड़ों युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, इसलिए उनके द्वारा किए गए प्रचार का सीधा असर समाज पर पड़ता है।
आयोग ने किन्हें भेजा नोटिस?
राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग की बेंच, जिसमें अध्यक्ष जस्टिस देवेंद्र कच्छवाहा और सदस्य करण जैन शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। आयोग ने विमल पान मसाला बनाने वाली कंपनी के साथ-साथ तीनों फिल्म अभिनेताओं को भी जवाब देने के लिए कहा है।
आयोग ने सभी पक्षों को तय तारीख पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। फिलहाल यह मामला शुरुआती सुनवाई के चरण में है और आयोग ने अभी किसी को दोषी नहीं ठहराया है।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि इस तरह के विज्ञापन लोगों को भ्रमित करने वाले हैं। उनका दावा है कि विज्ञापन में “केसर” शब्द का इस्तेमाल केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मशहूर अभिनेता अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर युवाओं को पान मसाला की ओर आकर्षित कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई युवा इन सितारों को अपना आदर्श मानते हैं और उनके विज्ञापनों से प्रभावित होकर पान मसाला या गुटखा जैसे उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे मुंह के कैंसर, शारीरिक कमजोरी और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
पुरस्कार वापस लेने की भी मांग
मामले में केवल नोटिस जारी करने की मांग नहीं की गई, बल्कि शिकायतकर्ता ने आयोग से यह भी अनुरोध किया कि यदि विज्ञापन भ्रामक साबित होता है, तो संबंधित अभिनेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
याचिका में कहा गया कि अभिनेता अजय देवगन और शाहरुख खान राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कलाकार हैं। ऐसे में उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने मांग की कि यदि वे लोगों को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों में शामिल पाए जाते हैं तो उनके सम्मान वापस लेने पर भी विचार किया जाए।
इसके अलावा 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की मांग भी याचिका में की गई है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से आने लगीं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि बड़े सितारों को ऐसे उत्पादों का प्रचार करने से बचना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी विज्ञापन में किए गए दावे की जिम्मेदारी केवल कलाकारों पर डालना पूरी तरह सही नहीं है।
कई लोगों ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को जागरूक होना जरूरी है और किसी भी विज्ञापन को आंख बंद करके सच नहीं मानना चाहिए।
पहले भी विवादों में रहे हैं पान मसाला विज्ञापन
भारत में पान मसाला और गुटखा विज्ञापनों को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इन उत्पादों के प्रचार पर सख्ती की मांग करते रहे हैं। सरकार ने कई प्रकार के तंबाकू उत्पादों के सीधे विज्ञापनों पर रोक लगाई हुई है, लेकिन कंपनियां सरोगेट विज्ञापन के जरिए ब्रांड प्रमोशन करती रहती हैं।
फिल्म सितारों और खिलाड़ियों द्वारा ऐसे विज्ञापनों में दिखाई देने पर समय-समय पर आलोचना होती रही है। कई बड़े कलाकारों को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने केवल नोटिस जारी किया है। अभी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है। आयोग आगे दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ता अधिकारों, भ्रामक प्रचार और सेलिब्रिटी जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
उपभोक्ता अधिकारों पर फिर शुरू हुई चर्चा
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े ब्रांड अपने विज्ञापनों में ऐसे दावे कर सकते हैं जिनकी वास्तविकता पर सवाल उठते हों? साथ ही यह भी चर्चा हो रही है कि क्या मशहूर हस्तियों को किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का लोगों पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की सच्चाई और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
अब सबकी नजर आयोग की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां यह साफ हो सकेगा कि “दाने-दाने में केसर का दम” वाला दावा आखिर कितना मजबूत है।
The Rajasthan Consumer Commission has issued a notice to Vimal Pan Masala manufacturer and Bollywood actors Shah Rukh Khan, Ajay Devgn, and Tiger Shroff regarding the controversial “Daane Daane Mein Kesar Ka Dum” advertisement claim. The complaint questions how expensive saffron can be included in a low-cost pan masala pouch and alleges misleading promotion affecting youth. The case has sparked debate about celebrity endorsements, consumer rights, and misleading advertisements in India.


















