AIN NEWS 1: लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जेल में बंद श्रद्धा दुबे की मुलाकातियों की सूची सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, श्रद्धा ने जेल प्रशासन को जो सूची सौंपी है, उसमें उसके पिता और रायबरेली में रहने वाले परिजनों के नाम शामिल हैं। हालांकि, उसके उन करीबी परिचितों के नाम सूची में नहीं बताए गए हैं, जिनके साथ उसके घूमने-फिरने और रेस्तरां में समय बिताने की चर्चा रही है।
यह मामला केवल मुलाकातियों की सूची तक सीमित नहीं है। शिवा शर्मा की मौत की परिस्थितियों, आरोपियों की भूमिका, घटना के बाद उनकी गतिविधियों और पुलिस जांच को लेकर भी कई अहम पहलुओं पर पड़ताल जारी है। श्रद्धा दुबे अपनी बेगुनाही का दावा कर चुकी है, जबकि शिवा के परिवार ने उसकी मौत को हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
जेल में मुलाकातियों की सूची से क्यों उठ रहे सवाल?
26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा दुबे ने जेल प्रशासन को अपने मुलाकातियों की सूची दी है। इसमें उसके पिता और रायबरेली में रहने वाले परिजनों के नाम शामिल बताए गए हैं। दूसरी ओर, उसके करीबी माने जाने वाले कुछ परिचितों के नाम सूची में नहीं हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि श्रद्धा के साथ समय बिताने वाले और रेस्तरां में उसके साथ दिखाई देने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि क्या श्रद्धा ने खुद इन लोगों के नाम नहीं दिए या फिर किसी अन्य कारण से वे सूची में जगह नहीं बना पाए।
हालांकि, अभी तक इस बात की कोई स्पष्ट और स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि इन परिचितों के नाम गायब होने के पीछे क्या वजह है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने जानबूझकर श्रद्धा से दूरी बना ली है या वे किसी डर के कारण उससे मिलने नहीं आ रहे हैं।
पुलिस सत्यापन के बाद ही मिल सकेगी मुलाकात की अनुमति
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धा दुबे की ओर से जेल प्रशासन को दी गई मुलाकातियों की सूची पुलिस सत्यापन के लिए भेजी गई है। सूची में शामिल लोगों की पहचान और संबंधित जानकारी की जांच की जाएगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मुलाकात की अनुमति पर फैसला लिया जाएगा।
जेल में बंद किसी व्यक्ति से मिलने के लिए पहचान संबंधी दस्तावेज और निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इस मामले में भी मुलाकातियों के नामों की जांच की प्रक्रिया अहम मानी जा रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि उसे तत्काल मुलाकात की अनुमति मिल जाएगी। संबंधित सत्यापन और जेल प्रशासन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल, श्रद्धा के करीबी परिचितों के नाम सूची में नहीं होने के पीछे कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में सत्यापन की प्रक्रिया और आगे होने वाली मुलाकातों से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
क्या है शिवा शर्मा हत्याकांड?
लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में 9 अक्टूबर 2026 को कारोबारी और रेस्तरां संचालक शिवा शर्मा की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जब शिवा के परिवार ने उनकी मौत को सामान्य हादसा या आत्महत्या मानने के बजाय हत्या का आरोप लगाया।
मामले में शिवा की लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश के नाम सामने आए। पुलिस ने तीनों को इस मामले में आरोपी बनाया। शिवा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना से पहले क्या कुछ हुआ था, इसकी जांच की जा रही है।
शिवा की मौत के बाद आरोपियों की गतिविधियां भी जांच का हिस्सा बनीं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी रही और आरोपियों के बारे में जानकारी देने वालों के लिए घोषित इनाम भी बढ़ाया गया था। बाद में पुलिस ने श्रद्धा, उसकी बहन और ड्राइवर को नागपुर से गिरफ्तार किया।
नागपुर से गिरफ्तारी के बाद लखनऊ लाई गई श्रद्धा
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश को 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें लखनऊ लाया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की। अधिकारियों का कहना था कि घटना से पहले की परिस्थितियों, शिवा और श्रद्धा के संबंधों, कथित विवाद तथा घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों को समझने के लिए पूछताछ जरूरी है।
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई सवाल किए। साथ ही, मामले से संबंधित मोबाइल फोन और अन्य सामग्री की जांच भी की गई। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि बरामद मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इनसे मिलने वाली जानकारी जांच की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी रही कि घटना के बाद आरोपी कहां गए और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उन्हें छिपने, यात्रा करने या गिरफ्तारी से बचने में मदद की थी। हालांकि, किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।
31 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में तीनों आरोपी
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 22 और 23 अक्टूबर के आसपास सामने आया, जब तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लखनऊ की अदालत ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश को 31 अक्टूबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत में पुलिस की ओर से आगे की जांच, साक्ष्य जुटाने और मामले से संबंधित सामग्री की बरामदगी के लिए हिरासत की आवश्यकता बताई गई थी। वहीं, बचाव पक्ष ने रिमांड पर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद 23 अक्टूबर को तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। ऐसे में फिलहाल तीनों को राहत नहीं मिली है और मामले की जांच आगे बढ़ रही है।
न्यायिक हिरासत में भेजे जाने या जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपियों को दोषी घोषित कर दिया है। मुकदमे में दोष तय करने के लिए साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर न्यायालय का अंतिम निर्णय जरूरी होगा।
श्रद्धा दुबे ने खुद को बताया निर्दोष
इस मामले में श्रद्धा दुबे का पक्ष भी सामने आ चुका है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उसने खुद को निर्दोष बताते हुए शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या होने का दावा किया था। उसने पुलिस से अपार्टमेंट की सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की अपील भी की थी।
श्रद्धा का कहना था कि सीसीटीवी फुटेज से घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं। उसने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और मामले में अपनी बात रखने की इच्छा जताई थी।
दूसरी ओर, शिवा के परिवार ने हत्या के आरोप लगाए हैं। यही कारण है कि पुलिस को घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों की जांच कर सभी तथ्यों का मिलान करना होगा।
फिलहाल श्रद्धा के दावों और शिवा के परिवार के आरोपों में से किसी को भी अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। जांच में जुटाए गए साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध सामग्री इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
श्रद्धा दुबे की मुलाकातियों की सूची में करीबी परिचितों के नाम नहीं होने की खबर ने मामले में एक नया सवाल जरूर खड़ा किया है, लेकिन इसे हत्याकांड से सीधे जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। सूची में नाम नहीं होना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या किसी संदिग्ध गतिविधि का प्रमाण नहीं है।
अब पुलिस सत्यापन, आरोपियों से आगे की पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और घटना के समय की परिस्थितियों को स्पष्ट करने पर ध्यान दे रही है। वहीं, 31 अक्टूबर 2026 की न्यायिक हिरासत की तारीख भी मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि शिवा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपलब्ध साक्ष्य घटना की वास्तविक तस्वीर को किस तरह स्पष्ट करते हैं।
AIN NEWS 1 की नजर इस मामले से जुड़े आधिकारिक घटनाक्रम पर बनी रहेगी। किसी भी नए दावे को पुष्ट जानकारी और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
The Shraddha Dubey jail visitor list has drawn attention in the ongoing Shiva Sharma murder case in Lucknow. According to media reports, the list submitted to jail authorities includes her father and relatives from Rae Bareli, while the names of some close acquaintances are reportedly missing. Shraddha Dubey, her sister Rashmi Dubey, and driver Tanveer Ali, also known as Danish, were arrested in Nagpur on October 20, 2026. The accused were subsequently sent to judicial custody until October 31, while their bail pleas were reportedly rejected. Police are investigating the circumstances surrounding Shiva Sharma’s death, examining digital evidence, questioning witnesses, and verifying the movements of the accused. Shraddha has denied the murder allegations and claimed that Sharma died by suicide. The investigation remains ongoing, and the allegations must be assessed through the legal process.



















