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हाइवे किनारे शराब दुकानों पर फिलहाल राहत: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक!

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AIN NEWS 1: राजस्थान में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित शराब की दुकानों को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम हस्तक्षेप करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें हाइवे के किनारे स्थित 1,100 से अधिक शराब दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

यह फैसला न केवल राज्य सरकार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उन लाइसेंसधारकों के लिए भी बड़ी राहत है, जिनकी आजीविका इस फैसले से प्रभावित होने वाली थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद ये सभी दुकानें पहले की तरह संचालित होती रहेंगी।

क्या है पूरा मामला?

राजस्थान हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2025 को एक सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया था कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में आने वाली सभी शराब दुकानों को बंद किया जाए या उन्हें कहीं और शिफ्ट किया जाए। कोर्ट का यह फैसला सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सड़क हादसों का एक बड़ा कारण शराब पीकर वाहन चलाना है, और ऐसे में हाइवे के किनारे शराब की आसान उपलब्धता लोगों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

हाईकोर्ट का तर्क: जीवन सबसे महत्वपूर्ण

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को जीवन और सुरक्षा का अधिकार है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि इस फैसले से राज्य को लगभग 2,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, तब भी यह नुकसान लोगों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

राजस्थान सरकार और शराब दुकानों के लाइसेंसधारकों ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दाखिल करते हुए कहा कि यह फैसला न केवल व्यावहारिक रूप से कठिन है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के भी खिलाफ है।

सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि शहरी क्षेत्रों में स्थित हाइवे पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ने छूट दी हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश इस स्थापित नियम के विपरीत है।

 क्या दलीलें दी गईं?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और लाइसेंसधारकों ने कई अहम तर्क रखे:

शहरी सीमा का मुद्दा: यह बताया गया कि शहरों के भीतर आने वाले हाइवे पर शराब दुकानों पर प्रतिबंध लागू नहीं होता।

आर्थिक प्रभाव: इतने बड़े पैमाने पर दुकानों को हटाने से हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी प्रभावित होगी।

नियमों का उल्लंघन: लाइसेंसधारकों का कहना था कि उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए ही दुकानें खोली हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इसका मतलब यह है कि जब तक मामले की अंतिम सुनवाई नहीं होती, तब तक इन दुकानों को हटाया नहीं जाएगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

क्या होगा आगे?

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम राहत है। मामले की विस्तृत सुनवाई अभी बाकी है। आने वाले समय में कोर्ट यह तय करेगा कि:

क्या हाइवे किनारे शराब की दुकानों को पूरी तरह हटाना जरूरी है?

या फिर सुरक्षा और राजस्व के बीच कोई संतुलन बनाया जा सकता है?

संभव है कि कोर्ट कुछ नए दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे सड़क सुरक्षा भी बनी रहे और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

सड़क सुरक्षा बनाम राजस्व: बड़ी बहस

यह मामला केवल शराब दुकानों का नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा एक बड़ा सवाल है — क्या सरकार को राजस्व के लिए लोगों की सुरक्षा से समझौता करना चाहिए?

एक तरफ राज्य सरकार को शराब बिक्री से भारी राजस्व मिलता है, जिससे विकास कार्यों में मदद मिलती है। वहीं दूसरी तरफ, सड़क हादसों में हर साल हजारों लोगों की जान जाती है, जिनमें शराब का योगदान एक बड़ा कारण माना जाता है।

आम लोगों की राय

इस मुद्दे पर समाज भी बंटा हुआ नजर आता है:

कुछ लोग मानते हैं कि हाइवे के पास शराब की दुकानें नहीं होनी चाहिए।

वहीं कई लोग कहते हैं कि अगर नियमों का पालन हो और सख्ती से चेकिंग की जाए, तो दुकानों को हटाने की जरूरत नहीं है।

व्यापारियों के लिए राहत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से शराब व्यापार से जुड़े लोगों को फिलहाल राहत मिली है। अगर हाईकोर्ट का आदेश लागू हो जाता, तो हजारों दुकानों को बंद करना पड़ता, जिससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता।

राजस्थान में हाइवे किनारे शराब दुकानों को लेकर चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्थिति को फिलहाल स्थिर कर दिया है। यह मामला आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक बहस का रूप ले सकता है।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि देश में सड़क सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

The Supreme Court has provided interim relief by staying the Rajasthan High Court order that mandated the removal of liquor shops located within 500 meters of national and state highways in urban areas. This decision impacts over 1,100 liquor vendors and highlights the ongoing debate between road safety concerns and state revenue from liquor sales. The case is significant in understanding India’s liquor policy, highway safety regulations, and the legal framework governing alcohol sales near highways.

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