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अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या घटने का दावा कितना सच? चढ़ावा विवाद के बीच होटल और दुकानदारों पर असर, आंकड़ों की पूरी पड़ताल

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AIN NEWS 1 अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर अयोध्या के स्थानीय कारोबार तक पहुंच गया है। इस बीच सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में करीब 70 फीसदी की गिरावट आई है। होटल ऑक्यूपेंसी घटकर 25 फीसदी रह जाने और दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होने की बातें भी सामने आई हैं।

हालांकि, इन दावों को समझने के लिए अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों को देखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जनवरी से जून 2025 के दौरान अयोध्या में करीब 23.82 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे थे। वहीं जनवरी से जून 2024 के दौरान यह संख्या करीब 11 करोड़ बताई गई थी।

दूसरी ओर, जनवरी से जून 2026 में 7.20 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया है। यदि इस आंकड़े की आधिकारिक सरकारी स्रोत से पुष्टि होती है, तो 2025 की तुलना में करीब 70 फीसदी की कमी बैठती है। लेकिन इस गिरावट को केवल चढ़ावा विवाद का परिणाम बताना अभी उचित नहीं होगा।

2025 में अयोध्या पहुंचे थे रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक जनवरी से जून 2025 के बीच अयोध्या में करीब 23.82 करोड़ भारतीय पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचे थे। इसके अलावा विदेशी पर्यटकों की संख्या भी दर्ज की गई थी।

यह आंकड़ा राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में बढ़े धार्मिक पर्यटन की बड़ी तस्वीर दिखाता है। 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अयोध्या पहुंचने लगे थे।

2024 में जनवरी से जून के बीच करीब 11 करोड़ पर्यटक-श्रद्धालुओं के अयोध्या आने की जानकारी भी सरकारी अधिकारियों के हवाले से सामने आई थी।

इस लिहाज से 2025 में संख्या में तेज उछाल दिखाई दिया।

2026 के आंकड़े और 70 फीसदी गिरावट का दावा

अब 2026 के पहले छह महीनों को लेकर 7.20 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटकों का आंकड़ा सामने आया है। यदि इसे आधिकारिक पर्यटन विभाग के आंकड़े के तौर पर प्रमाणित किया जाता है, तो 2025 के 23.82 करोड़ की तुलना में करीब 16.62 करोड़ की कमी दिखाई देती है।

गणना के हिसाब से यह गिरावट लगभग 69.8 फीसदी यानी करीब 70 फीसदी बैठती है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। “2025 के मुकाबले करीब 70 फीसदी कमी” और “चढ़ावा चोरी के कारण 70 फीसदी श्रद्धालु कम हो गए”—इन दोनों बातों का अर्थ एक जैसा नहीं है।

अभी ऐसा कोई निर्णायक सरकारी अध्ययन सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि श्रद्धालुओं की पूरी गिरावट केवल चढ़ावा विवाद की वजह से हुई है।

चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या में क्या हुआ?

राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामला काफी गंभीर हो गया। आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से SIT गठित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई।

जांच के दौरान कथित गबन, चढ़ावे की रकम में हेराफेरी, VIP दर्शन पास से जुड़े आरोप और मंदिर परिसर से संबंधित अन्य शिकायतों की पड़ताल की गई। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों की खबरें भी सामने आईं।

हालांकि, जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगना और अदालत में अपराध साबित होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

क्या श्रद्धालुओं की संख्या सच में अचानक कम हुई?

अयोध्या के स्थानीय कारोबारियों और कुछ ग्राउंड रिपोर्टों में श्रद्धालुओं की संख्या कम होने की बात कही गई है। रामपथ और नया घाट जैसे प्रमुख इलाकों में दुकान चलाने वाले कुछ व्यापारियों ने बिक्री घटने की शिकायत की है।

कुछ दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां दिनभर में कई हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी, वहीं अब कम ग्राहक आने से आमदनी काफी घट गई है। फूल-माला, प्रसाद, चंदन और धार्मिक सामग्री बेचने वाले छोटे दुकानदारों पर इसका सीधा असर दिखाई देने की बात कही जा रही है।

ई-रिक्शा और ऑटो चालकों ने भी यात्रियों की संख्या घटने से आमदनी प्रभावित होने की बात कही है।

हालांकि, ये व्यक्तिगत कारोबारियों के अनुभव हैं। इन्हें पूरे अयोध्या के कारोबार का आधिकारिक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

