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एआई वीडियो को लेकर बड़ा सियासी बवाल: रागिनी नायक और बीजेपी आमने-सामने!

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AIN NEWS 1: कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक तकरार अक्सर सोशल मीडिया पर देखने को मिलती रही है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। 2 दिसंबर को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रागिनी नायक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक AI-Generated वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बहस, आलोचना और आरोप-प्रत्यारोप की नई आग भड़का दी।

इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को एक शानदार रेड कारपेट इवेंट में चाय बेचते हुए दिखाया गया है। उनके हाथ में चाय की केतली और ग्लास नजर आते हैं, और बैकग्राउंड में कई देशों के अंतरराष्ट्रीय झंडे दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में एक AI-जनरेटेड ऑडियो भी सुनाई देता है, जिसमें आवाज आ रही है—“चाय बोलो, चाय…”

वीडियो पर नज़र डालने भर से स्पष्ट हो जाता है कि यह एक AI-आधारित क्रिएशन है, जो सोशल मीडिया ट्रेंड्स का हिस्सा होते हुए भी राजनीतिक चिंगारी भड़काने के लिए काफी साबित हुआ।

बीजेपी की कड़ी प्रतिक्रिया—‘चायवाला बैकग्राउंड का मज़ाक’

वीडियो सामने आते ही बीजेपी ने इसकी तीखी आलोचना की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस, खासकर उसकी “एलीट सोच”, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सामान्य परिवार से आने वाली पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाती रहती है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस वीडियो को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की। उनका कहना था कि कांग्रेस बार-बार यह साबित करती है कि वह एक ऐसे प्रधानमंत्री को स्वीकार नहीं कर पाती जो OBC समुदाय से आते हैं और जिन्होंने अपनी जिंदगी की शुरुआत चाय बेचकर की थी।

पूनावाला ने कहा कि यह वीडियो सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि “कांग्रेस की मानसिकता” का एक और उदाहरण है। उनके अनुसार विपक्ष की बड़ी समस्या यह है कि उसे ऐसा नेता स्वीकार ही नहीं हो पाता जिसने संघर्षों से आगे बढ़कर दुनिया में भारत की छवि बदल दी है।

बीजेपी के बड़े नेताओं ने भी दावा किया कि यह वीडियो समाज के एक बड़े तबके, खासकर गरीब और साधारण वर्ग से आने वाले लोगों का भी अपमान करता है।

कांग्रेस की सफाई—‘यह व्यंग्य है, निजी हमले नहीं’

हालांकि रागिनी नायक ने वीडियो को अपने आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट किया था, पर कांग्रेस के भीतर से स्पष्ट रूप से यह रुख सामने आया कि यह एक व्यंग्यात्मक प्रस्तुति थी। कांग्रेस का तर्क है कि जब सत्ता पक्ष रोज़ AI आधारित वीडियो, मीम और एनिमेटेड पोस्टर के माध्यम से विपक्ष पर हमला करता है तो एक हल्का-फुल्का व्यंग्य भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा होना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि बीजेपी हर मुद्दे पर “पीड़ित कार्ड” खेलती है और हर आलोचना को प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जोड़ देती है। उनका कहना है कि यह वीडियो सरकार की नीतियों और प्रचार शैली पर व्यंग्य है, किसी वर्ग या समुदाय का अपमान नहीं।

सोशल मीडिया पर बंटे हुए नजर आए लोग

जैसा कि अक्सर होता है, सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया।

एक वर्ग ने इस वीडियो को क्रिएटिव व्यंग्य बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक अभिव्यक्ति का एक हिस्सा है।

वहीं दूसरा वर्ग इसे प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत संघर्षों और चायवाला पहचान का अपमान मान रहा है।

कई लोगों ने यह भी कहा कि AI तकनीक का इस्तेमाल अब राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर रहा है, जिसका भविष्य कई तरह की चुनौतियाँ लेकर आ रहा है। सरकार पहले ही AI आधारित डीपफेक कंटेंट को लेकर चिंता जता चुकी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इस दिशा में नए नियमों पर काम कर रहे हैं।

एआई वीडियो राजनीति में कितना सही? एक बढ़ती हुई बहस

यह पहली बार नहीं है जब AI वीडियो ने राजनीति में मुद्दा खड़ा किया है।

तकनीक जितनी तेजी से आम लोगों के हाथों में पहुंच रही है, उतनी ही तेजी से इसके खतरे भी बढ़ रहे हैं।

डीपफेक से लोगों की छवि खराब की जा सकती है

जनता को गलत जानकारी दी जा सकती है

चुनावों में झूठे नैरेटिव बनाए जा सकते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में AI आधारित वीडियो का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया सभी को मिलकर काम करना होगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीतिक दल AI का इस्तेमाल किस सीमा तक और किस जिम्मेदारी के साथ करेंगे।

मुद्दा पृष्ठभूमि का या राजनीति की गरिमा का?

बीजेपी इस वीडियो को प्रधानमंत्री की पृष्ठभूमि पर हमला बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे व्यंग्य कह रही है।

लेकिन असल सवाल यह है कि क्या राजनीतिक पार्टियों को इस स्तर पर जाने की जरूरत है?

क्या नेताओं की आलोचना उनके काम और नीतियों पर नहीं होनी चाहिए?

क्या सोशल मीडिया अब सिर्फ मज़ाक, मीम और चुटकुलों का मैदान बनता जा रहा है?

कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे मामलों की आवृत्ति बढ़ जाती है और पार्टियाँ हर छोटे मुद्दे को बड़ा बनाकर लोगों की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं।

एक वीडियो और दो तरह की सियासत

रागिनी नायक द्वारा पोस्ट किया गया AI वीडियो भले ही व्यंग्य के तौर पर बनाया गया हो, पर इसकी राजनीतिक प्रतिक्रिया अंदाज़ से कहीं ज्यादा तीखी रही।

बीजेपी ने इसे कांग्रेस की “एलीट मानसिकता” बताया

कांग्रेस ने कहा यह सिर्फ हास्य-व्यंग्य है

जनता दो हिस्सों में बंट गई

और सोशल मीडिया पर दिन भर बहस चलती रही

यह घटना एक बड़ी याद दिलाती है—कि AI आने वाले समय में राजनीति को उतना ही बदलने वाला है, जितना सोशल मीडिया ने पिछले दशक में बदला है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार तकनीक न सिर्फ माहौल बदलेगी, बल्कि सच और झूठ की पहचान को भी चुनौती देने वाली है।

This controversy over the AI-generated video of PM Narendra Modi, shared by Congress leader Ragini Nayak, highlights the growing tension between political parties in India and the rising influence of AI deepfakes. The BJP accused the Congress of mocking Modi’s tea-seller background, while the Congress defended it as satire. As AI-generated content becomes more common, concerns over misinformation, political manipulation, and social media misuse continue to grow, making this issue crucial for India’s political and digital landscape.

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