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तिहाड़ जेल में अकेली महिला इंटर्न का अनुभव: पुरुषों की यूनिट में 2 हफ्तों की सच्ची कहानी!

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AIN NEWS 1: भारत की सबसे बड़ी जेल—तिहाड़ जेल—में एक महिला साइकोलॉजी इंटर्न ने दो सप्ताह का अनुभव साझा किया है, जो न सिर्फ अनोखा है बल्कि कई लोगों के लिए चौंकाने वाला भी। गाजियाबाद की रहने वाली दिया काहली नाम की इस इंटर्न ने तिहाड़ की पुरुषों वाली यूनिट में अकेली महिला के रूप में इंटर्नशिप की। उन्होंने अपने अनुभव को लिंक्डइन पर साझा किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

पुरुष यूनिट में अकेली महिला ट्रेनी

दिया ने बताया कि तिहाड़ जेल में पुरुष कैदियों के बीच एकमात्र महिला इंटर्न होना उनके लिए एक अनूठा अनुभव था। यह अनुभव सिर्फ मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण नहीं था, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बहुत कुछ सिखाने वाला रहा। उन्होंने लिखा कि शुरुआत में वह काफी घबराई हुई थीं, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को परिस्थिति के अनुसार ढाल लिया।

दैनिक कार्य और जिम्मेदारियां

दिया का मुख्य काम कैदियों से बातचीत करना, उनकी मानसिक स्थिति को समझना, साइकोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करना और वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली पूछताछ का सामना करना था। उन्होंने यह भी बताया कि वहां कोई स्पष्ट रूप से निर्देशित मैनुअल नहीं था, जिससे शुरुआती दिनों में काफी असमंजस रहा। कई बार गार्ड से भी मदद लेनी पड़ती थी।

कैदियों की प्रतिक्रियाएं

हर कैदी बातचीत के लिए तैयार नहीं था। कुछ चुप रहते थे, कुछ सिर्फ घूरते थे, और कुछ हैरान होकर प्रतिक्रिया देते थे। लेकिन धीरे-धीरे दिया ने उन्हें समझने की कोशिश की और अपने कार्य को बेहतर ढंग से निभाना शुरू किया।

सहयोग और सीख

उन्होंने यह भी कहा कि जेल में वरिष्ठ पुलिस कर्मचारियों का उन्हें काफी समर्थन मिला। उनके सहयोग से ही वह इस कठिन वातावरण में खुद को स्थिर रख सकीं। दिया का मानना है कि हालांकि यह अनुभव चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इससे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला—विशेष रूप से इंसानी व्यवहार और मानसिकता को समझने के संदर्भ में।

इंटर्नशिप से मिली सीख

दिया ने अपनी पोस्ट में नई ट्रेनीज़ के लिए कुछ सुझाव भी साझा किए हैं:

1. धैर्य रखें – तिहाड़ का सिस्टम अभी भी विकास की प्रक्रिया में है।

2. गेट नंबर 3 – डॉक्यूमेंटेशन के लिए यह सबसे आसान विकल्प है।

3. अनुमति ज़रूरी है – अगर आप रिसर्च करना चाहते हैं, तो पहले अनुमति लें।

4. मानसिक रूप से तैयार रहें – यह स्थान कठिन है, मानसिक रूप से मजबूत रहना ज़रूरी है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

उनकी यह पोस्ट वायरल हो चुकी है और कई लोगों ने उनके साहस और अनुभव साझा करने के लिए सराहना की है। तिहाड़ में इंटर्नशिप कर चुकी एक अन्य महिला ने कमेंट में लिखा कि वह इस संघर्ष को पूरी तरह समझ सकती हैं। कई यूज़र्स ने दिया को धन्यवाद कहा कि उन्होंने इस अनुभव को दुनिया के सामने रखा।

दिया काहली का यह अनुभव दिखाता है कि कैसे एक महिला, पुरुषों से भरे जेल वातावरण में भी मानसिक मजबूती के साथ काम कर सकती है। यह कहानी सिर्फ तिहाड़ जेल की हकीकत को उजागर नहीं करती, बल्कि उन युवा प्रोफेशनल्स को भी प्रेरणा देती है जो मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं।

A female psychology intern’s recent two-week stint at Tihar Jail, India’s largest correctional facility, has grabbed attention. As the only woman trainee in the male unit, her experience sheds light on the psychological work involved, the emotional challenges she faced, and the complex environment within the prison. Her story gives crucial insight into prison internships in India, psychological research in correctional settings, and the resilience required for such unique roles.

 

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