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तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस, विजय की TVK को समर्थन देने से पीछे हटे कई दल!

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AIN NEWS 1: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) सरकार बनाने के दावे को लेकर लगातार चर्चा में है, लेकिन अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। जिन सहयोगियों और विपक्षी दलों से TVK को समर्थन की उम्मीद थी, उनमें से कई पार्टियों ने खुलकर दूरी बना ली है। इसी बीच राज्यपाल ने भी सरकार गठन को लेकर सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट कर दिया है कि केवल दावे के आधार पर सरकार बनाने का मौका नहीं दिया जाएगा।

राज्य की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल AIADMK ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी परिस्थिति में विजय की TVK का समर्थन नहीं करेगी। इसके अलावा वाम दल CPM, CPI और मुस्लिम लीग (IUML) ने भी TVK से दूरी बना ली है। इन घटनाओं के बाद तमिलनाडु की राजनीति में असमंजस की स्थिति बन गई है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या विजय वास्तव में सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा जुटा पाएंगे या नहीं।

AIADMK ने क्यों बनाई दूरी?

तमिल राजनीति में AIADMK हमेशा से एक मजबूत ताकत रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक AIADMK नेतृत्व का मानना है कि TVK अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं है और उसके साथ जाना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से पार्टी ने किसी भी तरह के समर्थन से इनकार कर दिया।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि AIADMK अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाए रखना चाहती है। विजय की लोकप्रियता युवाओं के बीच जरूर बढ़ रही है, लेकिन AIADMK फिलहाल किसी नए राजनीतिक प्रयोग का हिस्सा बनने के मूड में नहीं दिख रही।

AIADMK के इस फैसले ने TVK की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि तमिलनाडु में बिना बड़े क्षेत्रीय दलों के समर्थन के सरकार बनाना आसान नहीं माना जाता।

वाम दलों ने भी किया किनारा

CPM और CPI जैसे वामपंथी दलों ने भी विजय की पार्टी को समर्थन देने से इनकार कर दिया है। दोनों दलों का कहना है कि TVK ने अभी तक अपनी स्पष्ट राजनीतिक विचारधारा सामने नहीं रखी है। वाम दलों का मानना है कि केवल लोकप्रियता के आधार पर राजनीति नहीं चल सकती, बल्कि मजबूत नीतियां और जनहित का स्पष्ट एजेंडा भी जरूरी होता है।

इसी तरह IUML ने भी TVK से दूरी बनाते हुए कहा कि फिलहाल वह किसी नए गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। इन फैसलों के बाद यह साफ हो गया है कि विजय के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं रहने वाला।

TVK का दावा और राज्यपाल की शर्त

TVK की ओर से दावा किया गया है कि उनके पास 112 विधायकों का समर्थन है। पार्टी नेताओं ने राज्यपाल को समर्थन पत्र भी सौंपे हैं। हालांकि राज्यपाल ने इस दावे पर तुरंत भरोसा नहीं जताया।

सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने कहा है कि सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत जरूरी है और विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 118 विधायकों का समर्थन होना चाहिए। यही वजह है कि राज्यपाल फिलहाल TVK को सरकार बनाने का निमंत्रण देने में जल्दबाजी नहीं करना चाहते।

राज्यपाल का यह रुख राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। संवैधानिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहते जिससे बाद में राजनीतिक विवाद पैदा हो।

विजय की बढ़ती राजनीतिक चुनौती

फिल्मी दुनिया में सुपरस्टार का दर्जा हासिल करने वाले विजय ने राजनीति में कदम रखकर तमिलनाडु की सियासत में नई बहस छेड़ दी थी। उनकी पार्टी TVK को युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच अच्छा समर्थन मिलता दिख रहा है। लेकिन राजनीति केवल लोकप्रियता से नहीं चलती और यही चुनौती अब विजय के सामने खड़ी नजर आ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार गठन के लिए केवल जनसमर्थन नहीं बल्कि मजबूत राजनीतिक गठबंधन भी जरूरी होता है। फिलहाल TVK के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि उसके साथ कोई बड़ा सहयोगी दल खुलकर खड़ा नहीं दिख रहा।

क्या आगे बदल सकते हैं समीकरण?

तमिलनाडु की राजनीति में आखिरी समय पर समीकरण बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है जब राजनीतिक दलों ने अचानक अपना रुख बदल लिया हो। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि TVK पूरी तरह राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ चुकी है।

संभावना यह भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कुछ निर्दलीय विधायक या छोटे दल TVK के साथ आ सकते हैं। हालांकि अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विजय बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल नहीं होते हैं तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। ऐसे में राज्यपाल के पास दूसरे विकल्पों पर विचार करने का रास्ता खुल सकता है।

जनता के बीच क्या है माहौल?

तमिलनाडु में विजय की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। उनके समर्थक लगातार सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर TVK के पक्ष में अभियान चला रहे हैं। कई युवाओं का मानना है कि राज्य को नई राजनीति और नए नेतृत्व की जरूरत है।

वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों का कहना है कि केवल स्टार पावर के दम पर सरकार नहीं चलाई जा सकती। अनुभवी नेताओं का मानना है कि शासन चलाने के लिए राजनीतिक अनुभव और मजबूत प्रशासनिक समझ भी जरूरी होती है।

इसी वजह से राज्य में फिलहाल राजनीतिक माहौल बेहद गर्म बना हुआ है और लोग लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर तमिलनाडु में अगली सरकार किसकी बनेगी।

राज्यपाल की भूमिका पर भी नजर

पूरे घटनाक्रम में राज्यपाल की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। संवैधानिक नियमों के तहत राज्यपाल को यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकार बनाने वाली पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत हो।

अगर TVK आवश्यक संख्या नहीं जुटा पाती है तो राज्यपाल अन्य दलों को भी मौका दे सकते हैं। वहीं अगर राजनीतिक गतिरोध ज्यादा बढ़ता है तो राज्य में नई राजनीतिक परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।

आने वाले दिनों में क्या हो सकता है?

तमिलनाडु की राजनीति फिलहाल बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ विजय की नई राजनीतिक ताकत है, तो दूसरी तरफ पुराने और अनुभवी दलों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या TVK बहुमत का आंकड़ा जुटा पाएगी या नहीं। यदि पार्टी अतिरिक्त समर्थन हासिल कर लेती है तो विजय के लिए यह बड़ी राजनीतिक जीत साबित हो सकती है। लेकिन यदि संख्या पूरी नहीं होती, तो सरकार गठन का सपना अधूरा भी रह सकता है।

फिलहाल राज्य की राजनीति में सस्पेंस बरकरार है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

Tamil Nadu politics has entered a crucial phase after AIADMK, CPM, CPI, and IUML refused to support Vijay’s TVK in government formation. While TVK claims support from 112 MLAs, the Tamil Nadu Governor has reportedly demanded proof of majority with at least 118 legislators. The political crisis has intensified discussions around Vijay’s political future, coalition support, Tamil Nadu Assembly numbers, and the possibility of a new regional power shift in state politics.

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