AIN NEWS 1: हापुड़ के बदनौली गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुआ विवाद अब हत्या के मामले में बदल गया है। दो पक्षों के बीच मारपीट, पथराव और फायरिंग की घटना में गंभीर रूप से घायल हुए दीपक उर्फ गोलू की इलाज के दौरान मौत हो गई। दीपक को गंभीर हालत में मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर गांव पहुंचते ही तनाव बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया।
मामले में पुलिस ने 13 नामजद आरोपियों के अलावा करीब 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

तीन महीने पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है मामला
पुलिस और सामने आई जानकारी के मुताबिक बदनौली गांव में दोनों पक्षों के बीच विवाद नया नहीं था। करीब तीन महीने पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। उस मामले में संदीप चौधरी समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुराने मुकदमे को खत्म कराने के लिए उन पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि समझौता नहीं करने पर परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया था। इसी पुरानी रंजिश को 4 सितंबर को हुई हिंसक घटना की वजह बताया जा रहा है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की जांच अभी जारी है। इसलिए पुराने विवाद, धमकी और मौजूदा हमले के बीच संबंध को जांच के आधार पर ही अंतिम रूप से स्थापित किया जाएगा।
विवाद के बाद पथराव और फायरिंग
बताया जा रहा है कि 4 सितंबर की सुबह बदनौली गांव में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी ने मारपीट का रूप ले लिया। इसके बाद पथराव और फायरिंग शुरू हो गई।
घटना के दौरान कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान दीपक उर्फ गोलू को भी गंभीर चोटें आईं। हालत गंभीर होने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा।
इलाज के दौरान दीपक की मौत
घटना के बाद दीपक का इलाज चल रहा था, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दीपक की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। वहीं गांव में भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। किसी तरह की दोबारा हिंसा न हो, इसके लिए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांव में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और लगातार निगरानी की जा रही है।
13 नामजद समेत 15-20 अज्ञात के खिलाफ केस
पुलिस ने मामले में 13 लोगों को नामजद करते हुए करीब 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई हैं।
अब तक पुलिस 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां से आए।
जांच के दौरान पुलिस CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी खंगाल रही है। अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए भी पुलिस रिकॉर्ड और मौके से मिले साक्ष्यों की मदद ले रही है।
पुलिस पर भी उठे सवाल, अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि गांव में पहले से विवाद चल रहा था और पुराने मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हापुड़ पुलिस प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की है।
रिपोर्टों के मुताबिक नगर कोतवाली प्रभारी मनीष चौहान को लाइन हाजिर किया गया है। वहीं नगौला चौकी प्रभारी जगत पाल और बीट हेड कांस्टेबल मोनू मलिक को निलंबित किया गया है।
इसके अलावा सीओ सिटी अनीता चौहान को सीओ कार्यालय भेजा गया है। उनकी जगह दीपक चतुर्वेदी को नया सीओ सिटी बनाया गया है। वहीं कपूरपुर थाना प्रभारी सुरेश कुमार को हापुड़ नगर कोतवाली की जिम्मेदारी दी गई है।
इन कार्रवाई से साफ है कि पुलिस प्रशासन मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका और लापरवाही के आरोपों को भी गंभीरता से देख रहा है।
SIT करेगी पुलिस की भूमिका की जांच
मामले की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई अब विशेष जांच टीम यानी SIT की जांच है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर SIT का गठन किया गया है।
SIT यह पता लगाएगी कि घटना से पहले पुलिस को विवाद की जानकारी थी या नहीं। अगर जानकारी थी तो उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। पुलिस मौके पर कितनी जल्दी पहुंची और हिंसा को रोकने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
इसके अलावा पुराने मुकदमे को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की जा सकती है।
SIT को अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय में वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपनी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय होने की संभावना है।
क्या यह जातीय रंजिश का मामला है?
इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से इसे जातीय रंजिश से जोड़कर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दलित परिवारों पर हमले और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप भी सामने आए हैं। मामले में SC/ST Act की धाराएं लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, पुलिस की ओर से इसे मुख्य रूप से पुरानी रंजिश और दो पक्षों के बीच विवाद के रूप में बताया जा रहा है। इसलिए खबर में इसे सीधे तौर पर जातीय हिंसा या जातीय हत्या कहना अभी जल्दबाजी होगी।
SIT और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें जातीय पहलू की भूमिका कितनी थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई
दीपक की मौत के बाद मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। नेताओं ने घटना पर चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मायावती और चंद्रशेखर आजाद की ओर से भी घटना को लेकर प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांव में शांति बनाए रखना है। पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है और अधिकारियों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
अब आगे क्या होगा?
अब पुलिस के सामने तीन बड़ी प्राथमिकताएं हैं। पहली, मामले में नामजद और अज्ञात आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी करना। दूसरी, फायरिंग और पथराव से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाकर जांच को आगे बढ़ाना। तीसरी, गांव में दोबारा किसी तरह की हिंसा न होने देना।
इसके साथ ही SIT की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल 6 सितंबर तक की स्थिति में दीपक की मौत की पुष्टि, 6 आरोपियों की गिरफ्तारी, 13 नामजद समेत अज्ञात लोगों पर मुकदमा, गांव में पुलिस तैनाती और पुलिस की भूमिका की SIT जांच इस मामले के सबसे बड़े अपडेट हैं।
पीड़ित परिवार न्याय और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
The Hapur Badnauli firing case has taken a serious turn after Dalit youth Deepak alias Golu died during treatment following a violent clash involving firing and stone pelting. Police have registered a case against 13 named accused and several unidentified people, while six accused have reportedly been arrested. A Special Investigation Team (SIT) is also examining the incident and the alleged negligence of local police officials. The latest Hapur crime news is being closely monitored as authorities work to arrest the remaining accused and maintain peace in Badnauli village.



















