AIN NEWS 1: देश की राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक रविवार और सोमवार की शुरुआत कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के साथ हुई। एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है और विपक्षी दलों के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के साथ भारत के रिश्तों का बचाव करते हुए कहा है कि भारत अपने पुराने अनुभवों को नहीं भूल सकता।
इसी बीच ईरान से जुड़े युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, लेकिन OPEC+ देशों ने फिलहाल उत्पादन बढ़ाने के बजाय मौजूदा स्तर बनाए रखने का फैसला किया है। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर के प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन किए, जबकि उत्तर प्रदेश में स्वामी प्रसाद मौर्य की आजम खान की पत्नी ताज़ीन फातिमा से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन तेज
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रह गया है। CJP ने पहले 48 घंटे के भीतर उनके इस्तीफे की मांग की थी। इसके बाद संगठन ने देशभर में आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। 2 अक्टूबर से शुरू हुए विरोध के बाद मुंबई और दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं।
विवाद की मुख्य वजह मतदाता सूची की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया है। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और SIR को मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बता रहे हैं।
विवाद तब और गंभीर हुआ जब रिपोर्टों में सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई फैसलों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्ति जताई। इनमें मतदाता जोड़ने-हटाने, डेटा प्रबंधन और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
अब इस मामले ने न्यायिक मोर्चा भी पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के कामकाज और देशभर में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने SIR को लेकर प्रक्रिया और बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
क्या ज्ञानेश कुमार का अंजाम धर्मेंद्र प्रधान जैसा होगा?
यही सवाल इस समय राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। CJP ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जिस तरह आंदोलन खड़ा किया है, उसमें उसके पुराने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन की चर्चा भी हो रही है। उस आंदोलन के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा था। हालांकि ज्ञानेश कुमार के मामले में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें भी उसी तरह इस्तीफा देना पड़ेगा।
मौजूदा स्थिति में उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध, विपक्ष का दबाव और न्यायिक चुनौती जरूर बढ़ी है, लेकिन किसी संवैधानिक पदाधिकारी का भविष्य केवल सड़क पर होने वाले आंदोलन से तय नहीं होता। आगे सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, चुनाव आयोग की सफाई और राजनीतिक घटनाक्रम इस मामले की दिशा तय करेंगे।
CJP ने अब 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर उठे सवालों पर जवाब मांगना है।
रूस के साथ रिश्तों पर जयशंकर का बड़ा बयान
उधर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के साथ भारत के रिश्तों पर पश्चिमी देशों की आलोचना के बीच भारत का पक्ष स्पष्ट किया। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि इनकी एक लंबी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है।
जयशंकर ने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा आया, तब रूस भारत के साथ खड़ा रहा। उन्होंने खास तौर पर उस दौर का जिक्र किया जब दुनिया के कई देश पाकिस्तान के सैन्य शासन के साथ थे। उनके मुताबिक भारत अपने अच्छे और बुरे दोनों तरह के ऐतिहासिक अनुभवों को ध्यान में रखकर विदेश नीति बनाता है।
इस बयान को पश्चिमी देशों की ओर से भारत-रूस संबंधों पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच भारत लगातार अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति चलाने की बात करता रहा है।
ईरान युद्ध के बीच 100 डॉलर के पार कच्चा तेल
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इससे दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है।
सबसे खास बात यह है कि OPEC+ के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने नवंबर के लिए उत्पादन बढ़ाने के बजाय मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने पर सहमति जताई है। इस फैसले से बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बना रह सकता है।
सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान समेत सात प्रमुख उत्पादक देशों ने उत्पादन स्तर बनाए रखने का फैसला किया है। समूह नवंबर में बाजार की स्थिति की फिर समीक्षा करेगा।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने पर आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
नागपुर में फडणवीस ने किए गणपति दर्शन
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में प्रसिद्ध ‘महाराजा’ के नाम से पहचाने जाने वाले मस्कर्या गणपति के दर्शन किए। उन्होंने भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया और पूजा-अर्चना की।
गणपति दर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। महाराष्ट्र की राजनीति में धार्मिक स्थलों पर नेताओं की मौजूदगी आम तौर पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से देखी जाती है।
आजम खान के परिवार से स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एक मुलाकात ने चर्चाएं तेज कर दी हैं। पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य रामपुर पहुंचे और उन्होंने आजम खान की पत्नी डॉ. ताज़ीन फातिमा से मुलाकात की।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अटकलें तेज हैं। इससे पहले मौर्य की राहुल गांधी से मुलाकात भी चर्चा में रही थी।
मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार पर आजम खान के खिलाफ कथित बदले की राजनीति और तानाशाही का आरोप लगाया। हालांकि जब उनसे किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह केवल परिवार का हाल जानने पहुंचे थे।
इसलिए फिलहाल इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी गतिविधियां बढ़ने के साथ ऐसी मुलाकातों का राजनीतिक महत्व जरूर बढ़ जाता है।
बड़ी तस्वीर क्या है?
एक तरफ चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और SIR को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पक्ष मजबूती से रख रहा है। ईरान युद्ध का असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है और इसकी कीमतों का प्रभाव आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सबसे ज्यादा नजर अब ज्ञानेश कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन पर रहेगी। अगर आंदोलन और तेज होता है या अदालत की ओर से SIR को लेकर कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी आती है, तो यह विवाद देश की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कोई पुष्टि नहीं है और उनके पद पर बने रहने या हटने का फैसला आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
India’s political and geopolitical landscape is witnessing several major developments, with Gyanesh Kumar facing protests over the Election Commission’s Special Intensive Revision (SIR) of voter rolls. The CJP has demanded the Chief Election Commissioner’s resignation and announced further protests at Jantar Mantar. At the same time, External Affairs Minister S Jaishankar has defended India-Russia relations amid Western criticism. The Iran war has pushed Brent crude oil prices above $100 per barrel, while OPEC+ has decided to maintain production levels. These developments, along with Devendra Fadnavis’s Nagpur Ganpati visit and Swami Prasad Maurya’s meeting with Tazeen Fatma, remain key political and national news stories.



















