AIN NEWS 1: रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और लाल मिर्च का काम आमतौर पर खाने का स्वाद और रंग बढ़ाना होता है। लेकिन कर्नाटक के एक कलाकार ने इन्हीं दो मसालों को अपनी कला का माध्यम बनाकर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर के लोगों का ध्यान खींचा है। धारवाड़ के कलाकार अमर काले ने हल्दी और लाल मिर्च के पाउडर से 175.82 वर्ग मीटर यानी 1,892.5 वर्ग फीट की विशाल पेंटिंग तैयार की है। उनकी इस कलाकृति को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बड़ी मसालों से बनी पेंटिंग के रूप में मान्यता दी है।
इस उपलब्धि की खास बात केवल पेंटिंग का विशाल आकार नहीं है, बल्कि इसे बनाने का तरीका और इसके पीछे छिपा सांस्कृतिक संदेश भी है। अमर ने सामान्य पेंट और रंगों की जगह रसोई में आसानी से मिलने वाले मसालों का इस्तेमाल किया। उनकी यह कलाकृति कर्नाटक की पहचान, ऐतिहासिक विरासत और वास्तुकला को समर्पित है।

हल्दी और मिर्च से तैयार की 1,892.5 वर्ग फीट की कलाकृति
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमर काले ने 27 जनवरी 2026 को कर्नाटक के धारवाड़ में यह रिकॉर्ड बनाने वाली पेंटिंग तैयार की थी। इसका कुल क्षेत्रफल 175.82 वर्ग मीटर दर्ज किया गया, जो लगभग 1,892.5 वर्ग फीट के बराबर है।
इस विशाल कलाकृति को तैयार करने के लिए अमर ने करीब 6 किलोग्राम हल्दी पाउडर और 5 किलोग्राम लाल मिर्च पाउडर का इस्तेमाल किया। हल्दी के प्राकृतिक पीले रंग और मिर्च के लाल रंग को आधार बनाकर उन्होंने अपनी कलाकृति को आकार दिया।
आमतौर पर बड़ी पेंटिंग बनाने के लिए कलाकार कैनवास, ब्रश, ऑयल कलर या एक्रिलिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अमर ने इस परंपरागत तरीके से अलग रास्ता चुना। उन्होंने रोजमर्रा के मसालों को कलात्मक माध्यम बनाया और एक ऐसी पेंटिंग तैयार की, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

पेंटिंग में दिखाई कर्नाटक की पहचान
अमर काले की इस कलाकृति का उद्देश्य केवल विश्व रिकॉर्ड बनाना नहीं था। वह इसके जरिए अपने गृह राज्य कर्नाटक की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दुनिया के सामने लाना चाहते थे।
पेंटिंग में कर्नाटक की रूपरेखा के साथ प्रसिद्ध हम्पी स्टोन चैरियट यानी पत्थर के रथ को प्रमुखता से दर्शाया गया है। यह ऐतिहासिक स्मारक कर्नाटक की स्थापत्य कला और विजयनगर साम्राज्य की विरासत का एक प्रसिद्ध प्रतीक है।
हम्पी अपने ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों और प्राचीन वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां मौजूद पत्थर का रथ भारतीय कला और शिल्प कौशल का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। अमर ने इसी सांस्कृतिक पहचान को अपनी पेंटिंग के केंद्र में रखा।
उनकी कोशिश थी कि दर्शक इस कलाकृति को केवल एक बड़ी पेंटिंग के रूप में न देखें, बल्कि इसके माध्यम से कर्नाटक के इतिहास, संस्कृति और कलात्मक परंपराओं को भी समझें।
अमर के अनुसार, कर्नाटक मसालों की समृद्ध परंपरा के लिए भी जाना जाता है। इसलिए उन्होंने राज्य की पहचान को दर्शाने के लिए ऐसे माध्यम का चुनाव किया, जिसका संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है।
करीब 10 घंटे में पूरी की पेंटिंग
इतने बड़े क्षेत्र में मसालों से चित्र तैयार करना आसान काम नहीं था। रंगों के बजाय हल्दी और मिर्च के पाउडर से आकृतियां बनाना, उनके रंगों का संतुलन बनाए रखना और पूरी कलाकृति को एक निश्चित रूप देना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अमर काले ने इस विशाल पेंटिंग को पूरा करने में करीब 10 घंटे लगाए।
इस दौरान उन्होंने हल्दी और लाल मिर्च के प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए कलाकृति को अंतिम रूप दिया। पेंटिंग का आकार इतना बड़ा है कि इसका कुल क्षेत्रफल लगभग एक टेनिस कोर्ट के दो-तिहाई हिस्से के बराबर बताया गया है।
कलाकार ने इस परियोजना के लिए अतिरिक्त मसाला पाउडर भी तैयार रखा था। हालांकि, बची हुई सामग्री को बेकार जाने देने के बजाय उन्होंने उसे दान कर दिया। इस तरह उन्होंने अपने रचनात्मक प्रयोग के साथ सामग्री की बर्बादी से बचने की कोशिश भी की।
बचपन से था पेंटिंग का शौक, पिता से मिली प्रेरणा
अमर काले की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत और कला के प्रति उनका लगाव है। उनका रुझान बचपन से ही चित्रकारी की ओर था। उनके पिता भी कलाकार थे और उनसे प्रेरित होकर अमर ने पेंटिंग में अपनी रुचि विकसित की।
समय के साथ उन्होंने अलग-अलग तकनीकों का अभ्यास किया और अपने कौशल को बेहतर बनाया। उनकी कलाकृतियों को लोगों की सराहना मिलने लगी और धीरे-धीरे उन्हें पेंटिंग बनाने के लिए काम भी मिलने लगा।
हालांकि, अमर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था और शुरुआत में इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाया। लेकिन कला के प्रति बढ़ते लगाव ने उन्हें अपने भविष्य के बारे में दोबारा सोचने के लिए प्रेरित किया।
