भोपाल में किसानों का महाआंदोलन: 100% MSP पर मूंग खरीद की मांग को लेकर राजधानी पहुंचे हजारों किसान, सरकार पर बढ़ा दबाव
AIN NEWS 1 भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों किसान अपने साथ अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और कई दिनों का राशन लेकर भोपाल पहुंचे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में 19 किसान संगठनों ने इस आंदोलन का नेतृत्व संभाल रखा है। किसानों की सबसे बड़ी मांग मूंग की पूरी फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करना है। इसके अलावा खाद वितरण, फसल खरीद व्यवस्था और किसानों से जुड़े कई अन्य मुद्दों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जा रहा है।

आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
मध्य प्रदेश में इस बार मूंग की अच्छी पैदावार हुई है। किसानों का आरोप है कि सरकार केवल सीमित मात्रा में ही मूंग की खरीद करती है, जबकि बाकी फसल उन्हें खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है।
किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों की 100 प्रतिशत MSP पर खरीद की व्यवस्था की है, लेकिन मूंग अभी भी मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत खरीदी जाती है। इस योजना में खरीद की मात्रा सीमित रहती है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
किसानों की मांग है कि मूंग की भी अन्य दालों की तरह पूरी फसल MSP पर खरीदी जाए ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
राजधानी की ओर बढ़ा किसानों का काफिला
आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम से हुई थी। इसके बाद हजारों किसान रायसेन, हरदा, विदिशा और बुधनी होते हुए भोपाल की ओर बढ़े। रास्ते में प्रशासन ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन बड़ी संख्या में किसान आगे बढ़ते रहे।
भोपाल के बाहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और कई मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। हालांकि किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
राशन और बर्तन लेकर पहुंचे किसान
इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि किसान केवल प्रदर्शन करने नहीं आए, बल्कि लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। कई किसान अपने साथ एक सप्ताह तक का राशन, अनाज की बोरियां, गैस सिलेंडर, चूल्हे, बर्तन और बिस्तर लेकर आए हैं।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगें जल्द नहीं मानती है तो वे लंबे समय तक भोपाल में डटे रहेंगे।
किसान नेताओं ने क्या कहा?
किसान नेता संतोष पटवारी ने कहा कि पिछले कई दिनों से किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सरकार को कई ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
उनका कहना है कि किसानों को अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। बढ़ती खेती लागत, महंगे बीज, उर्वरक और डीजल के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। ऐसे में यदि फसल भी MSP से कम दाम पर बिकेगी तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे किसान सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रख रहे हैं—
मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद MSP पर की जाए।
खाद और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
खरीद केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन और ई-टोकन संबंधी समस्याएं खत्म की जाएं।
किसानों को भुगतान समय पर किया जाए।
कृषि योजनाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
सरकार का क्या कहना है?
प्रशासन का कहना है कि किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी बड़े समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहा असंतोष
किसान संगठनों का कहना है कि केवल मूंग खरीद ही नहीं, बल्कि कई वर्षों से खरीद प्रक्रिया में देरी, सीमित खरीद, रजिस्ट्रेशन की परेशानियां और खाद की कमी जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।
खेती की लागत तेजी से बढ़ी है, जबकि बाजार में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। यही वजह है कि किसानों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आंदोलन मध्य प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रदेश में कृषि एक बड़ा मुद्दा है और लाखों परिवार खेती पर निर्भर हैं।
यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती है तो इसका असर आने वाले राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। विपक्ष भी किसानों के मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है।
क्या देशभर में भी किसान आंदोलन तेज हो रहा है?
मध्य प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी किसान संगठन MSP, गन्ना भुगतान, खाद की उपलब्धता और कृषि नीतियों को लेकर लगातार बैठकें और महापंचायतें आयोजित कर रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने आने वाले दिनों में देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार करने के संकेत दिए हैं। यदि किसानों की मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो विभिन्न राज्यों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
ताजा जानकारी के अनुसार किसान भोपाल में डटे हुए हैं और सरकार के साथ बातचीत जारी है। प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए हुए है, जबकि किसान संगठन अपनी मांगों पर अडिग हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार किसानों की 100 प्रतिशत MSP खरीद की मांग पर क्या फैसला लेती है। यदि कोई समाधान नहीं निकलता है तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
भोपाल का किसान आंदोलन केवल मूंग की खरीद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों की आय, कृषि व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली से जुड़े बड़े सवालों का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। फिलहाल हजारों किसान राजधानी में डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
Thousands of farmers have gathered in Bhopal demanding 100% procurement of moong at the Minimum Support Price (MSP). The protest, led by the Samyukt Kisan Morcha and several farmer organizations, has become one of the biggest farmer movements in Madhya Pradesh. Farmers are also raising concerns over fertilizer shortages, delayed procurement, and registration issues. The latest Bhopal Farmers Protest highlights growing dissatisfaction among cultivators and is expected to influence agricultural policies in India.



















