देवबंद में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पर प्रशासन का शिकंजा, मस्जिद, मदरसा और मजार से जुड़े 11 मामलों में नोटिस जारी
सहारनपुर | AIN NEWS 1 उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जों के खिलाफ तहसील प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने मस्जिद, मदरसा और मजार से जुड़े कुल 11 मामलों में कानूनी प्रक्रिया तेज करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। सभी पक्षकारों को 13 जुलाई तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो प्रशासन एकपक्षीय (Ex-Parte) कार्रवाई कर सकता है।
यह कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों की जांच राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है तथा पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर अपनाई जाएगी।

किन मामलों में हुई कार्रवाई?
प्राप्त जानकारी के अनुसार देवबंद तहसील प्रशासन ने कुल 11 मामलों को चिन्हित किया है। इनमें सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे, सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निर्माण और अन्य राजस्व संबंधी विवाद शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि इन मामलों में—
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े कई मामलों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।
कुछ मामले सार्वजनिक संपत्ति से संबंधित कानूनों के तहत दर्ज किए गए हैं।
कुछ प्रकरण न्यायालयों में विचाराधीन हैं, जिन पर विधिक प्रक्रिया जारी है।
प्रशासन ने सभी संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
13 जुलाई तक मांगा गया जवाब
तहसील प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित पक्ष 13 जुलाई तक आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ अपना जवाब प्रस्तुत करें। यदि निर्धारित तिथि तक कोई जवाब प्राप्त नहीं होता है तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लिया जा सकता है।
प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए पहले सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का क्या कहना है?
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्थान पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी धार्मिक स्थल या संस्था के खिलाफ कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं बल्कि केवल भूमि के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों के आधार पर की जा रही है। यदि संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें भी जांच के दौरान पूरा अवसर दिया जाएगा।
राजस्व रिकॉर्ड की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार सभी संबंधित स्थानों के राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी, नक्शा और अन्य सरकारी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जहां कहीं भी सरकारी भूमि पर निर्माण होने की शिकायत मिली है, वहां विधिक प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि संबंधित निर्माण वैध हैं या नहीं।
कानून के तहत होगी आगे की कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में प्रशासन पहले नोटिस जारी करता है, उसके बाद संबंधित पक्षों की आपत्तियां और दस्तावेज देखे जाते हैं। यदि दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो अतिक्रमण हटाने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसी प्रक्रिया का पालन देवबंद में भी किया जा रहा है। फिलहाल यह मामला नोटिस और सुनवाई के चरण में है तथा अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
देवबंद में इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की नजर अब आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। संबंधित पक्ष अपने दस्तावेज तैयार करने में जुट गए हैं ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रख सकें।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप की जाएगी।
अंतिम स्थिति
फिलहाल प्रशासन द्वारा केवल नोटिस जारी किए गए हैं और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। 13 जुलाई के बाद प्राप्त जवाबों और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी पक्ष की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो प्रशासन एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए आवश्यक कानूनी कदम उठा सकता है।
(नोट: यह कार्रवाई वर्तमान में नोटिस और जांच की प्रक्रिया में है। अभी किसी निर्माण को अवैध घोषित करने या हटाने का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद लिया जाएगा।)
The Deoband administration in Saharanpur has launched legal proceedings against alleged illegal encroachments on government land, issuing notices in 11 cases involving mosques, madrasas, and mazars. Authorities have asked all concerned parties to submit their responses by July 13, failing which ex-parte legal action may be initiated. The administration has clarified that the proceedings are based on revenue records and applicable laws, ensuring due legal process before any final decision. This development has drawn significant attention across Uttar Pradesh, making it an important update in the ongoing drive against illegal government land encroachment.


















