हरिद्वार में अखाड़ा परिषद का यति नरसिंहानंद गिरी को समर्थन, गुरु के लक्ष्य के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान
AIN NEWS 1 हरिद्वार/गाजियाबाद: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के शीर्ष संतों की मौजूदगी में हरिद्वार स्थित आनंद भैरव मंदिर में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी और राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत स्वामी हरिगिरी ने नवनियुक्त महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान सनातन धर्म, संत समाज की भूमिका और धार्मिक गतिविधियों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। कार्यक्रम में मौजूद संतों ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि धर्म और संत समाज के हितों की रक्षा के लिए परिषद आगे भी सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।
यति नरसिंहानंद गिरी ने संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि वह अपने गुरु द्वारा बताए गए लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और जीवन की अंतिम सांस तक उसी दिशा में कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिन विचारों और विचारधाराओं का वह विरोध करते रहे हैं, उनके खिलाफ उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी परिस्थिति में वह अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने कहा कि उनके लिए यह केवल व्यक्तिगत विचार नहीं बल्कि गुरु की आज्ञा और जीवन का संकल्प है। इसी कारण वह लगातार अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अखाड़ा परिषद ने हर स्तर पर सहयोग का दिया भरोसा
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत स्वामी हरिगिरी ने कहा कि यति नरसिंहानंद गिरी लंबे समय से सनातन धर्म की रक्षा और उससे जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हैं। परिषद उनके कार्यों में हर स्तर पर सहयोग और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत यति नरसिंहानंद गिरी की शिष्या यति मां प्रत्यंगिरा गिरी को महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को और अधिक संगठित रूप से आगे बढ़ाया जा सके तथा अभियान को नई ऊर्जा मिल सके।
स्वामी हरिगिरी ने कहा कि संत समाज का उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य करना है।
संत समाज पर हमलों का आरोप, एकजुट रहने की अपील
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म और संत समाज को लेकर कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ रही हैं। उनके अनुसार कई बार संतों और धार्मिक संस्थाओं को निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जो लोग अपने स्तर पर धर्म और संत समाज से जुड़े विषयों पर सक्रिय हैं, उन्हें संरक्षण और सहयोग देना संत समाज का दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद पहले भी यति नरसिंहानंद गिरी के साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी आवश्यकतानुसार उनका समर्थन करती रहेगी।
रविंद्र पुरी ने संतों से आपसी एकता बनाए रखने और समाज में सकारात्मक संदेश देने की भी अपील की।
यति मां प्रत्यंगिरा गिरी ने गुरु के संकल्प को आगे बढ़ाने की बात कही
नवनियुक्त महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी ने अपने संबोधन में कहा कि वह अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि अपने गुरु के जीवन के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए वह निरंतर कार्य करती रहेंगी और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगी।
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उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, वह केवल सम्मान नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वह संत समाज और सनातन परंपराओं के हित में लगातार कार्य करेंगी।
आनंद भैरव मंदिर में जुटे अनेक संत
हरिद्वार के आनंद भैरव मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े अनेक संत एवं श्रद्धालु भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन, आशीर्वाद और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
संतों ने धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त महामंडलेश्वर का स्वागत और धार्मिक नेतृत्व को सशक्त बनाने का संदेश देना बताया गया।
कार्यक्रम का धार्मिक और संगठनात्मक महत्व
अखाड़ा परिषद देश की प्रमुख संत संस्थाओं में से एक मानी जाती है और इसके निर्णयों का संत समाज में व्यापक प्रभाव होता है। ऐसे में परिषद के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किसी संत या धार्मिक अभियान के प्रति सार्वजनिक समर्थन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्यों से यह स्पष्ट हुआ कि परिषद अपने सदस्यों और संत समाज के साथ संगठनात्मक रूप से खड़ी रहने का संदेश देना चाहती है। वहीं, धार्मिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नई जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं।
विवादित बयानों पर कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर दिए जाने वाले सार्वजनिक वक्तव्य अक्सर व्यापक चर्चा का विषय बनते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और न्यायिक संस्थाएं कानून के अनुसार स्थिति का आकलन करती हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी नागरिकों और संगठनों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने विचार संविधान और कानून के दायरे में रखते हुए व्यक्त करें तथा सामाजिक शांति और सौहार्द बनाए रखें।
हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने यति नरसिंहानंद गिरी और नवनियुक्त महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। कार्यक्रम में परिषद के शीर्ष पदाधिकारियों ने धार्मिक नेतृत्व, संगठनात्मक एकता और सनातन परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। वहीं यति नरसिंहानंद गिरी और यति मां प्रत्यंगिरा गिरी ने अपने-अपने वक्तव्यों में गुरु के बताए मार्ग पर कार्य करते रहने की बात कही। यह कार्यक्रम धार्मिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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