साल 2018 में उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर पूरी तरह पेंटिंग को अपना पेशा बनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी कला पर काम किया और नए-नए प्रयोग किए।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की जानकारी के अनुसार, अमर करीब आठ वर्षों से पेशेवर रूप से कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह मुख्य रूप से ऑयल पेंटिंग, एक्रिलिक पेंटिंग, वास्तविक दृश्यों के चित्रण और पोर्ट्रेट बनाने में विशेषज्ञता रखते हैं।
खास बात यह है कि उन्होंने अपनी कला को विकसित करने के लिए पारंपरिक औपचारिक प्रशिक्षण पर निर्भर रहने के बजाय अभ्यास, प्रयोग और अनुभव के माध्यम से अपनी पहचान बनाई।
इससे पहले भी बना चुके हैं विश्व रिकॉर्ड
हल्दी और मिर्च से बनाई गई पेंटिंग अमर काले की पहली रिकॉर्ड उपलब्धि नहीं है। वह इससे पहले भी अलग-अलग तरीकों से चित्रकारी करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।
वर्ष 2021 में उन्होंने एक मिनट में 98 हाथों के निशान पेंट करके रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, बाद में यह रिकॉर्ड दूसरे प्रतिभागी ने तोड़ दिया।
इसके अलावा, फरवरी 2026 में अमर ने मुंह से पेंटिंग बनाने का एक और रिकॉर्ड बनाया। इस कलाकृति का क्षेत्रफल 112.36 वर्ग मीटर यानी लगभग 1,209.43 वर्ग फीट था। इस पेंटिंग में एक घुटने के बल बैठे सैनिक को दर्शाया गया था।
इस प्रकार मसालों से बनाई गई विशाल पेंटिंग उनकी एक और उल्लेखनीय उपलब्धि बन गई। उनकी अलग-अलग कलाकृतियां यह दिखाती हैं कि चित्रकारी केवल पारंपरिक रंगों और साधनों तक सीमित नहीं है। सही सोच और तकनीक के साथ असामान्य सामग्री का उपयोग करके भी बड़े स्तर पर कला का प्रदर्शन किया जा सकता है।
विश्व रिकॉर्ड से आगे कला के जरिए संदेश देने की कोशिश
अमर काले के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाना उनकी कला यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन वह अपनी कलाकृतियों के माध्यम से कोई विचार या संदेश भी प्रस्तुत करना चाहते हैं।
हल्दी और मिर्च से बनी पेंटिंग में उन्होंने कर्नाटक की भौगोलिक पहचान, ऐतिहासिक स्मारक और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रस्तुत किया। उनका मानना है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली साधारण चीजें भी असाधारण कलाकृति का आधार बन सकती हैं।
यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित साधनों के बावजूद अपनी रचनात्मकता को एक अलग पहचान देना चाहते हैं। अमर की कहानी बताती है कि किसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार अभ्यास, नए प्रयोग करने की इच्छा और अपने काम के प्रति समर्पण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धारवाड़ के इस कलाकार की पेंटिंग को रिकॉर्ड प्रयास के बाद सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए भी रखा गया। इसके जरिए अधिक लोगों को उनकी कलाकृति देखने और कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने का अवसर मिला।
कर्नाटक के अमर काले ने हल्दी और लाल मिर्च जैसे साधारण रसोई मसालों को असाधारण कला में बदलकर दुनिया के सामने एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। 175.82 वर्ग मीटर की उनकी पेंटिंग को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मान्यता मिलना उनकी रचनात्मकता और मेहनत का प्रमाण है।
इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर कला को अपना करियर बनाने वाले अमर ने यह भी दिखाया है कि सफलता के लिए जरूरी नहीं कि कलाकार हमेशा पारंपरिक तरीकों का ही सहारा लें। कभी-कभी एक नया विचार और साधारण सामग्री भी ऐसी उपलब्धि दिला सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना दे।
उनकी यह कलाकृति केवल मसालों से बनी एक विशाल पेंटिंग नहीं, बल्कि कर्नाटक की संस्कृति, इतिहास और भारतीय कला की संभावनाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक रचनात्मक प्रयास है।
Indian artist Amar Kale from Dharwad, Karnataka, has achieved a Guinness World Record for creating the world’s largest spice painting. Measuring 175.82 square metres (1,892.5 square feet), the remarkable artwork was made using approximately 6 kg of turmeric powder and 5 kg of chilli powder. The painting features the outline of Karnataka and the iconic Hampi Stone Chariot, celebrating the state’s rich cultural heritage, history and architecture. A self-taught artist who left his engineering job in 2018 to pursue painting professionally, Amar Kale completed the record-breaking artwork in around 10 hours. His achievement highlights the creative possibilities of everyday kitchen spices and showcases India’s artistic talent on the global stage.



















