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यूपी में गौवध कानून हुआ और सख्त? जानिए वायरल दावे की पूरी सच्चाई और क्या हैं नए नियम!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में गौवध कानून को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यूपी कैबिनेट ने “गौवध निवारण अध्यादेश” पास कर दिया है, जिसके तहत गाय के अंग-भंग करने पर 7 साल की सजा और गाय की हत्या करने पर 10 साल की जेल के साथ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर यह दावा ऐसे फैलाया जा रहा है जैसे राज्य सरकार ने हाल ही में कोई नया कानून लागू किया हो। हालांकि जब इस दावे की पड़ताल की गई तो सामने आया कि वायरल पोस्ट में बताई गई कई बातें पुराने कानून से जुड़ी हैं, जिन्हें अब नए अपडेट की तरह शेयर किया जा रहा है।

क्या है वायरल दावा?

वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि:

गाय के अंग-भंग करने पर 7 साल की सजा होगी

गाय की हत्या करने पर 10 साल तक की जेल होगी

आरोपी पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा

यूपी कैबिनेट ने नया अध्यादेश पास किया है

यही पोस्ट फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में शेयर की जा रही है।

पड़ताल में क्या सामने आया?

जांच में पता चला कि उत्तर प्रदेश सरकार ने गौवध रोकने के लिए सख्त कानून पहले ही लागू कर रखा है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2020 में “उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020” लागू किया था। उसी दौरान कानून में कई सख्त प्रावधान जोड़े गए थे।

यानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि पुराने कानून की जानकारी को नए अंदाज में दोबारा वायरल किया जा रहा है।

कानून में क्या हैं असली प्रावधान?

उत्तर प्रदेश में गौवध से संबंधित मामलों को रोकने के लिए पहले से कानून मौजूद है। संशोधन के बाद इसमें सजा और जुर्माने को और कठोर किया गया था।

1. गाय को नुकसान पहुंचाने पर सजा

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गाय को गंभीर चोट पहुंचाता है, अंग-भंग करता है या उसकी जान खतरे में डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे मामलों में:

1 साल से लेकर 7 साल तक की जेल

1 लाख से 3 लाख रुपये तक जुर्माना

का प्रावधान रखा गया है।

2. गौवध करने पर सख्त कार्रवाई

अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से गौवध करता है, करवाता है या इसमें शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ और सख्त सजा का प्रावधान है।

कानून के अनुसार:

3 साल से लेकर 10 साल तक की जेल

3 लाख से 5 लाख रुपये तक जुर्माना

लगाया जा सकता है।

3. अवैध परिवहन पर भी कार्रवाई

कानून में गायों की अवैध तस्करी और परिवहन को लेकर भी सख्ती की गई है। यदि कोई व्यक्ति अवैध तरीके से गायों को राज्य के बाहर ले जाता है या तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उस पर भी कठोर कार्रवाई हो सकती है।

योगी सरकार ने क्यों किया था संशोधन?

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना था कि राज्य में गौतस्करी और अवैध गौवध की घटनाओं को रोकने के लिए कानून को और मजबूत बनाने की जरूरत थी। इसी वजह से 2020 में अध्यादेश लाकर सजा और जुर्माने की सीमा बढ़ाई गई थी।

सरकार ने यह भी कहा था कि संगठित तरीके से हो रही गौतस्करी पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून जरूरी है।

क्या अभी कोई नया अध्यादेश आया है?

अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार हाल ही में ऐसा कोई नया अध्यादेश पास नहीं किया गया है, जैसा सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है।

वायरल पोस्ट में जिन सजाओं और जुर्मानों का जिक्र है, वे पहले से लागू कानून का हिस्सा हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि यूपी कैबिनेट ने अभी नया कानून पास किया है।

सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही पुरानी जानकारी?

अक्सर सोशल मीडिया पर पुराने सरकारी आदेश, कानून या फैसलों को नए घटनाक्रम की तरह शेयर किया जाता है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

इस मामले में भी 2020 के कानून को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे यह 2026 का नया फैसला हो।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक दस्तावेज, सरकारी वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोतों की जांच जरूरी है।

कई बार अधूरी जानकारी या पुराने आदेशों को संदर्भ से हटाकर वायरल कर दिया जाता है, जिससे गलतफहमी फैलती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह झूठा नहीं है, लेकिन इसे भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में गौवध और गायों के अवैध परिवहन को लेकर सख्त कानून पहले से लागू हैं। गाय के अंग-भंग करने पर 7 साल तक की सजा और गौवध करने पर 10 साल तक की जेल व 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है।

हालांकि, इसे “अभी-अभी यूपी कैबिनेट द्वारा पास किए गए नए अध्यादेश” के रूप में पेश करना सही नहीं है, क्योंकि ये प्रावधान 2020 से लागू हैं।

The Uttar Pradesh cow slaughter law has once again become a topic of discussion after a viral social media claim stated that the UP Cabinet passed a new ordinance imposing 10 years imprisonment and a ₹5 lakh fine for cow slaughter. This fact-check article explains the real provisions of the Uttar Pradesh Prevention of Cow Slaughter Act, the punishment for illegal cow slaughter, transport, and cruelty to cows, along with the truth behind the viral post. The article also highlights the amendments introduced by the Yogi Adityanath government and clarifies whether the ordinance is new or an old law being reshared online.

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