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गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर का बड़ा फैसला: SI, हेड कांस्टेबल और सिपाही अब तय समय तक ही रहेंगे एक जोन में?

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Date:

Ghaziabad Police Commissioner Sets Maximum Duty Tenure for SI, Head Constable, and Constable in Each Zone

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर का बड़ा फैसला: एक जोन में सीमित समय तक रहेंगे SI, हेड कांस्टेबल और सिपाही

AIN NEWS 1: गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में अब ड्यूटी के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। हाल ही में नियुक्त गाजियाबाद के नए पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड़ ने सब-इंस्पेक्टर (SI), हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल के लिए एक जोन में ड्यूटी की अधिकतम अवधि तय कर दी है। इस कदम का उद्देश्य पुलिसिंग में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

कमिश्नरेट में जोन और उनके प्रभारी

गाजियाबाद कमिश्नरेट को तीन जोन में बांटा गया है:

शहर जोन (City Zone)

ट्रांस हिंडन जोन (Trans Hindon Zone)

ग्रामीण जोन (Rural Zone)

हर जोन का नेतृत्व एक डीसीपी (Deputy Commissioner of Police) करते हैं।

ड्यूटी अवधि के नए निर्देश

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक:

सब-इंस्पेक्टर (SI):

किसी एक जोन में अधिकतम 2 साल तक ही तैनात रह सकता है।

हेड कांस्टेबल:

शहर जोन में अधिकतम 4 साल

ट्रांस हिंडन और ग्रामीण जोन में अधिकतम 3-3 साल तक तैनात रह सकता है।

कांस्टेबल:

किसी भी जोन में अधिकतम 5 साल तक काम कर सकता है।

पूरा जिले में सेवा अवधि की सीमा

गाजियाबाद जिले में किसी पुलिसकर्मी के लिए कुल सेवा अवधि भी निर्धारित है:

सब-इंस्पेक्टर (SI): जिले में अधिकतम 6 साल सेवा कर सकता है।

हेड कांस्टेबल: जिले में अधिकतम 10 साल सेवा कर सकता है।

कांस्टेबल: जिले में अधिकतम 15 साल सेवा कर सकता है।

यह सीमाएं इस उद्देश्य से तय की गई हैं कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनाती से पद का दुरुपयोग न हो और सभी को जिले में विभिन्न जगहों पर काम करने का समान अवसर मिले।

नई व्यवस्था का उद्देश्य

गाजियाबाद सिटी जोन के डीसीपी राजेश कुमार ने बताया कि जांच में यह पाया गया था कि कई पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही क्षेत्र में जमे हुए थे। इससे स्थानीय प्रभाव और पद का दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, अन्य पुलिसकर्मियों को भी दूरदराज के क्षेत्रों में काम करना पड़ता था, जिससे असमानता पैदा हो रही थी।

इस स्थिति को सुधारने के लिए ड्यूटी की अधिकतम सीमा तय करना आवश्यक हो गया था। अब हर पुलिसकर्मी को जिले के अलग-अलग हिस्सों में सेवा देने का अवसर मिलेगा, जिससे न केवल उनके अनुभव में वृद्धि होगी बल्कि पुलिसिंग भी अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।

कमिश्नर जे रविंदर गौड़ का विजन

गौड़ ने 17 अप्रैल को गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर का कार्यभार संभालने के बाद से ही ‘नागरिक-केंद्रित’ पुलिसिंग (Citizen-Centric Policing) को प्राथमिकता दी है। उनका उद्देश्य है कि गाजियाबाद में पुलिस व्यवस्था को जनता के लिए अधिक भरोसेमंद और जिम्मेदार बनाया जाए।

नए निर्देश उसी दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जिससे पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर निष्पक्षता कायम रहेगी।

भविष्य की योजना

पुलिस प्रशासन जल्द ही इन निर्देशों को लागू करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी पुलिसकर्मी समय-समय पर जोन बदलें। इसके अलावा, नए स्थानों पर कार्य करते समय उनके प्रदर्शन का भी आकलन किया जाएगा, जिससे गाजियाबाद में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जा सके।

The Ghaziabad Police Commissioner, J Ravinder Gaur, has introduced strict guidelines to limit the maximum duty tenure for Sub-Inspectors (SI), Head Constables, and Constables in each zone. Under the new rules, an SI can serve for only two years in a zone, while Head Constables and Constables have a tenure limit of four and five years respectively. This move aims to promote citizen-centric policing, ensure fair postings, and curb misuse of power. The Ghaziabad Police zones—City, Trans Hindon, and Rural—will now operate with more transparency and accountability under these new police transfer rules.

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