AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले के बयान का समर्थन किया है। भागवत ने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना भविष्य के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि अन्याय और अत्याचार को समाप्त करते हुए सकारात्मक चीजों को बचाए रखना भी है।
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा विवाद, आतंकवाद और आपसी अविश्वास जैसे मुद्दों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ऐसे माहौल में RSS प्रमुख का यह बयान राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भागवत ने दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान का बचाव किया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखने की बात कही थी। भागवत ने कहा कि यदि भविष्य में भारत को पाकिस्तान को पूरी तरह हराना है, तो इसके लिए वहां के लोगों के साथ भी एक दृष्टिकोण रखना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लोगों और वहां की नीतियों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव किसी को नष्ट करने वाला नहीं रहा है। भागवत ने अपनी बात रखते हुए कहा, “हम हिटलर जैसे नहीं हैं। यह हमारा स्वभाव या तरीका नहीं है।” उनके अनुसार भारत की सोच हमेशा से संतुलन और न्याय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों और अत्याचार का विरोध किया जाना चाहिए, लेकिन जो अच्छा है उसे बचाने की कोशिश भी होनी चाहिए।
RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि किसी समस्या का स्थायी समाधान केवल संघर्ष से नहीं निकलता, बल्कि कई बार संवाद और समझ के माध्यम से भी रास्ते तलाशे जाते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि बातचीत का मतलब किसी भी प्रकार का समझौता या कमजोरी नहीं है। भारत को अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और हितों को प्राथमिकता देते हुए हर कदम उठाना चाहिए।
दत्तात्रेय होसबोले के बयान पर विवाद
दरअसल, RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। होसबोले ने कहा था कि भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार बातचीत के रास्ते खुले रहने चाहिए। उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
कुछ लोगों ने इसे कूटनीतिक सोच बताया, जबकि कुछ आलोचकों ने सवाल उठाए कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता किन परिस्थितियों में अपनाया जाना चाहिए। इसके बाद मोहन भागवत ने सामने आकर होसबोले के बयान का समर्थन किया और संघ की सोच को स्पष्ट किया।
भारत की नीति और बातचीत का महत्व
भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। भारतीय नीति के अनुसार पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधार के लिए सीमा पार आतंकवाद पर रोक जरूरी है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बातचीत को एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
मोहन भागवत के बयान से यह संकेत मिलता है कि RSS भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संवाद की संभावना को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी संघर्ष का समाधान इस तरह होना चाहिए जिससे लंबे समय में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
“जीत” का मतलब केवल सैन्य सफलता नहीं
भागवत ने अपने बयान में जीत की परिभाषा को भी अलग नजरिए से रखा। उन्होंने कहा कि किसी देश को हराने का अर्थ केवल सैन्य रूप से कमजोर करना नहीं होता, बल्कि वहां ऐसी परिस्थितियां बनाना भी होता है जहां शांति और स्थिरता कायम रह सके।
उनके अनुसार भारत की सभ्यता की सोच केवल बदला लेने की नहीं रही है। भारत हमेशा से न्याय, संतुलन और मानवता की बात करता आया है। इसलिए किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी विकल्प खुले रखने चाहिए।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
मोहन भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RSS जैसे प्रभावशाली संगठन के प्रमुख का यह बयान भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर व्यापक चर्चा को जन्म दे सकता है। हालांकि भारत सरकार की विदेश नीति के फैसले सरकार के स्तर पर लिए जाते हैं, लेकिन संघ प्रमुख के विचारों को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मोहन भागवत का बयान इस बात पर केंद्रित है कि भारत को अपनी सुरक्षा और सम्मान बनाए रखते हुए भविष्य के लिए सभी रास्ते खुले रखने चाहिए। उन्होंने बातचीत को कमजोरी नहीं बल्कि रणनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया। पाकिस्तान के साथ संबंधों में आगे क्या बदलाव आते हैं, यह दोनों देशों की नीतियों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन RSS प्रमुख के इस बयान ने एक बार फिर पड़ोसी देश के साथ रिश्तों को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है।
RSS Chief Mohan Bhagwat has defended Dattatreya Hosabale’s statement on maintaining a dialogue option with Pakistan. Bhagwat said India should keep peaceful solutions open while strongly opposing injustice and terrorism. His remarks highlight the RSS perspective on India Pakistan relations, diplomacy, national security, and future peace initiatives. The statement has sparked discussion across political circles about dialogue, strategic options, and India’s approach toward its neighboring country.


















