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सोनीपत: अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन में भी नहीं पहुंचीं तीनों बेटियां, बोलीं- ‘हम शर्मिंदा हैं, कोई मजबूरी रही होगी’

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सोनीपत में बुजुर्ग पिता की मौत के बाद फिर चर्चा में आईं तीन बेटियां

AIN NEWS 1: हरियाणा के सोनीपत से सामने आई बुजुर्ग पिता की मौत की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। वृद्धाश्रम में रहने वाले पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता के निधन के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई थीं। अब पिता की अस्थियों के विसर्जन के लिए भी तीनों बेटियां हरिद्वार नहीं पहुंचीं।

शिवचरण गुप्ता की अस्थियों का हरिद्वार में विसर्जन उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता और सामाजिक कार्यों से जुड़े लोगों ने किया। बेटियों से जब दोबारा संपर्क किया गया तो बड़ी बेटी ने कहा कि अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन करा दिया जाए और वृद्धाश्रम से जुड़े लोग पिता के छोटे भाई की तरह समझकर रस्में पूरी कर दें।

बेटी ने बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है। उन्होंने कहा, “हम शर्मिंदा तो बहुत हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी, इसीलिए हम नहीं आ सके।”

वृद्धाश्रम में रह रहे थे शिवचरण गुप्ता

रिपोर्टों के मुताबिक शिवचरण राम रतन गुप्ता मूल रूप से मुंबई से जुड़े कपड़ा कारोबारी थे। कारोबार में नुकसान के बाद वे अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ हरियाणा आ गए थे। बाद में दोनों सोनीपत के समाज कल्याण शिक्षा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में रहने लगे।

पत्नी मीना गुप्ता का भी पहले निधन हो चुका था। इसके बाद शिवचरण वृद्धाश्रम में अकेले रह रहे थे। उनकी तीन बेटियां थीं। रिपोर्टों के अनुसार एक बेटी मुंबई में, दूसरी नेपाल में और तीसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं।

पिता की मौत पर भी नहीं पहुंची थीं बेटियां

शिवचरण गुप्ता की तबीयत खराब होने के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन की ओर से उनकी बेटियों से संपर्क किया गया था। उनके निधन के बाद भी तीनों बेटियां सोनीपत नहीं पहुंच सकीं।

पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पिता के अंतिम संस्कार को देखा था। अंतिम संस्कार की व्यवस्था वृद्धाश्रम प्रबंधन और स्थानीय लोगों की मदद से की गई। एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अंतिम संस्कार के खर्च के लिए बेटियों की ओर से 5,100 रुपये भेजे गए थे।

इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। हालांकि, बेटियों की ओर से अपनी परिस्थितियों और मजबूरियों का हवाला दिया गया है, इसलिए परिवार के निजी विवाद या परिस्थितियों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

अब अस्थि विसर्जन के लिए भी नहीं पहुंचीं

अंतिम संस्कार के बाद शिवचरण गुप्ता की अस्थियां सुरक्षित रखी गई थीं। अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाने की तैयारी हुई, लेकिन इस बार भी उनकी तीनों बेटियां वहां नहीं पहुंचीं।

इसी दौरान शिवचरण के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता को जब भाई की मौत और अस्थि विसर्जन की जानकारी मिली तो वे हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने वहां अस्थि विसर्जन की रस्म पूरी की।

महेंद्र गुप्ता ने बताया कि करीब दस साल से उनका अपने भाई और उसके परिवार से संपर्क नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हें काफी समय पहले यह लगा था कि शिवचरण की मौत हो चुकी है। नेपाल में आए भूकंप के दौरान उन्हें अपने भाई के साथ अनहोनी होने की आशंका हुई थी और उन्होंने उसे मृत मान लिया था। बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें शिवचरण के बारे में जानकारी मिली।

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बड़ी बेटी ने कहा- ‘पिता से बहुत प्यार था’

