AIN NEWS 1 | उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र से सामने आया पति की हत्या का मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी पत्नी रूबी द्वारा कथित तौर पर बताए गए घटनाक्रम ने सभी को हैरान कर दिया है।
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने पहले अपने पति को खीर में बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां मिलाकर खिलाईं। इसके बाद उसकी हत्या कर दी और शव को घर के बाथरूम में पहले से तैयार गड्ढे में दफना दिया। इतना ही नहीं, किसी को शक न हो इसलिए बाद में बाथरूम के फर्श पर सीमेंट का प्लास्टर भी करवा दिया गया।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के बयान की पुष्टि अभी फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
#आगरा में खौफनाक वारदात#रूबी ने अपने पति सुरेंद्र की हत्या कर दी, शव को बाथरूम के फर्श के नीचे छिपा दिया और उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
45 दिन बाद पुलिस ने शव बरामद किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। #Agra #husbandmurder #rubi #Uttarpradesh pic.twitter.com/rF0nxTkIlN
— Ravi Pandey🇮🇳 (@ravipandey2643) July 3, 2026
क्या है पूरा मामला?
मृतक की पहचान 44 वर्षीय सुरेंद्र कुमार शर्मा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले थे। वह आगरा के रेनुका धाम कॉलोनी में अपनी पत्नी रूबी, मां कमला देवी और दो बेटियों के साथ रहते थे।
परिवार के अनुसार, 18 मई 2026 से सुरेंद्र अचानक लापता हो गए थे। कई दिनों तक उनका कोई पता नहीं चला तो 26 मई को उनके बड़े भाई अनिल शर्मा ने सिकंदरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
शुरुआत में किसी को अंदाजा भी नहीं था कि जिस घर में सुरेंद्र रहते थे, उसी घर के बाथरूम के नीचे उनका शव दबा हो सकता है।
पुलिस पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान रूबी ने कथित तौर पर बताया कि उसने पहले खीर में 15 से 16 नींद की गोलियां मिलाकर अपने पति को खिलाईं।
आरोप है कि जब सुरेंद्र बेहोश हो गए तो उनकी हत्या कर दी गई। अगले दिन आरोपी ने शव को अकेले ही बाथरूम तक घसीटा, जहां पहले से गड्ढा तैयार किया गया था।
इसके बाद शव को गड्ढे में दफनाकर ऊपर मिट्टी डाली गई और जमीन समतल कर दी गई।
बाथरूम का फर्श क्यों बनवाया गया?
पुलिस के मुताबिक, शव को छिपाने के लिए आरोपी ने बाद में एक मिस्त्री को बुलाया।
मिस्त्री से कहा गया कि बाथरूम का फर्श ऊंचा करना है। इसके बाद पूरे फर्श पर सीमेंट का नया प्लास्टर कर दिया गया, ताकि किसी को नीचे शव होने का शक न हो।
यही वजह रही कि कई दिनों तक घर में रहने वाले लोगों और आसपास के लोगों को भी इस घटना की भनक नहीं लगी।
परिवार को कैसे हुआ शक?
मृतक के बड़े भाई अनिल शर्मा के अनुसार, 18 मई की सुबह रूबी का फोन आया था। उसने कहा कि घर में पुलिस का मामला हो गया है, इसलिए मां और दोनों बच्चियों को अपने साथ ले जाएं।
उसने यह भी कहा कि घर के अंदर आने की जरूरत नहीं है और बच्चों को बाहर से ही ले जाएं।
बाद में रूबी ने बताया कि सुरेंद्र घर छोड़कर कहीं चले गए हैं और दो-तीन दिन में लौट आएंगे।
लेकिन समय बीतने के बावजूद जब सुरेंद्र वापस नहीं आए, तो परिवार का शक बढ़ने लगा।
पुलिस को भी गुमराह करने का आरोप
जांच के दौरान रूबी लगातार यही दावा करती रही कि उसका पति घर छोड़कर चला गया है।
पुलिस के अनुसार, वह जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज भी देखती रही, पति के लापता होने पर दुख जताती रही और अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान देती रही।
जांच अधिकारियों का मानना है कि इससे जांच की दिशा प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि भी जांच के बाद ही होगी।
कब हुआ बड़ा खुलासा?
परिजनों के अनुसार, कई दिनों तक पूछताछ के बाद अनिल शर्मा ने रूबी से कहा कि यदि कोई परेशानी है तो सच बता दे।
इसी बातचीत के दौरान रूबी कथित तौर पर टूट गई और उसने बताया कि सुरेंद्र का शव बाथरूम के नीचे दबा हुआ है।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
बाथरूम का फर्श तोड़ा गया तो उसके नीचे से मानव अवशेष बरामद हुए। शव काफी हद तक गल चुका था, इसलिए पुलिस ने अवशेषों को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।
फोरेंसिक जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले में सबसे अहम भूमिका अब फोरेंसिक रिपोर्ट की होगी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं—
- मौत की वास्तविक वजह क्या थी?
- क्या वास्तव में नींद की गोलियों का इस्तेमाल किया गया था?
- हत्या कब हुई?
- घटनास्थल से मिले सबूत आरोपी के बयान से मेल खाते हैं या नहीं?
फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
आरोपी ने क्या सफाई दी?
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान रूबी ने यह भी दावा किया कि उसका पति शराब पीता था, उसके साथ मारपीट करता था और कोई काम नहीं करता था।
उसका कहना था कि घर का खर्च उसकी सास की सरकारी पेंशन से चलता था।
हालांकि, पुलिस इन दावों की भी स्वतंत्र जांच कर रही है। फिलहाल इन्हें सत्यापित तथ्य नहीं माना गया है।
पुलिस की जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित?
जांच एजेंसियां फिलहाल कई पहलुओं की जांच कर रही हैं—
- कथित कबूलनामे की सत्यता।
- पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट।
- नींद की गोलियों की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड।
- घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्य।
- परिवार और पड़ोसियों के बयान।
- मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल सबूत।
अभी जांच जारी
आगरा के इस चर्चित हत्याकांड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस पूछताछ में आरोपी द्वारा कथित रूप से बताए गए घटनाक्रम ने मामले को और गंभीर बना दिया है, लेकिन कानून के अनुसार किसी भी आरोपी का पुलिस के समक्ष दिया गया बयान अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
मामले की वास्तविक तस्वीर फोरेंसिक जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अदालत में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी जोड़ने में जुटी है और जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हत्या की पूरी साजिश कैसे रची गई और इसमें क्या-क्या परिस्थितियां शामिल थीं।


















