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गोरखपुर दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर भड़के मंत्री संजय निषाद, अधिकारियों पर उठाए सवाल!

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AIN NEWS 1: गोरखपुर में आयोजित उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा एक नए विवाद में घिर गई है। परीक्षा में पूछे गए एक सवाल में “अवसरवादी” के विकल्प के रूप में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री Sanjay Nishad ने कड़ी नाराजगी जताई है और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, गोरखपुर में आयोजित यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न ने विवाद खड़ा कर दिया। प्रश्न में “अवसरवादी” शब्द के विकल्पों में ‘पंडित’ को शामिल किया गया था। इस विकल्प को लेकर कई लोगों ने इसे एक विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया।

जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई। कई संगठनों और नेताओं ने इसे समाज में विभाजन फैलाने वाला कदम बताया।

मंत्री संजय निषाद की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए Sanjay Nishad ने कहा कि इस तरह के प्रश्न केवल एक गलती नहीं, बल्कि एक सोच का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी और कर्मचारी अंदर से अलग राजनीतिक विचारधारा रखते हैं और बाहर से सरकार के अनुरूप व्यवहार करते हैं।

उन्होंने कहा,

“हम बार-बार कहते हैं कि जो अधिकारी-कर्मचारी बने हुए हैं, उनमें से कई अंदर से ‘साइकिल’, ‘हाथी’ और ‘पंजा’ हैं, लेकिन ऊपर से ‘कमल’ ओढ़कर नौकरी कर रहे हैं।”

यह बयान सीधे तौर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्नों की ओर इशारा करता है। उनके इस बयान से यह स्पष्ट है कि वे प्रशासनिक तंत्र में राजनीतिक झुकाव को लेकर चिंतित हैं।

समाज में विद्वेष फैलाने का आरोप

मंत्री ने आगे कहा कि इस तरह के सवाल जानबूझकर समाज में विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से डाले जाते हैं। उनके मुताबिक, इस प्रकार की गतिविधियां न केवल प्रशासन की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि

“ऐसे अधिकारी अंदर से इस तरह की चीजें लिखकर समाज को बांटने का काम करते हैं।”

उनका मानना है कि किसी भी सरकारी परीक्षा में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील

Sanjay Nishad ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से अपील की है।

उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार, जो लोग सरकारी पद पर रहते हुए सामाजिक द्वेष फैलाते हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

यूजीसी और भर्ती प्रक्रियाओं पर भी उठे सवाल

मंत्री ने केवल इस परीक्षा तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने अन्य संस्थानों जैसे यूजीसी (UGC) और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि कहीं भी इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती सामने आती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि

“चाहे वह यूजीसी हो या दरोगा भर्ती परीक्षा, जहां भी इस तरह के सवाल आए हैं, वहां जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”

सभी जातियों का सम्मान जरूरी

इस विवाद के बीच मंत्री ने सामाजिक समरसता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में हर जाति और समुदाय का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है और किसी एक को निशाना बनाना गलत है।

उनके शब्दों में,

“किसी भी जाति को इंगित करके ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती। हर समाज का सम्मान होना चाहिए।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक सौहार्द और एकता को बनाए रखने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

प्रशासन के लिए बड़ा संदेश

यह पूरा मामला केवल एक प्रश्न या परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी मुद्दा बन गया है। मंत्री के बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं लेना चाहती।

इस घटना ने यह भी दिखाया है कि सरकारी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों की गुणवत्ता और संवेदनशीलता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

गोरखपुर दरोगा भर्ती परीक्षा का यह विवाद एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। Sanjay Nishad की प्रतिक्रिया ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों में केवल काम करना ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और निष्पक्षता भी उतनी ही जरूरी है।

The UP SI exam controversy in Gorakhpur has sparked widespread debate after the inclusion of the word ‘Pandit’ as an option for “opportunist.” Uttar Pradesh Cabinet Minister Sanjay Nishad strongly criticized officials, alleging political bias and social discord within the system. He urged Prime Minister Narendra Modi and Chief Minister Yogi Adityanath to take strict action against those responsible. The issue highlights concerns around UP police recruitment, caste sensitivity, and administrative accountability, making it a significant topic in current Uttar Pradesh news and politics.

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