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संभल में कब्रिस्तान की 8 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा हटाने का रास्ता साफ, कोर्ट ने हटाया स्टे—18 मकान-दुकानों पर चलेगा बुलडोजर!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक अहम प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहां जामा मस्जिद के पास स्थित करीब 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। सिविल कोर्ट ने पहले लगाए गए स्टे (रोक) को खुद ही खत्म कर दिया है, जिसके बाद अब प्रशासन आगे की कार्रवाई के लिए तैयार हो गया है।

यह पूरा मामला लंबे समय से विवादों में रहा है, लेकिन अब कोर्ट के नए फैसले ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

संभल के कोतवाली क्षेत्र में जामा मस्जिद से सटी हुई करीब 8 बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। यह जमीन कब्रिस्तान की बताई जा रही है, जिस पर समय के साथ 18 मकान और दुकानें बना दी गईं।

इस मामले की शुरुआत तब हुई, जब 12 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी को एक शिकायत मिली। शिकायतकर्ता सुभाष त्यागी (श्रीकल्कि सेना) ने आरोप लगाया कि यह पूरी जमीन 1990 से पहले कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल होती थी, लेकिन बाद में इस पर अवैध तरीके से कब्जा कर निर्माण कर लिया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि संभल में हुई हिंसा के दौरान इन्हीं मकानों और दुकानों की छतों से पुलिस और सर्वे टीम पर पत्थरबाजी की गई थी।

प्रशासन की जांच और पैमाइश

शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। एसडीएम के आदेश पर एक बड़ी टीम गठित की गई, जिसमें तहसीलदार, नायब तहसीलदार और करीब 26 कानूनगो और लेखपाल शामिल थे।

इस टीम ने 30 नवंबर 2025 को जमीन की पैमाइश कराई। जांच में यह बात सामने आई कि जिस जमीन पर निर्माण हुआ है, वह रिकॉर्ड के अनुसार कब्रिस्तान की भूमि है।

इसके बाद प्रशासन ने वहां रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

कोर्ट में शुरू हुआ कानूनी संघर्ष

प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ कब्जा करने वाले लोग जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला स्थानीय स्तर पर तहसील कोर्ट में ही सुना जाएगा।

इसके बाद कब्जेदारों ने संभल की सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कुल 18 में से 15 लोगों ने याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।

इन याचिकाओं में नगर पालिका परिषद संभल, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन को पक्षकार बनाया गया।

पहले मिला स्टे, फिर बदला फैसला

सिविल कोर्ट के जज ललित कुमार ने 27 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई पूरी होने तक प्रशासन की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था। यानी उस समय तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था।

इस फैसले के बाद कुछ समय के लिए अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई रुक गई थी।

हालांकि, बाद में इस केस में लगातार सुनवाई होती रही। इस दौरान नगर पालिका की ओर से कोर्ट में विस्तृत जवाब दाखिल किया गया और यह बताया गया कि जमीन कब्रिस्तान की है और उस पर अवैध कब्जा किया गया है।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

इस मामले में मार्च 2026 के दौरान कई तारीखों पर सुनवाई हुई—9 मार्च, 16 मार्च, 23 मार्च, 30 मार्च और 10 अप्रैल। बीच में एक तारीख पर वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।

नगर पालिका के वकीलों ने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि कब्जेदारों ने गलत जानकारी देकर पहले स्टे हासिल किया था।

कोर्ट ने हटाया स्टे

आखिरकार, सभी तथ्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद कोर्ट ने अपना रुख बदला और पहले दिया गया स्टे हटा लिया।

नगर पालिका परिषद के वकील नलीन जैन के अनुसार, अदालत के सामने सच्चाई आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जमीन कब्रिस्तान की है और उस पर अवैध निर्माण किया गया है।

उन्होंने कहा कि अब इस जमीन से जुड़े सभी 11 मामलों में स्टे खत्म हो चुका है, जिससे प्रशासन को कार्रवाई करने में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है।

अब आगे क्या होगा?

अब जबकि सिविल कोर्ट ने स्टे हटा दिया है, प्रशासन के लिए रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अंतिम आदेश तहसील कोर्ट से आएगा, जिसके बाद ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू की जाएगी।

संभावना है कि जल्द ही प्रशासन अवैध रूप से बने 18 मकान और दुकानों को गिराने की कार्रवाई करेगा।

क्यों अहम है यह मामला?

यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

अगर जमीन वाकई कब्रिस्तान की है, तो उसका संरक्षण जरूरी है

अवैध कब्जों को हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है

कोर्ट के फैसले से यह संदेश भी जाता है कि गलत तरीके से स्टे लेना हमेशा काम नहीं आता

स्थानीय स्तर पर असर

इस फैसले के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है। जिन लोगों ने यहां मकान और दुकानें बना रखी हैं, उनमें चिंता का माहौल है।

वहीं, प्रशासन भी अब सख्त रुख में नजर आ रहा है और जल्द कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

संभल का यह मामला दिखाता है कि कैसे एक शिकायत से शुरू हुई प्रक्रिया प्रशासनिक जांच, कोर्ट की सुनवाई और कानूनी बहस के बाद बड़े फैसले तक पहुंचती है।

अब सबकी नजरें तहसील कोर्ट के अंतिम आदेश और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

The Sambhal illegal encroachment case has taken a major turn as the civil court removed the stay on the disputed 8 bigha graveyard land near Jama Masjid. The administration is now preparing for demolition action against 18 illegally constructed houses and shops. This graveyard land dispute in Sambhal highlights issues of illegal construction, court intervention, and administrative action in Uttar Pradesh, making it a significant development in local governance and law enforcement.

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