AIN NEWS 1 सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित पुरानी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे में बदल गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के भवन को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से किया गया था। वहीं, मस्जिद पक्ष और विपक्षी दल कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ध्वस्तीकरण के बाद अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे करीब 20 फीट गहरा कुआं मिला है। प्रशासन ने कुएं की संरचना और उसकी पुरातनता को लेकर जांच कराने की बात कही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कुआं कब बनाया गया था और इसका मस्जिद से क्या संबंध था।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी इस मस्जिद को स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मौजूद बताया जाता रहा है। कई मीडिया रिपोर्टों में इसे करीब 115 साल पुरानी मस्जिद बताया गया है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में इसकी उम्र 119 साल तक बताई गई है। इसलिए इसकी वास्तविक उम्र को लेकर आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि जरूरी है।

इस मामले में फरवरी 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की ओर से शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया और वहां बने कुछ कमरों तथा डाकघर से किराया वसूले जाने जैसी गतिविधियां भी हो रही थीं।
शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई। जांच के दौरान जमीन और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों को देखा गया। प्रशासन का दावा है कि जांच में यह सामने आया कि निर्माण सरकारी जमीन पर था और उसके लिए वैध अनुमति मौजूद नहीं थी।
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा मामला
जांच के बाद मामले में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को अवैध मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया। साथ ही मामले में करीब 6.41 करोड़ रुपये के हर्जाने या क्षतिपूर्ति से जुड़ा आदेश भी रिपोर्टों में सामने आया।
हालांकि, इस आदेश के बाद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
जिला अदालत में पहुंचा मामला
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को मस्जिद पक्ष की ओर से चुनौती दी गई। 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में अपील दायर की गई। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें रखी गईं।
कई तारीखों तक सुनवाई चलने के बाद जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
प्रशासन का कहना है कि 5 सितंबर को की गई कार्रवाई किसी अचानक लिए गए फैसले का परिणाम नहीं थी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई।
5 सितंबर की सुबह चला बुलडोजर
5 सितंबर की सुबह सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार कलेक्ट्रेट के सभी प्रमुख गेटों को बंद कर दिया गया था और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई।
मौके पर पुलिस, पीएसी और आरआरएफ की तैनाती की गई। ध्वस्तीकरण के लिए जेसीबी, बुलडोजर और डंपर लगाए गए। कार्रवाई के दौरान मस्जिद के दो मंजिला ढांचे को गिरा दिया गया और बाद में मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई है।
SDM ने क्या कहा?
सदर एसडीएम सुबोध कुमार के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर अवैध इमारत का निर्माण किया गया था। प्रशासन का मुख्य आधार यही है कि सरकारी भूमि पर इस निर्माण के लिए वैध अनुमति नहीं थी।
हालांकि, इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रशासन के दावे और मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को अलग-अलग देखा जाए। मस्जिद पक्ष ने कार्रवाई के तरीके और मस्जिद की पुरानी स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।
मलबे के नीचे मिला करीब 20 फीट गहरा कुआं
ध्वस्तीकरण के बाद 6 सितंबर को उस समय नया घटनाक्रम सामने आया, जब मलबा हटाते समय जमीन के नीचे ईंटों से बना एक गहरा कुआं दिखाई दिया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कुएं की गहराई करीब 20 फीट बताई जा रही है। कुएं के ऊपर स्लैब या लिंटर डाला गया था। अब प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह कुआं कितना पुराना है और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था।
कुएं को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी किसी भी दावे को ऐतिहासिक तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। कुएं की वास्तविक उम्र और इतिहास की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी।
इकरा हसन को लेकर भी विवाद
मस्जिद पर कार्रवाई के दौरान राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाने की कोशिश की थी। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया गया और सहारनपुर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारियों से मिलने और मौके की जानकारी लेने से रोकना उचित नहीं है। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाए जाने की बात सामने आई।
विपक्ष ने उठाए सवाल
मस्जिद गिराए जाने के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी और AIMIM से जुड़े नेताओं ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मस्जिद पुरानी थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर प्रशासन और सत्ता पक्ष का कहना है कि मामला धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और अदालत के आदेश से जुड़ा है।
यानी विवाद के केंद्र में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष हैं। प्रशासन इसे अवैध निर्माण के खिलाफ न्यायिक आदेश के अनुपालन की कार्रवाई बता रहा है, जबकि मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेता इसकी प्रक्रिया तथा ऐतिहासिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।
सपा प्रतिनिधिमंडल आज सहारनपुर पहुंच सकता है
इस पूरे मामले की जानकारी लेने के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है। 6 सितंबर को सपा का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात कर सकता है। प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त समेत अन्य अधिकारियों से बातचीत कर मामले की जानकारी लेने की कोशिश करेगा।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रशासन का ध्यान ध्वस्तीकरण के बाद बचे मलबे और परिसर की स्थिति पर है। जमीन के नीचे मिले कुएं की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि कुएं की उम्र कितनी है और उसका निर्माण किस उद्देश्य से हुआ था।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि अदालत के आदेश के बाद मस्जिद का ढांचा गिराया जा चुका है, लेकिन विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं और आने वाले दिनों में कुएं की जांच तथा प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
अब तक की प्रमुख टाइमलाइन
फरवरी 2025: मस्जिद और कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन को लेकर शिकायत की जानकारी सामने आई।
24 मार्च 2025: सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई शुरू हुई।
16 जुलाई 2026: सिटी मजिस्ट्रेट ने निर्माण को अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया।
20 जुलाई 2026: मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में अपील की।
2 सितंबर 2026: जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा।
5 सितंबर 2026: कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
6 सितंबर 2026: मलबा हटाने के दौरान करीब 20 फीट गहरा कुआं मिलने की जानकारी सामने आई।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है। कुएं की जांच और आगे आने वाली रिपोर्ट इस मामले को लेकर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
The Saharanpur Collectorate Mosque demolition has become a major news story in Uttar Pradesh after authorities removed the reportedly 115-year-old mosque following a court order. The administration said the structure was an illegal construction on government land. The Saharanpur Collectorate Mosque case has also triggered political reactions, including comments from opposition leaders and reports concerning MP Iqra Hasan. After the demolition, authorities reportedly discovered a nearly 20-foot-deep well beneath the site, adding a new development to the Saharanpur mosque controversy. Further investigation may establish the age and history of the well.



















