AIN NEWS 1 आगरा: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल एक बार फिर इतिहास, आस्था और कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में है। आगरा घूमने पहुंचीं कुछ महिलाओं ने ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां का मकबरा मानने के बजाय इसे भगवान शिव का मंदिर यानी ‘तेजो महालय’ बताया। पर्यटकों ने स्मारक के प्रवेश द्वार पर हाथ जोड़कर प्रणाम किया और एक महिला ने अंदर जाने से पहले अपनी चप्पल भी उतार दी।
मथुरा और राजस्थान के धौलपुर से आईं महिलाओं का कहना था कि उनके लिए यह केवल ताजमहल नहीं, बल्कि भगवान शिव से जुड़ा धार्मिक स्थल है। महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने ताजमहल के बारे में ‘तेजो महालय’ होने की बातें सुनी हैं और इसी विश्वास के कारण उन्होंने यहां मंदिर की तरह हाथ जोड़कर सिर झुकाया।
हालांकि, यह बात स्पष्ट करना जरूरी है कि ताजमहल को तेजो महालय शिव मंदिर बताने का दावा ऐतिहासिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड ताजमहल को शाहजहां द्वारा मुमताज महल की स्मृति में बनवाया गया मकबरा बताते हैं।

महिलाओं ने क्या कहा?
मथुरा से आईं कमलेश ने ताजमहल के मुख्य प्रवेश द्वार पर हाथ जोड़कर प्रणाम किया। उनका कहना था कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह इसे भगवान शिव का मंदिर मानती हैं। उनके मुताबिक, जिस तरह मंदिर में पहुंचकर श्रद्धालु हाथ जोड़ते और सिर झुकाते हैं, उसी भावना से उन्होंने यहां भी प्रणाम किया।
धौलपुर की बंटी देवी ने भी ताजमहल के सामने सिर झुकाकर प्रणाम किया और ‘बम भोले’ के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने सुना है कि ताजमहल के नीचे भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं। इसी विश्वास के चलते उन्होंने स्मारक में प्रवेश से पहले चप्पल उतार दी।
इन पर्यटकों की व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता अपनी जगह है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है। यह दावा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है और अब एक बार फिर अदालत में इसकी कानूनी जांच की मांग की जा रही है।
क्या है ‘तेजो महालय’ का दावा?
‘तेजो महालय’ का सिद्धांत मुख्य रूप से इस दावे पर आधारित है कि वर्तमान ताजमहल परिसर में मुगल काल से पहले भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर या मंदिर-महल मौजूद था। इस दावे के समर्थक कहते हैं कि शाहजहां ने पहले से मौजूद संरचना पर कब्जा कर उसे अपनी पत्नी मुमताज महल का मकबरा बनाया।
इस दावे को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि लेखक पीएन ओक की किताबों और उनके द्वारा प्रस्तुत सिद्धांतों से मिली। बाद में अलग-अलग हिंदू संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने इसी तरह के दावों को लेकर अदालतों का रुख किया।
दूसरी ओर, उपलब्ध आधिकारिक ऐतिहासिक और पुरातात्विक रिकॉर्ड ताजमहल को मुगलकालीन मकबरा बताते हैं। इसलिए ‘तेजो महालय’ का दावा और आधिकारिक इतिहास, दोनों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
2026 में फिर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
ताजमहल के इतिहास को लेकर विवाद 2026 में फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि ताजमहल वास्तव में ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय’ मंदिर है और इसके वास्तविक इतिहास की जांच के लिए वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक सर्वे कराया जाना चाहिए।
याचिका में ताजमहल परिसर में कथित तौर पर मौजूद 109 ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इनमें कुछ ऐसे वास्तु और प्रतीकात्मक तत्व हैं, जिन्हें वे हिंदू मंदिर की संरचना से जोड़ते हैं।
मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI से जवाब मांगा था। यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने ताजमहल को शिव मंदिर मान लिया है। अदालत ने अभी केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
आगरा की अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा विवाद
ताजमहल के सर्वे और कथित बंद कमरों की जांच की मांग पहले भी अदालतों में उठ चुकी है। 2019 में आगरा की सिविल कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ताजमहल के सर्वे की मांग को खारिज कर दिया था।
बाद में इस मामले को आगे चुनौती दी गई। 2026 में आगरा की अदालत से जुड़े आदेशों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया गया। हाईकोर्ट में दायर नई याचिका में ताजमहल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दावा किया गया है कि ताजमहल की संरचना में कई ऐसे संकेत हैं, जो इसे हिंदू मंदिर से जोड़ते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक या न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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22 बंद कमरों को लेकर भी उठा विवाद
