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संभल हिंसा मामले में अदालत में हुई अहम सुनवाई, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी से दो घंटे तक हुई जिरह!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में शनिवार को जिला जज डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान संभल के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज की गई। करीब दो घंटे तक चली इस सुनवाई में बचाव पक्ष की ओर से उनसे घटना से जुड़े कई अहम सवाल पूछे गए। अदालत में माहौल गंभीर बना रहा और जिला जज पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहीं।

यह मामला संभल हिंसा से जुड़े क्राइम नंबर 340 के तहत चल रहा है। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी पक्ष के वकील आसिफ अख्तर ने एएसपी अनुज चौधरी से लगभग 150 सवाल पूछे। सवालों का केंद्र घटना के समय पुलिस की स्थिति, इस्तेमाल किए गए हथियार, गोलीबारी और पुलिस कार्रवाई रहा।

घटना के समय कहां थे अनुज चौधरी?

जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने पूछा कि हिंसा के वक्त वह कहां मौजूद थे और उनके पास कौन सा हथियार था। इस पर एएसपी अनुज चौधरी ने अदालत को बताया कि उनके पास 9mm पिस्टल थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मी AK-47 और पंप गन से लैस थे।

इसके बाद बचाव पक्ष ने हथियारों में इस्तेमाल होने वाले कारतूस और उनकी तकनीकी जानकारी को लेकर भी सवाल किए। जवाब में एएसपी ने बताया कि AK-47 में 7.62×39mm कारतूस इस्तेमाल होता है, जबकि उनकी पिस्टल में 9mm की गोली प्रयोग की जाती है।

पुलिस फायरिंग पर क्या बोले एएसपी?

सुनवाई के दौरान पुलिस फायरिंग सबसे बड़ा मुद्दा रही। बचाव पक्ष ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हिंसा के दौरान पुलिस ने सीधे गोली चलाई थी। इस पर अनुज चौधरी ने अदालत में स्पष्ट कहा कि पुलिस की ओर से केवल पंप गन और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया था।

उन्होंने बताया कि उग्र भीड़ को नियंत्रित करने और हालात को काबू में लाने के लिए यह कार्रवाई की गई थी। एएसपी के मुताबिक, स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित बल प्रयोग किया गया।

अदालत ने बचाव पक्ष को दिए निर्देश

सुनवाई के दौरान कई बार ऐसे सवाल भी पूछे गए जिन्हें सरकारी पक्ष ने मामले से असंबंधित बताया। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने अदालत में आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ प्रश्न केवल अधिकारी की व्यक्तिगत तैयारी और तकनीकी जानकारी को परखने के लिए पूछे जा रहे हैं।

इस पर जिला जज डॉ. विदुषी सिंह ने हस्तक्षेप किया और बचाव पक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल मामले से जुड़े सवाल ही पूछे जाएं। अदालत ने कहा कि जिरह का दायरा संभल हिंसा मामले तक सीमित रहना चाहिए।

आरोपी पक्ष ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

सुनवाई खत्म होने के बाद मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज के वकील आसिफ अख्तर ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने दावा किया कि हिंसा में जिन चार युवकों की मौत हुई थी, वे पुलिस फायरिंग का शिकार हुए थे।

वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में अपनी एफआईआर में इस तथ्य का जिक्र नहीं किया। उनका कहना था कि बाद में अलग से एफआईआर दर्ज कर मामले की दिशा बदलने की कोशिश की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि बचाव पक्ष अदालत में यह साबित करने की कोशिश करेगा कि पुलिस कार्रवाई और जांच में कई विरोधाभास मौजूद हैं। आरोपी पक्ष का दावा है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

24 नवंबर 2024 को क्या हुआ था?

यह मामला 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद में हुए सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। उस दिन एडवोकेट कमीशन की टीम मस्जिद परिसर का सर्वे कर रही थी। इसी दौरान अचानक भीड़ इकट्ठा हो गई और पथराव शुरू हो गया।

कुछ ही देर में हालात हिंसक हो गए। पुलिस और भीड़ के बीच टकराव बढ़ता गया, जिसमें चार स्थानीय युवकों की मौत हो गई थी। कई पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग भी घायल हुए थे।

घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और कई दिनों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगाई थी ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।

पुलिस ने क्या कहा था?

पुलिस ने इस हिंसा को पहले से रची गई साजिश बताया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दुबई में बैठा शारिक साठा मास्टरमाइंड था।

पुलिस के अनुसार, उसके नेटवर्क से जुड़े मुल्ला अफरोज, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद वारिस समेत कई लोगों की भूमिका सामने आई। फिलहाल इन आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है और मामले की जांच जारी है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि हिंसा के दौरान भीड़ को भड़काने और पुलिस पर हमले की पूर्व योजना बनाई गई थी। हालांकि आरोपी पक्ष लगातार इन आरोपों से इनकार कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब अदालत में अगली सुनवाई के दौरान अन्य गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों पर चर्चा हो सकती है। इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह घटना राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी काफी संवेदनशील मानी जा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एएसपी अनुज चौधरी की गवाही इस केस में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं बचाव पक्ष पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दिनों में अदालत में पुलिस फायरिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और वीडियो सबूतों को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है। फिलहाल अदालत में सुनवाई जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को साबित करने में जुटे हैं।

The Sambhal Violence Hearing has become a major legal and political issue in Uttar Pradesh after former CO and current ASP Anuj Chaudhary testified in court for nearly two hours through video conferencing. The hearing focused on police action, weapon usage, crowd control measures, and allegations of police firing during the Sambhal Jama Masjid violence that took place on November 24, 2024. Defense lawyers questioned the police investigation and claimed that the four deceased youths died in police firing, while the police maintained that only rubber bullets and pump guns were used. The Sambhal violence case continues to draw attention due to its sensitive communal and legal implications.

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