AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगवाने वाले लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) अब उन उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वसूली गई रकम वापस करेगा, जिनसे स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने के नाम पर तय कीमत से ज्यादा पैसे लिए गए थे। यह रिफंड प्रक्रिया मई 2026 से शुरू होने जा रही है और इससे राज्य के 5 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि उपभोक्ताओं को लौटाई जाएगी। यह फैसला उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्देश के बाद लिया गया है। उपभोक्ता संगठनों ने लंबे समय से इस मामले को उठाया था और आरोप लगाया था कि बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर की कीमत तय होने से पहले ही उपभोक्ताओं से मनमाने तरीके से अधिक राशि वसूल ली।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
दरअसल, सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश बिजली विभाग ने नए बिजली कनेक्शनों के साथ स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया था। उस समय स्मार्ट मीटर की कोई आधिकारिक निर्धारित कीमत जारी नहीं हुई थी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से प्रति मीटर लगभग 6,016 रुपये वसूले जाने लगे।
बाद में 31 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने नई कॉस्ट डाटा बुक जारी की। इसमें स्मार्ट मीटर की वास्तविक लागत लगभग 2,800 रुपये तय की गई। इसके बाद यह साफ हो गया कि उपभोक्ताओं से प्रति मीटर करीब 3,200 रुपये अतिरिक्त वसूले गए थे।
यही मामला आगे चलकर विवाद का कारण बना। उपभोक्ता परिषद और कई सामाजिक संगठनों ने इस अतिरिक्त वसूली को गलत बताते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के बाद आयोग ने बिजली विभाग को अतिरिक्त रकम वापस करने का आदेश दिया।
5 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में 5 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगवाए थे। ऐसे सभी उपभोक्ता अब रिफंड पाने के दायरे में आएंगे।
यदि औसतन प्रति उपभोक्ता करीब 3,200 रुपये वापस किए जाते हैं, तो कुल रिफंड राशि 200 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। यह रकम सीधे तौर पर बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने वाली मानी जा रही है, खासकर उन परिवारों के लिए जो पहले ही बढ़ते बिजली खर्च से परेशान हैं।
आयोग ने क्या दिए निर्देश?
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने साफ कहा था कि उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक वसूली गई राशि वापस की जाए। आयोग ने अप्रैल 2026 से ही रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसमें देरी हुई।
अब बिजली विभाग ने मई 2026 से रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जाएगी और उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी बिजली बिल तथा विभागीय पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी।
कैसे मिलेगा उपभोक्ताओं को पैसा?
फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपभोक्ताओं को रिफंड एकमुश्त मिलेगा या किस्तों में दिया जाएगा। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा संभावना यही है कि यह राशि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में एडजस्ट की जाएगी।
यानी आने वाले महीनों में बिजली बिल पर विशेष छूट या समायोजन दिखाई दे सकता है। इससे उपभोक्ताओं को सीधे नकद भुगतान की बजाय बिल में राहत मिलने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
प्री-पेड से पोस्ट-पेड मीटर पर भी बड़ा फैसला
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट प्री-पेड मीटर को पोस्ट-पेड सिस्टम में बदलने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार का मानना है कि पोस्ट-पेड व्यवस्था आम उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा सुविधाजनक होगी।
प्री-पेड सिस्टम को लेकर कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि बार-बार रिचार्ज और तकनीकी दिक्कतों के कारण परेशानी हो रही है। ऐसे में सरकार अब सिस्टम को आसान और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
उपभोक्ता संगठनों ने जताई संतुष्टि
उपभोक्ता परिषद और बिजली उपभोक्ता संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला आम जनता के हित में है और इससे भविष्य में विभागों द्वारा मनमानी वसूली पर रोक लगेगी।
संगठनों ने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों के समय में अतिरिक्त वसूली हुई, उनकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए ताकि आगे ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
बिजली विभाग ने क्या कहा?
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिफंड प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सभी पात्र उपभोक्ताओं का डेटा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही पोर्टल पर इसकी जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी।
विभाग ने यह भी आश्वासन दिया है कि किसी भी पात्र उपभोक्ता के साथ अन्याय नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और अतिरिक्त चार्ज को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे थे। ऐसे में आयोग द्वारा अतिरिक्त वसूली वापस कराने का आदेश उपभोक्ताओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि रिफंड प्रक्रिया कितनी तेजी और पारदर्शिता से पूरी होती है। यदि यह प्रक्रिया सही तरीके से लागू होती है, तो लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) has announced a major relief for more than 5 lakh electricity consumers who paid extra charges for smart prepaid meters in Uttar Pradesh. The power department will reportedly refund over ₹200 crore after the UP Electricity Regulatory Commission fixed the actual smart meter cost at ₹2,800, against the earlier collection of ₹6,016 per consumer. The refund process is expected to begin from May 2026 and may be adjusted through electricity bills. The decision comes after complaints filed by consumer organizations regarding excess recovery in smart meter installation charges.


















