गोंडा में रिश्वतखोरी पर DIG का सख्त रुख, SHO को लगाई फटकार, बोले- “रिश्वत के पैसे वापस कराओ, नहीं तो होगी कार्रवाई”
AIN NEWS 1 गोंडा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां देवीपाटन रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) अशोक कुमार शुक्ला ने जनसुनवाई के दौरान एक शिकायत सुनने के बाद तरबगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) को फोन पर जमकर फटकार लगाई। शिकायत थी कि थाने में तैनात एक दरोगा ने चार्जशीट लगाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत ली, लेकिन बाद में मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रिश्वत लेने के बावजूद न तो कार्रवाई हुई और न ही उसके पैसे वापस किए गए।
इस पूरे मामले का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें DIG का सख्त रवैया साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि DIG के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक उसे उसके 30 हजार रुपये वापस नहीं मिले हैं।

जनसुनवाई में पहुंचा पीड़ित, सुनाई पूरी आपबीती
जानकारी के अनुसार, तरबगंज थाना क्षेत्र के मन्नीपुर गांव निवासी किंग उपाध्याय 9 जुलाई 2026 को देवीपाटन रेंज के DIG कार्यालय पहुंचे थे। उस दिन DIG अशोक कुमार शुक्ला आम जनता की शिकायतें सुन रहे थे।
किंग उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में अपने साथ हुई मारपीट और वाहन तोड़फोड़ के मामले में पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच की जिम्मेदारी दरोगा ओम प्रकाश यादव के पास थी। आरोप है कि दरोगा ने मुकदमे में चार्जशीट लगाने के लिए उनसे 30 हजार रुपये की मांग की।
पीड़ित का कहना है कि न्याय मिलने की उम्मीद में उन्होंने फरवरी 2026 में यह रकम दरोगा को दे दी। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि चार्जशीट लगाने के बजाय पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
पैसे वापस मांगने पर भी नहीं मिला जवाब

किंग उपाध्याय ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, तो उन्होंने दरोगा से अपने पैसे वापस मांगे।
उन्होंने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल नहीं उठाई गई। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप पर लगातार संदेश भेजे और रिश्वत के पैसे लौटाने की मांग की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दरोगा ने एक बार जवाब दिया कि वह बहराइच ड्यूटी पर हैं और लौटकर पैसे वापस कर देंगे। लेकिन इसके बाद भी करीब दो महीने तक न तो पैसे लौटाए गए और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला।
व्हाट्सएप चैट देखकर भड़के DIG
जनसुनवाई के दौरान किंग उपाध्याय ने DIG को व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी दिखाए। इन संदेशों में वह लगातार अपने पैसे वापस मांगते नजर आ रहे थे।

इन चैट को देखने के बाद DIG अशोक कुमार शुक्ला ने तुरंत तरबगंज थाने के SHO को फोन लगाया।
फोन पर उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि थाने में इस तरह रिश्वत लेकर काम किया जा रहा है तो इसकी जिम्मेदारी केवल दरोगा की नहीं बल्कि थाना प्रभारी की भी बनती है।
SHO से बोले- “थाने में क्या कर रहे हैं आप?”
फोन पर बातचीत के दौरान DIG ने कहा कि यदि किसी दरोगा ने चार्जशीट लगाने के नाम पर 30 हजार रुपये लिए हैं और बाद में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने SHO को निर्देश दिया कि पहले मुकदमे की मेरिट की जांच करें। यदि चार्जशीट बनती है तो विधिक कार्रवाई करें और यदि रिश्वत ली गई है तो शिकायतकर्ता के पैसे तुरंत वापस कराएं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पैसे वापस नहीं कराए गए तो संबंधित दरोगा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर जेल भी भेजा जाएगा।
DIG ने SHO से यह भी पूछा कि यदि थाना क्षेत्र में इस तरह भ्रष्टाचार हो रहा था तो थाना प्रभारी क्या कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी तो SHO के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई और निलंबन किया जा सकता है।
DIG ने जताई नाराजगी
फोन पर बातचीत के दौरान DIG ने यह भी कहा कि यदि दरोगा निर्दोष होता तो व्हाट्सएप पर पैसे वापस मांगने वाले संदेशों का जवाब देता और पूछता कि किस पैसे की बात हो रही है।
लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार दरोगा लगातार चुप रहा, जिससे प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध दिखाई देता है।
DIG ने साफ कहा कि पुलिस विभाग की छवि ऐसे मामलों से खराब होती है और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या था मूल विवाद?
पीड़ित किंग उपाध्याय के मुताबिक, 23 जनवरी 2026 को गांव के ही एक व्यक्ति ने उनकी कार में तोड़फोड़ की थी। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी हुई।
उन्होंने इस मामले में पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया और उम्मीद की कि जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी।
लेकिन आरोप है कि जांच अधिकारी ने कार्रवाई के नाम पर उनसे रिश्वत ले ली और बाद में मामले को फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया।
वीडियो सामने आने के बाद बढ़ी चर्चा
हालांकि यह घटना 9 जुलाई की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो अब सार्वजनिक हुआ है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि जब स्वयं DIG ने रिश्वत लौटाने के निर्देश दिए, तब भी यदि शिकायतकर्ता को पैसे नहीं मिले हैं तो विभागीय कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी।
अब तक पैसे नहीं लौटने का दावा
शिकायतकर्ता का कहना है कि DIG के हस्तक्षेप और सख्त निर्देशों के बावजूद अभी तक उसे उसके 30 हजार रुपये वापस नहीं मिले हैं।
मामले को लेकर पुलिस विभाग की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
यदि जांच में रिश्वत लेने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
पुलिस की साख पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों को न्याय दिलाना होता है और ऐसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता जनता का भरोसा बढ़ाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ता को वास्तव में न्याय मिलेगा, क्या कथित रिश्वत की रकम वापस होगी और क्या आरोपित पुलिसकर्मी के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में विभागीय जांच और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
The Gonda DIG bribery case has sparked widespread attention after a complainant alleged that a Uttar Pradesh Police Sub Inspector accepted Rs 30,000 to file a charge sheet but later submitted a final report instead. During a public hearing, DIG Ashok Kumar Shukla strongly reprimanded the Tarabganj SHO, ordered an immediate refund of the alleged bribe, and warned of strict departmental action. The incident has raised serious concerns about police corruption, accountability, transparency, and law enforcement in Uttar Pradesh, making it one of the most discussed Gonda News stories


















