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सुप्रीम कोर्ट में टली मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद की सुनवाई, अब 12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई!

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सुप्रीम कोर्ट में टली मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद की सुनवाई, प्रतिनिधिक वाद पर भी नहीं हो सकी बहस, अब 12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

 AIN NEWS 1 नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित धार्मिक और कानूनी मामलों में शामिल मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में फिलहाल कोई नई न्यायिक प्रगति नहीं हुई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई किसी कारणवश नहीं हो सकी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त तय कर दी है। इस कारण अब सभी पक्षों की निगाहें अगली तारीख पर टिक गई हैं, जहां विवाद के कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर सुनवाई होने की संभावना है।

यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक दावे, कानूनी अधिकार और पूर्व में हुए समझौतों जैसे कई जटिल प्रश्न शामिल हैं। इसी वजह से इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

सुनवाई क्यों टली?

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सूचीबद्ध थी, लेकिन किसी कारणवश इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने मामले को स्थगित करते हुए अगली तारीख 12 अगस्त निर्धारित कर दी।

इस दौरान केवल मुख्य विवाद ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर भी सुनवाई होनी थी। यह प्रश्न इस बात से जुड़ा है कि हिंदू पक्ष की ओर से दायर कई याचिकाओं में से किसे “प्रतिनिधिक वाद (Representative Suit)” माना जाए।

यह मुद्दा आगे की पूरी न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह तय होगा कि अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई किस प्रकार आगे बढ़ेगी।

प्रतिनिधिक वाद को लेकर क्या है विवाद?

इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से कई अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाद संख्या-17 को प्रतिनिधिक वाद के रूप में स्वीकार किया था।

हालांकि, अन्य हिंदू वादकारियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनकी याचिकाएं अलग-अलग तथ्यों, दस्तावेजों, ऐतिहासिक दावों और कानूनी आधारों पर आधारित हैं।

उनका तर्क है कि यदि केवल एक मुकदमे को प्रतिनिधिक वाद मान लिया जाता है तो बाकी याचिकाओं में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर अलग से विचार नहीं हो पाएगा। इसलिए सभी मामलों की स्वतंत्र रूप से सुनवाई आवश्यक है।

अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि प्रतिनिधिक वाद को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

क्या है पूरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद?

यह विवाद मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा हुआ है।

हिंदू पक्ष का दावा है कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है, वही भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविक जन्मस्थली है। उनका कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में 17वीं शताब्दी के दौरान वहां स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था।

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इसी आधार पर हिंदू पक्ष अदालत से विवादित भूमि पर स्वामित्व, पूजा-अर्चना के अधिकार तथा पूरे परिसर की वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक जांच कराने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?

दूसरी ओर, शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति इस दावे से सहमत नहीं है।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंधन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके बाद यह विवाद समाप्त माना गया था।

उनका तर्क है कि दशकों पहले हुए इस समझौते को अब चुनौती देना कानूनी रूप से उचित नहीं है। साथ ही मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति पहले से स्थापित है, इसलिए पुराने समझौते को दोबारा विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों के अलग-अलग कानूनी दावे

मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में विभिन्न कानूनी और ऐतिहासिक आधार प्रस्तुत कर रहे हैं।

हिंदू पक्ष का कहना है कि धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य उनके दावे को मजबूत करते हैं।

वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि पहले से हुए समझौते और लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को अदालत के सामने ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इन्हीं दलीलों के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई में विभिन्न कानूनी प्रश्नों पर विचार करेगी।

शाही ईदगाह कमेटी ने की थी संयम बरतने की अपील

इस मामले को लेकर हाल ही में 5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सचिव एवं अधिवक्ता तनवीर अहमद ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े कई मुकदमे अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं। ऐसे में किसी भी पक्ष को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए जिससे सामाजिक तनाव बढ़े या माहौल प्रभावित हो।

उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि अदालत जो भी निर्णय देगी, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

परिसर की वर्तमान स्थिति पर क्या कहा गया?

तनवीर अहमद ने यह भी कहा था कि वर्तमान समय में मंदिर और मस्जिद दोनों के प्रवेश मार्ग अलग-अलग हैं तथा दोनों स्थानों पर नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

उनके अनुसार यह परिसर लंबे समय से सामाजिक सौहार्द और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का उदाहरण रहा है। इसलिए सभी पक्षों को अदालत के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए और किसी भी प्रकार की भड़काऊ बयानबाजी से बचना चाहिए।

12 अगस्त की सुनवाई क्यों होगी अहम?

अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। माना जा रहा है कि उस दिन सुप्रीम कोर्ट प्रतिनिधिक वाद के प्रश्न सहित मामले के कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर सुनवाई कर सकता है।

यह सुनवाई आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के मूल मुद्दे पर कोई टिप्पणी या निर्णय नहीं दिया है।

देशभर में इस मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है और सभी पक्ष अदालत के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

The Supreme Court has adjourned the hearing in the Mathura Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah dispute until August 12. The case involves significant legal questions regarding the Representative Suit, ownership claims, worship rights, the Shahi Idgah Mosque, and the Shri Krishna Janmasthan. Both Hindu and Muslim parties have presented different legal arguments, making this one of India’s most closely watched religious and legal disputes. The upcoming Supreme Court hearing is expected to play an important role in determining the future course of the Mathura temple-mosque case.

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