AIN NEWS 1 कानपुर: भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति उत्तर प्रदेश ने आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। कानपुर में प्रदेश पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक प्रदेश अध्यक्ष राजाराम व्यास की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में संगठन को मजबूत करने, सदस्यता अभियान को गति देने, आर्थिक स्थिति बेहतर करने और प्रदेश स्तर पर सम्मेलन आयोजित करने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र रक्षक सेनानियों से जुड़े संगठन को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में और अधिक सक्रिय किया जाना चाहिए। इसके लिए सभी जिलों के पदाधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीरता से काम करने तथा संगठन की गतिविधियों को नियमित रूप से आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।

संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर
प्रदेश अध्यक्ष राजाराम व्यास ने बैठक में कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए केवल पदाधिकारियों की सक्रियता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी लोकतंत्र सेनानियों को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने संगठन की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सभी सदस्यों से सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए आर्थिक संसाधनों का मजबूत होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से अगली बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से सदस्यता शुल्क जमा कराने का निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों से कहा गया कि सदस्यता शुल्क रसीदों सहित अगली बैठक में जमा कराया जाए, ताकि संगठन की सदस्यता और आर्थिक गतिविधियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
मंडल स्तर पर स्मारिका निकालने की तैयारी
प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र कुमार अटल ने बैठक में संगठन की गतिविधियों को व्यापक स्तर पर ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल और उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष के इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत है।

उन्होंने सुझाव दिया कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपातकाल और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से जुड़ी जानकारी को संकलित किया जाए। इसके लिए मंडल स्तर पर स्मारिका प्रकाशित करने की व्यवस्था किए जाने पर भी विचार किया गया।
स्मारिका के माध्यम से उस दौर की घटनाओं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष और लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के योगदान को दस्तावेज के रूप में सामने लाने की योजना है। संगठन का मानना है कि इस तरह की पहल से नई पीढ़ी को भी उस समय के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
जल्द घोषित किया जाएगा क्रियाशील संगठन
बैठक में संगठन की प्रदेश स्तर पर सक्रियता बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन को प्रभावी बनाने और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई।
प्रदेश अध्यक्ष राजाराम व्यास ने संकेत दिया कि सभी पदाधिकारियों से विचार-विमर्श और सहयोग लेने के बाद जल्द ही क्रियाशील संगठन की घोषणा की जाएगी। इसके बाद संगठन की गतिविधियों को जिला और मंडल स्तर पर और अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
अक्टूबर-नवंबर में लखनऊ में प्रदेश सम्मेलन
बैठक का एक प्रमुख निर्णय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन को लेकर रहा। पदाधिकारियों ने तय किया कि अक्टूबर या नवंबर में लखनऊ में प्रदेश भर के लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का सम्मेलन आयोजित किया जाए।
इस सम्मेलन को बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोकतंत्र रक्षक सेनानियों और संगठन के पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर आगे की बैठकों में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
चुनावी समीकरणों पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान आगामी चुनाव को लेकर बनने वाले राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि बैठक में किसी एक विशेष राजनीतिक रणनीति की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन पदाधिकारियों ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और संगठन की भूमिका को लेकर अपने विचार रखे।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि चुनावी दौर में संगठन की सक्रियता और सामाजिक स्तर पर उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में संगठन की गतिविधियों को तेज करने की रणनीति पर विचार किया गया।
पदाधिकारियों ने यह भी माना कि संगठन को केवल बैठकों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जाना जरूरी है। इसके लिए सदस्यता, सम्मेलन, स्मारिका प्रकाशन और जिला स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना पर चर्चा हुई।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद
बैठक में इस बात पर विशेष जोर रहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में संगठन की गतिविधियां नियमित रूप से संचालित हों। इसके लिए स्थानीय पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपने और सदस्यता से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने की बात कही गई।
संगठन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सक्रिय नेटवर्क तैयार करना है। पदाधिकारियों ने संकेत दिया कि आने वाले समय में जिला और मंडल स्तर पर कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के संघर्ष और योगदान को सार्वजनिक विमर्श में बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए। इसके साथ ही संगठन की नई पीढ़ी को जोड़ने और इतिहास को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
इन पदाधिकारियों ने रखे विचार
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजाराम व्यास और प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र कुमार अटल के अलावा कई पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। इनमें नवल किशोर मिश्रा, नयन सिंह चौहान, सुभाष चंद्र त्रिपाठी, ओम नारायण त्रिपाठी, गया प्रसाद जायसवाल, सूर्यकुमार दीक्षित, विजय वर्मा, कौशलेंद्र कुमार और जगदीश प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
बैठक में संगठन की आगामी गतिविधियों, सदस्यता शुल्क, आर्थिक मजबूती, स्मारिका प्रकाशन, प्रदेश सम्मेलन और चुनावी परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
आगे क्या होगा?
कानपुर में हुई बैठक के बाद अब संगठन की अगली बैठक पर सभी की नजर रहेगी। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से सदस्यता शुल्क और रसीदों का विवरण जमा कराया जाना है। इसके साथ ही क्रियाशील संगठन की घोषणा की दिशा में भी आगे बढ़ने की उम्मीद है।
अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित लखनऊ सम्मेलन को लेकर भी आने वाले दिनों में तैयारियां तेज हो सकती हैं। मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की योजना के बीच यह सम्मेलन संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति उत्तर प्रदेश ने आगामी समय में अपनी गतिविधियों को विस्तार देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष के इतिहास को संरक्षित करने और प्रदेश स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए ये कदम आने वाले महीनों में संगठन की भूमिका को और स्पष्ट कर सकते हैं।
The Indian Democracy Defenders Committee Uttar Pradesh has started strengthening its organizational activities ahead of the upcoming elections. A key meeting chaired by state president Rajaram Vyas discussed membership fees, financial strengthening, documenting the history of the Emergency period, publishing commemorative booklets at the divisional level and organizing a state conference in Lucknow during October or November. The committee also discussed organizational restructuring and election-related developments across Uttar Pradesh.



















