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समय पर नहीं हो पाएंगे पंचायत चुनाव? 2026 को लेकर बड़ी देरी की आशंका, जानिए असली वजह!

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समय पर नहीं हो पाएंगे पंचायत चुनाव? 2026 को लेकर बड़ी देरी की आशंका, जानिए असली वजह

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बनती नजर आ रही है। लंबे समय से पंचायत चुनाव की तैयारी का इंतजार कर रहे संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ होता जा रहा है कि पंचायत चुनाव तय समय पर कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

राज्य में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को पूरा हो रहा है, लेकिन जिस रफ्तार से चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं, उससे यह आशंका गहराती जा रही है कि चुनाव समय से नहीं हो पाएंगे।

चुनाव की तैयारी में क्यों हो रही देरी?

पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी अड़चन इस बार OBC आरक्षण को लेकर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुसार, पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जरूरी है। यही आयोग यह तय करता है कि किस जिले में कितनी सीटों पर OBC आरक्षण लागू होगा।

हालांकि अब तक राज्य सरकार ने इस आयोग का गठन नहीं किया है। जानकारों की मानें तो अगर फरवरी में भी आयोग का गठन हो जाता है, तब भी उसकी रिपोर्ट आने में कम से कम दो महीने का समय लगेगा।

आरक्षण प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा?

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार को पंचायतों की सीटों का आरक्षण तय करना होगा। इस प्रक्रिया में भी करीब एक महीना लग सकता है। इसके बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।

राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, पंचायत चुनाव कराने के लिए न्यूनतम 35 दिन की अवधि जरूरी होती है। ऐसे में यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर भी शुरू होती हैं, तब भी मई-जून से पहले चुनाव कराना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।

मतदाता सूची की स्थिति क्या है?

पंचायत चुनाव को लेकर मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी को होना प्रस्तावित है। यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में जरूर है, लेकिन केवल मतदाता सूची तैयार हो जाने से चुनाव संभव नहीं हो जाते।

चुनाव कराने के लिए आरक्षण, सीट निर्धारण, अधिसूचना और नामांकन जैसी कई अहम प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें फिलहाल गति नजर नहीं आ रही है।

सरकार की तरफ से क्या कहा जा रहा है?

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार यह दावा करते रहे हैं कि सरकार पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराना चाहती है। उनका कहना है कि मतपत्र पहले ही जिलों में छपकर पहुंच चुके हैं और प्रशासनिक स्तर पर तैयारी चल रही है।

हालांकि जब उनसे यह पूछा जाता है कि चुनाव किस तारीख तक कराए जाएंगे, तो वे इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आते हैं। मंत्री यह जरूर मानते हैं कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी हो पाना कठिन है, लेकिन जून तक चुनाव कराने की कोशिश की जा सकती है।

क्या विधानसभा चुनाव की वजह से टल रहे हैं पंचायत चुनाव?

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि सरकार पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराना चाहती है। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव के नतीजे विधानसभा चुनाव की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि सरकार की ओर से इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए इस संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट में पहुंचा मामला

पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर अब मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी को लेकर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार जानबूझकर आयोग का गठन नहीं कर रही है, जिससे पंचायत चुनाव समय पर न कराए जा सकें। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे 26 मई की तारीख नजदीक आएगी, वैसे-वैसे और भी याचिकाएं अदालत में दाखिल हो सकती हैं।

पहले भी कोर्ट सख्त रुख अपना चुका है

यह पहला मौका नहीं है जब पंचायत या स्थानीय निकाय चुनावों में देरी का मामला कोर्ट तक पहुंचा हो। इससे पहले भी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

न्यायालय साफ कर चुका है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थानीय निकाय चुनाव समय पर कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए गए, तो कोर्ट सरकार को आदेश देकर चुनाव कराने को बाध्य कर सकता है।

पिछली बार क्या हुआ था?

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले पंचायत चुनाव में भी OBC आरक्षण के लिए समर्पित आयोग का गठन नहीं किया गया था। उस समय इस मुद्दे को लेकर काफी विवाद हुआ था और अदालतों में लंबी सुनवाई चली थी।

इस बार सरकार उसी स्थिति से बचने की कोशिश कर रही है, लेकिन आयोग गठन में देरी के चलते हालात फिर से उलझते नजर आ रहे हैं।

फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। सरकार की मंशा चुनाव कराने की बताई जा रही है, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी न होने के कारण चुनाव टलने की आशंका बनी हुई है।

यदि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट कोई सख्त आदेश जारी करता है, तो सरकार को हर हाल में चुनाव कराना होगा। वहीं, अगर अदालत से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आते, तो चुनाव जून या उसके बाद भी हो सकते हैं।

The UP Panchayat Elections 2026 are facing possible delays due to the late formation of the OBC reservation commission, incomplete reservation procedures, and pending High Court petitions. The Uttar Pradesh government has not yet finalized the reservation structure, which is mandatory before announcing the election schedule. Experts believe that if the process is not expedited, Panchayat Elections in Uttar Pradesh may be held after the scheduled tenure, raising constitutional and political concerns.

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