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‘ताजमहल नहीं, तेजो महालय था?’ वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के दावे से फिर गरमाई ऐतिहासिक बहस!

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‘ताजमहल नहीं, तेजो महालय था?’ वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के दावे से फिर गरमाई ऐतिहासिक बहस

AIN NEWS 1 : देश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल ताजमहल को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने दावा किया है कि लोगों को वर्षों से यह बताया जाता रहा है कि ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में कराया था और यह प्रेम का प्रतीक है। हालांकि, उनका कहना है कि यह दावा सही नहीं है और ताजमहल मूल रूप से ‘तेजो महालय’ नाम का एक प्राचीन हिंदू मंदिर था।

हरिशंकर जैन ने कहा कि उनके पास अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर ताजमहल के इतिहास को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, इस दावे को लेकर इतिहासकारों और सरकारी एजेंसियों की राय अलग है।

क्या है हरिशंकर जैन का दावा?

वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन का कहना है कि जिस इमारत को आज ताजमहल कहा जाता है, वह पहले ‘तेजो महालय’ नाम का एक शिव मंदिर था। उनके अनुसार इसका निर्माण वर्ष 1156 ईस्वी में राजा परमार देव ने कराया था। उनका दावा है कि बाद में मुगल शासन के दौरान इस भवन का स्वरूप बदल दिया गया और इसे ताजमहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस संबंध में ऐतिहासिक दस्तावेज और अन्य प्रमाण मौजूद हैं, जिनके आधार पर वह अपने दावे को सही मानते हैं।

यह दावा नया नहीं है

ताजमहल को लेकर इस तरह के दावे पहली बार सामने नहीं आए हैं। पिछले कई वर्षों से कुछ लोग और संगठन यह कहते रहे हैं कि ताजमहल पहले एक हिंदू मंदिर था। इस विषय पर कई बार अदालतों में याचिकाएं भी दायर की गईं, जिनमें ताजमहल के बंद कमरों को खोलकर वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच कराने की मांग की गई।

हालांकि, अब तक किसी भी अदालत ने इन दावों को स्वीकार करते हुए ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे यह साबित हो सके कि ताजमहल किसी मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

ASI और इतिहासकारों का क्या कहना है?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अधिकांश इतिहासकारों का मत है कि ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में कराया था।

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार ताजमहल का निर्माण वर्ष 1632 में शुरू हुआ और लगभग 1653 में पूरा हुआ। इतिहासकारों के मुताबिक इसके निर्माण में हजारों कारीगरों और शिल्पकारों ने हिस्सा लिया था।

ASI ने विभिन्न मामलों में अदालतों के समक्ष यह भी कहा है कि उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेख, शिलालेख, फारसी दस्तावेज और अन्य प्रमाण ताजमहल के निर्माण को शाहजहाँ के काल से जोड़ते हैं।

अदालतों में भी उठ चुका है मामला

पिछले कुछ वर्षों में ताजमहल को लेकर कई याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट और अन्य अदालतों में दायर की गईं। इनमें ताजमहल के बंद कमरों को खोलने, वैज्ञानिक जांच कराने और इतिहास की पुनः समीक्षा की मांग की गई थी।

हालांकि, अदालतों ने अधिकांश मामलों में यह कहते हुए राहत देने से इनकार किया कि केवल दावों या मान्यताओं के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि इतिहास का अध्ययन शोध और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।

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इतिहास और दावों के बीच जारी बहस

भारत जैसे विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक देश में कई स्मारकों को लेकर समय-समय पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। ताजमहल भी ऐसा ही एक स्मारक है, जिस पर वर्षों से बहस चल रही है।

एक पक्ष इसे मुगलकालीन स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल और विश्व धरोहर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसके मूल स्वरूप को लेकर अलग राय रखता है। अब तक उपलब्ध आधिकारिक अभिलेख और पुरातात्विक रिकॉर्ड ताजमहल को शाहजहाँ द्वारा निर्मित मकबरे के रूप में ही दर्शाते हैं।

क्या दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक किए गए हैं?

हरिशंकर जैन ने अपने बयान में दस्तावेजी प्रमाण होने की बात कही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक ऐसे प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से जांच या पुष्टि हो चुकी हो। ऐसे में उनके दावे की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

ताजमहल का ऐतिहासिक महत्व

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शामिल है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी दर्ज है। हर वर्ष लाखों भारतीय और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत भारतीय पर्यटन की सबसे प्रमुख पहचान मानी जाती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के ताजा बयान ने ताजमहल को लेकर पुरानी बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने दावा किया है कि ताजमहल मूल रूप से ‘तेजो महालय’ नाम का हिंदू मंदिर था और उनके पास इसके समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), अधिकांश इतिहासकार और उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेख ताजमहल को शाहजहाँ द्वारा निर्मित मकबरा बताते हैं।

ऐसे मामलों में किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले उसके समर्थन में उपलब्ध प्रमाणों, न्यायालयों के निष्कर्षों और संबंधित विशेषज्ञों की राय को देखना आवश्यक है। फिलहाल, हरिशंकर जैन का यह दावा सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

The debate over whether the Taj Mahal was originally a Hindu temple called Tejo Mahalaya has resurfaced after senior advocate Harishankar Jain reiterated his claims. The controversy involves historical interpretations, legal petitions, the Archaeological Survey of India (ASI), and the widely accepted view that the Taj Mahal was built by Mughal emperor Shah Jahan in memory of Mumtaz Mahal. Read the latest update, legal developments, historical evidence, and expert opinions surrounding the Taj Mahal controversy.

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