ताजमहल के कथित बंद कमरों को लेकर भी कई वर्षों से चर्चा होती रही है। कुछ याचिकाकर्ताओं का दावा रहा है कि इन कमरों के भीतर हिंदू देवी-देवताओं से संबंधित मूर्तियां या अन्य ऐतिहासिक सामग्री हो सकती है।
2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ताजमहल के बंद कमरों को खुलवाने और कथित ‘वास्तविक इतिहास’ की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने याचिकाकर्ता को इतिहास के अध्ययन और शोध की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी।
हिंदू महासभा भी लगातार उठाता रहा है मुद्दा
‘तेजो महालय’ का मुद्दा अखिल भारत हिंदू महासभा सहित कुछ हिंदू संगठनों की गतिविधियों के कारण भी समय-समय पर सुर्खियों में आता रहा है।
3 अगस्त 2024 को ताजमहल के अंदर दो युवकों द्वारा कथित तौर पर गंगाजल चढ़ाए जाने का वीडियो सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक, CISF ने दोनों को हिरासत में लिया और बाद में पुलिस कार्रवाई हुई। दोनों को इस दावे से जोड़ा गया कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर यानी तेजो महालय है।
2025 में भी ताजमहल परिसर में शिव तांडव स्तोत्र के पाठ का वीडियो सामने आने के बाद विवाद हुआ था। इस घटना को भी ‘तेजो महालय’ के दावे से जोड़कर देखा गया।
अगस्त 2026 में आरती का वीडियो वायरल, FIR दर्ज
अगस्त 2026 में विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ा। 17 अगस्त को सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें मेहताब बाग से ताजमहल की दिशा में कथित पूजा-अर्चना और आरती करते लोग दिखाई दे रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, दो वीडियो सामने आए थे। एक लगभग 54 सेकंड और दूसरा करीब 12 सेकंड का था। वीडियो सामने आने के बाद ASI की शिकायत पर आगरा के एत्माद्दौला थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
पुलिस ने मामले में प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम की संबंधित धारा, BNS की धारा 223 और IT Act की धारा 67 के तहत कार्रवाई की। पुलिस वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
क्या ताजमहल के नीचे शिव मंदिर होने की पुष्टि हुई?
यह इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। अभी तक ऐसी कोई अंतिम न्यायिक या आधिकारिक पुरातात्विक पुष्टि नहीं हुई है कि ताजमहल के नीचे भगवान शिव का मंदिर है या ताजमहल मूल रूप से ‘तेजो महालय’ था।
मौजूदा स्थिति में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली, कुछ लोग और याचिकाकर्ता ताजमहल को तेजो महालय शिव मंदिर मानते हैं और इसके समर्थन में ऐतिहासिक तथा स्थापत्य संबंधी दावे करते हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और ASI के आधिकारिक रिकॉर्ड ताजमहल को शाहजहां द्वारा मुमताज महल की स्मृति में बनवाया गया मकबरा बताते हैं।
2026 की हाईकोर्ट कार्यवाही में भी अभी केवल जवाब मांगा गया है। अदालत ने ताजमहल को शिव मंदिर घोषित नहीं किया है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी दावे को अंतिम ऐतिहासिक सत्य मानने से पहले आधिकारिक दस्तावेज, न्यायालय के आदेश और पुरातात्विक साक्ष्यों को देखना जरूरी है।
विवाद की जड़ क्या है?
ताजमहल को ‘तेजो महालय’ बताने का विवाद नया नहीं है। पीएन ओक के लेखन से इसे व्यापक चर्चा मिली। बाद के वर्षों में कई संगठनों और व्यक्तियों ने अदालतों में याचिकाएं दाखिल कर ताजमहल की संरचना और इतिहास की जांच की मांग की।
अब 2026 में हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद एक बार फिर इस बहस ने जोर पकड़ लिया है। आने वाले समय में केंद्र सरकार और ASI की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि इस याचिका पर न्यायालय किस दिशा में आगे बढ़ता है।
फिलहाल ताजमहल देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर और विश्व प्रसिद्ध स्मारक है। इसे शिव मंदिर या ‘तेजो महालय’ बताने का दावा एक विवादित ऐतिहासिक दावा है, जिसका अंतिम न्यायिक फैसला अभी सामने नहीं आया है।
The Taj Mahal Tejo Mahalaya controversy has once again gained attention after tourists visiting Agra described the monument as a Shiva temple and offered prayers. The latest Taj Mahal news is linked to a 2026 Allahabad High Court case seeking a survey of the monument and raising claims about its alleged Hindu temple origins. The Archaeological Survey of India and the Central Government have been asked to respond, but the Allahabad High Court has not declared the Taj Mahal a Shiva temple. The Taj Mahal remains officially described by the Ministry of Culture as a Mughal-era mausoleum commissioned by Shah Jahan for Mumtaz Mahal. The Tejo Mahalaya claim continues to remain a subject of historical and legal debate.



















