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अकृति चौधरी NSA केस में नया मोड़, हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी यूपी सरकार; DM मेधा रूपम भी जाएंगी SC

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AIN NEWS 1 नोएडा/प्रयागराज। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अकृति की NSA हिरासत रद्द किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करेगी।

इस मामले में गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम भी अलग से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी। हाईकोर्ट ने अकृति की हिरासत के मामले में डीएम की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे और अधिकारियों के कामकाज को लेकर कड़ी टिप्पणियां की थीं।

हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को रद्द की थी NSA हिरासत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने 2 सितंबर 2026 को अकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था। अदालत ने माना कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में रखने के लिए पेश की गई सामग्री पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं थी।

अदालत ने निर्देश दिया था कि अगर अकृति किसी दूसरे मामले में आवश्यक नहीं हैं तो उन्हें रिहा किया जाए। इसी फैसले में हाईकोर्ट ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया था।

अदालत ने कहा था कि यह रकम संबंधित अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए। आदेश में गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम के वेतन से भी राशि वसूलने की बात कही गई थी। इसके अलावा उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए थे, जिनकी रिपोर्ट या कार्रवाई के आधार पर अकृति के खिलाफ NSA की कार्रवाई आगे बढ़ी।

पुलिस रिपोर्ट में पर्याप्त सामग्री नहीं मिलने पर सवाल

अकृति चौधरी की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट और उसके आधार पर की गई NSA कार्रवाई की जांच की।

अदालत का कहना था कि रिकॉर्ड में ऐसी विश्वसनीय सामग्री नहीं दिखाई गई, जिसके आधार पर अकृति को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे कड़े कानून के तहत हिरासत में रखना उचित ठहराया जा सके।

हाईकोर्ट ने प्रशासन से यह अपेक्षा जताई कि NSA जैसे कठोर प्रावधान का इस्तेमाल करने से पहले उपलब्ध रिकॉर्ड की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए थी। अदालत ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी को केवल पुलिस रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्तर पर भी सामग्री की जांच करनी चाहिए थी।

इसी संदर्भ में अदालत ने डीएम मेधा रूपम के आचरण पर बेहद सख्त टिप्पणी की।

डीएम के फैसले पर हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी

फैसले में हाईकोर्ट ने अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने साफ किया कि IAS और IPS अधिकारियों की प्राथमिक निष्ठा संविधान के प्रति होती है।

अदालत ने कहा कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। यदि अधिकारी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करते हैं और केवल राजनीतिक कार्यपालिका के अनुरूप काम करते दिखाई देते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट ने यहां तक चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक ज्यादतियों पर न्यायिक निगरानी और कार्रवाई कमजोर पड़ती है तो राज्य के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसी दौरान अदालत ने ‘Orwellian Dystopia’ जैसे कड़े शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

अप्रैल में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

अकृति चौधरी का मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए औद्योगिक श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव और आगजनी के आरोपों को लेकर पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

अकृति चौधरी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई।

सरकार और पुलिस की ओर से अकृति की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि, जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने यह जांचना शुरू किया कि NSA के तहत हिरासत के लिए वास्तव में कितनी ठोस और विश्वसनीय सामग्री मौजूद थी।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित पथराव और आगजनी से संबंधित वीडियो और अन्य सामग्री को लेकर भी सवाल किए थे। अदालत की जांच के बाद NSA हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया।

NSA क्या है और यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी National Security Act एक ऐसा कानून है जिसके तहत सरकार किसी व्यक्ति को कुछ परिस्थितियों में बिना सामान्य आपराधिक मुकदमे के निरोधात्मक हिरासत में रख सकती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं से जुड़े गंभीर खतरों को रोकना है।

हालांकि, NSA एक बेहद कठोर कानून है। इसलिए अदालतें यह देखती हैं कि इसके इस्तेमाल के पीछे पर्याप्त कानूनी आधार और विश्वसनीय सामग्री मौजूद है या नहीं।

अकृति चौधरी के मामले में हाईकोर्ट का पूरा जोर इसी सवाल पर रहा कि क्या उपलब्ध सामग्री NSA के तहत हिरासत के लिए आवश्यक कानूनी मानक को पूरा करती थी।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार यह दलील रख सकती है कि हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री और प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णय का सही मूल्यांकन नहीं किया।

दूसरी तरफ अकृति चौधरी की ओर से हाईकोर्ट के फैसले का बचाव किया जाएगा और यह तर्क दिया जा सकता है कि NSA की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।

मेधा रूपम की ओर से भी अलग अपील दाखिल किए जाने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी गई है। इसका अर्थ है कि अब इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी की व्यक्तिगत भूमिका से जुड़े हाईकोर्ट के निष्कर्ष भी सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में आ सकते हैं।

अकृति की रिहाई को लेकर जरूरी बात

इस मामले में एक बात स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। हाईकोर्ट ने NSA के तहत अकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी है और अन्य किसी मामले में जरूरत नहीं होने पर उनकी रिहाई का निर्देश दिया है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद वह उसी NSA आदेश के तहत लगातार हिरासत में हैं। अगर उनके खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई या हिरासत है, तो वह NSA की हिरासत से अलग विषय है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

अब इस पूरे मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA हिरासत रद्द करने में कानून और उपलब्ध रिकॉर्ड का सही इस्तेमाल किया या नहीं।

साथ ही हाईकोर्ट की ओर से डीएम और अन्य अधिकारियों के खिलाफ की गई कड़ी टिप्पणियों तथा 5 लाख रुपये के मुआवजे से जुड़े निर्देशों पर भी आगे कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल इतना तय है कि अकृति चौधरी का NSA मामला अब केवल नोएडा प्रशासन या इलाहाबाद हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में बदल गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से तय होगा कि हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियां और NSA हिरासत रद्द करने का फैसला आगे कायम रहता है या उसमें कोई बदलाव होता है।

Aakriti Chaudhary NSA case has taken a new turn after the Uttar Pradesh government decided to challenge the Allahabad High Court order in the Supreme Court. The High Court had quashed Aakriti Chaudhary’s NSA detention and ordered ₹5 lakh compensation while making strong remarks about Noida DM Medha Rupam and the administrative process. The case is linked to the April 2026 Noida industrial workers’ protest and raises important legal questions about preventive detention under the National Security Act, administrative accountability and constitutional duties of IAS and IPS officers.

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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