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अखिलेश यादव का ममता और स्टालिन को संदेश: “हम मुश्किलों में साथ नहीं छोड़ते”, विपक्षी राजनीति में नए संकेत!

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AIN NEWS 1: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर विपक्षी एकता को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “हम वो नहीं हैं, जो मुश्किल समय में अपने साथियों का साथ छोड़ दें।”

अखिलेश का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और डीएमके को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की विपक्षी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कोलकाता पहुंचकर ममता से मिले अखिलेश

7 मई को अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे और ममता बनर्जी के घर जाकर उनसे मुलाकात की। खास बात यह रही कि ममता खुद उन्हें रिसीव करने के लिए घर के गेट तक आईं।

मुलाकात के दौरान अखिलेश ने उन्हें शॉल भेंट की। इस पर ममता ने मुस्कुराते हुए कहा कि इसकी क्या जरूरत थी। जवाब में अखिलेश बोले, “दीदी, आपने लड़ाई लड़ी है, आप हारी नहीं हैं।”

इस बातचीत को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता से मिलने पहुंचने वाले अखिलेश पहले बड़े विपक्षी नेता बने हैं।

पहले ही जाना चाहते थे बंगाल

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव नतीजों के अगले दिन यानी 5 मई को ही अखिलेश कोलकाता जाना चाहते थे, लेकिन उस समय ममता बनर्जी ने उन्हें आने से मना कर दिया था।

हालांकि अखिलेश चुनाव प्रचार के लिए बंगाल नहीं गए थे, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों के जरिए लगातार ममता बनर्जी का समर्थन करते रहे। अब चुनाव परिणाम आने के बाद उनकी यह मुलाकात कई नए राजनीतिक संकेत दे रही है।

स्टालिन के साथ तस्वीर ने बढ़ाई चर्चा

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ तस्वीर भी साझा की।

विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि विपक्षी दलों के कठिन समय में भी वे उनके साथ खड़े हैं। इससे वे राष्ट्रीय स्तर पर खुद को भरोसेमंद विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

बंगाल और तमिलनाडु में विपक्ष को बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 207 सीटें हासिल कीं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई।

2021 की तुलना में भाजपा का वोट शेयर करीब 7.5 प्रतिशत बढ़ा। दूसरी ओर, टीएमसी का वोट प्रतिशत लगभग 8 प्रतिशत घट गया। सबसे बड़ा झटका यह रहा कि जिन सीटों पर टीएमसी पिछले डेढ़ दशक से मजबूत मानी जाती थी, उनमें से बड़ी संख्या भाजपा के खाते में चली गई।

उधर तमिलनाडु में भी डीएमके को सत्ता से बाहर होना पड़ा। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं। AIADMK और भाजपा गठबंधन ने भी मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि डीएमके पिछड़ गई।

भाजपा नेताओं ने साधा निशाना

अखिलेश और ममता की मुलाकात पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश ममता को ढांढस बंधाने गए थे। उन्होंने कहा, “वे कहने गए होंगे कि आप एक बार हारी हैं, हम दो बार हार चुके हैं, आइए मिलकर हार का नया रिकॉर्ड बनाते हैं।”

राजभर ने यह भी कहा कि जब बंगाल चुनाव के नतीजे आ रहे थे, तब अखिलेश कई घंटों तक चुप रहे और अब अचानक समर्थन में पहुंच गए।

भाजपा का दावा- विपक्ष बिखर रहा

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन धीरे-धीरे टूट रहा है और अगले चुनावों में उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी का सफाया हो जाएगा।

वहीं भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि “दो हार चुकी पार्टियों के नेता एक-दूसरे के आंसू पोछने के लिए मिले हैं।”

उन्होंने टीएमसी पर पश्चिम बंगाल को पीछे ले जाने और भ्रष्टाचार बढ़ाने के आरोप भी लगाए। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी और उसी वजह से चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में गए।

क्या 2027 की तैयारी कर रहे हैं अखिलेश?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव अपनी राजनीति को अब केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखना चाहते। वे लगातार ऐसे नेताओं के साथ संबंध मजबूत बनाए हुए हैं, जो भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभा सकते हैं।

वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि अखिलेश की राजनीति की खासियत यह रही है कि वे गठबंधन टूटने के बाद भी अपने सहयोगियों के खिलाफ खुलकर हमला नहीं करते।

2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने के बाद भी उन्होंने कांग्रेस पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए। 2019 में बसपा से गठबंधन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने मायावती के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी से दूरी बनाए रखी।

यही वजह है कि वे खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं, जो विपक्षी दलों के बीच भरोसेमंद चेहरा बन सके।

विपक्षी राजनीति में नया समीकरण?

ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और अखिलेश यादव की तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब देश की राजनीति में विपक्षी दल नई रणनीति बनाने में जुटे हैं।

हालांकि चुनावी हार ने इन दलों को कमजोर जरूर किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के खिलाफ एक साझा मंच बनाने की कोशिशें अभी खत्म नहीं हुई हैं।

आने वाले समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027, लोकसभा चुनाव और क्षेत्रीय गठबंधनों की राजनीति में इन मुलाकातों का असर देखने को मिल सकता है।

Akhilesh Yadav’s recent meeting with Mamata Banerjee in Kolkata and his public support for MK Stalin has intensified discussions around opposition unity and the future of the INDIA alliance. After the heavy electoral setbacks faced by TMC in West Bengal and DMK in Tamil Nadu, political analysts believe Akhilesh is attempting to position himself as a reliable opposition leader ahead of the 2027 Uttar Pradesh Assembly elections. BJP leaders, however, mocked the meetings and claimed that defeated regional parties are trying to regroup after major losses.

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