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होटल कारोबार पर भी असर का दावा

अयोध्या में होटल कारोबार को लेकर भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों में होटल एसोसिएशन से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि कुछ मिड-सेगमेंट होटलों में ऑक्यूपेंसी करीब 25 फीसदी तक रह गई है।

अगर यह आंकड़ा सही है तो यह होटल कारोबार के लिए बड़ी गिरावट मानी जाएगी। राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में होटल, गेस्ट हाउस और अन्य पर्यटक सुविधाओं में तेजी से निवेश हुआ था।

शहर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में नए होटल निर्माणाधीन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में लंबे समय तक पर्यटकों की संख्या कम रहने पर नए निवेशकों और होटल कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि 25 फीसदी ऑक्यूपेंसी का आंकड़ा होटल कारोबार से जुड़े लोगों का रिपोर्टेड दावा है, इसे सरकारी होटल ऑक्यूपेंसी आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

सिर्फ चढ़ावा विवाद को जिम्मेदार मानना सही नहीं

अयोध्या में पर्यटकों की संख्या पर मौसम, स्कूल-कॉलेज खुलने, छुट्टियां खत्म होने, बारिश और धार्मिक आयोजनों जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।

स्थानीय कारोबारियों और होटल संचालकों ने भी बारिश और स्कूल खुलने को कारोबार में कमी की वजहों में शामिल किया है।

इसलिए मौजूदा आंकड़ों के आधार पर यह कहना ज्यादा सही होगा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में गिरावट की रिपोर्ट सामने आई है और इसी दौरान चढ़ावा विवाद भी चर्चा में रहा है।

लेकिन दोनों घटनाओं के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।

हाल के दिनों में फिर बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी सामने आता है। रिपोर्टों के मुताबिक 21 जून से 3 जुलाई की 13 दिन की अवधि में 2026 में करीब 11.54 लाख श्रद्धालु-पर्यटक अयोध्या पहुंचे, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या करीब 9.12 लाख बताई गई थी।

इस हिसाब से इस अवधि में करीब 2.42 लाख की वृद्धि हुई, जो लगभग 26.5 फीसदी बैठती है।

रिपोर्ट के अनुसार इन 13 दिनों में ज्यादातर दिनों में पिछले साल की तुलना में ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। इसका मतलब यह है कि अयोध्या में श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और अलग-अलग समय में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

खबर में क्या सही और क्या सावधानी जरूरी?

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ा चढ़ावा विवाद वास्तविक है और इसकी जांच भी हुई है। स्थानीय कारोबारियों, होटल संचालकों और वाहन चालकों की कमाई प्रभावित होने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं।

2025 में करीब 23.82 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक आने का आंकड़ा प्रकाशित रिपोर्टों में उपलब्ध है। 2024 में करीब 11 करोड़ का आंकड़ा भी रिपोर्ट किया गया था।

वहीं 2026 के पहले छह महीनों में 7.20 करोड़ का आंकड़ा सामने आया है। यदि इसका मूल सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध होकर इसकी पुष्टि करता है, तो 2025 की तुलना में लगभग 70 फीसदी की गिरावट गणितीय रूप से सही होगी।

लेकिन इस गिरावट को सिर्फ राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद का परिणाम बताना फिलहाल साबित नहीं हुआ है। मौसम, स्कूल खुलने और पर्यटन के सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव जैसे दूसरे कारणों को भी ध्यान में रखना होगा।

इसलिए अयोध्या की मौजूदा स्थिति को लेकर सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि श्रद्धालुओं की संख्या और स्थानीय कारोबार में गिरावट की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन इसके पीछे चढ़ावा विवाद की भूमिका कितनी है, यह आधिकारिक और विस्तृत अध्ययन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

Ayodhya Ram Mandir tourism has become a major topic amid the ongoing donation controversy and reports of declining pilgrim footfall in 2026. Available reports indicate a significant change in Ayodhya devotees and tourist numbers compared with 2025, while local hotels, shops, restaurants, e-rickshaw drivers and religious businesses have also reported an impact. However, the decline should not automatically be attributed only to the Ram Mandir donation controversy, as weather, school reopening and seasonal tourism patterns can also influence visitor numbers. This report examines Ayodhya tourism figures, Ram Mandir devotees, hotel occupancy and the latest developments surrounding the donation controversy.

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