वृद्धाश्रम प्रबंधन ने अस्थि विसर्जन से पहले बड़ी बेटी से दोबारा बातचीत की। बेटी ने कहा कि अस्थियों का अच्छे तरीके से विसर्जन कर दिया जाए।

उसने वृद्धाश्रम प्रबंधन से कहा कि वे उसके पिता के छोटे भाई की तरह समझकर पूरी रस्में निभा दें। बेटी का कहना था कि अगर उसकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार जरूर आती।

बेटी ने यह भी कहा कि उसे अपने पिता की मौत और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाने का बहुत दुख है। उसने दावा किया कि वह और उसकी बहनें अपने पिता से प्यार करती थीं, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे उनके पास नहीं पहुंच सकीं।

‘पिता हमारे साथ रहने को तैयार नहीं थे’

बेटियों की ओर से यह भी कहा गया कि उनके पिता उनके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, परिवार के इस पक्ष की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे मामले में वृद्धाश्रम प्रबंधन और परिवार की ओर से सामने आई बातों के अलावा शिवचरण गुप्ता और उनकी बेटियों के बीच संबंधों की पूरी पृष्ठभूमि सार्वजनिक नहीं है। इसलिए घटना को केवल एक पक्ष के आधार पर देखना उचित नहीं होगा।

घर पर ही करेंगी पिता की तेरहवीं

अस्थि विसर्जन में शामिल न होने के बाद बेटियों ने बताया कि वे अपने-अपने घर पर पिता की तेरहवीं की रस्म करेंगी।

वहीं हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के बाद हवन और कन्याओं को भोजन कराने जैसी धार्मिक रस्मों की बात भी सामने आई है। परिवार की ओर से कहा गया कि पिता के लिए धार्मिक संस्कार घर पर भी किए जाएंगे।

बड़े भाई ने निभाया भाई का फर्ज

शिवचरण गुप्ता के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने परिस्थितियों को लेकर बेटियों को सीधे तौर पर दोषी ठहराने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि बेटियों की भी कोई मजबूरी रही होगी।

करीब एक दशक से भाई से संपर्क न होने के बावजूद जब उन्हें शिवचरण की मौत की जानकारी मिली तो उन्होंने हरिद्वार पहुंचकर अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी निभाई।

इस तरह पिता के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन में परिवार की बेटियों की गैरमौजूदगी के बीच उनके बड़े भाई और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने अंतिम रस्में पूरी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

घटना ने खड़े किए कई सवाल

शिवचरण गुप्ता की कहानी सिर्फ एक परिवार की घटना नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों के अकेलेपन और बदलते पारिवारिक रिश्तों पर भी सवाल खड़े करती है। उम्र के अंतिम पड़ाव में किसी बुजुर्ग को भावनात्मक सहारे की कितनी जरूरत होती है, यह घटना उस पहलू की ओर भी ध्यान खींचती है।

हालांकि, बेटियों ने अपनी मजबूरियों की बात कही है और यह भी कहा है कि उन्हें अपने पिता से प्यार था। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और परिवार के दोनों पक्षों को समझना जरूरी है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि शिवचरण गुप्ता की अंतिम यात्रा में उनकी तीनों बेटियां व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं थीं और अब अस्थि विसर्जन के लिए भी वे हरिद्वार नहीं पहुंचीं। उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने यह धार्मिक रस्म पूरी की, जबकि बेटियों ने अपने घर पर पिता की तेरहवीं करने की बात कही है।

Sonipat News: The death of elderly textile trader Shivcharan Ram Ratan Gupta at an old age home in Sonipat has raised questions about family relationships and elderly care. His three daughters did not attend his cremation and were also absent from his asthi visarjan in Haridwar. Shivcharan’s elder brother Mahendra Gupta performed the final rites. The daughters reportedly told the old age home management that they were ashamed and had some personal compulsions, while also stating that they would perform their father’s terahvin at home.

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