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कांवड़ यात्रा मार्ग पर होटल मालिकों की पहचान के लिए हिंदू संगठनों ने शुरू किया क्यूआर कोड स्कैनिंग अभियान!

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Hindu Groups Scan QR Codes on Kanwar Route Hotels, Demand Owner’s Name and Religion

कांवड़ मार्ग पर होटल मालिकों की जांच में जुटे हिंदू संगठन, क्यूआर कोड स्कैन कर मांगी पहचान और धर्म की जानकारी

AIN NEWS 1 मेरठ:  सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर हिंदू संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अन्य हिंदू संगठनों ने कांवड़ यात्रा के रास्तों और हाइवे पर स्थित होटलों व ढाबों की जांच शुरू कर दी है। यह टीमें खुद जाकर होटलों में लगे क्यूआर कोड स्कैन कर रही हैं, ताकि ऑनलाइन पेमेंट से जुड़ी जानकारी के ज़रिए पता चल सके कि होटल का मालिक कौन है और किस धर्म से है।

क्या है पूरा मामला?

कांवड़ यात्रा के दौरान कई स्थानों पर यह देखा गया है कि कुछ होटलों और ढाबों पर मालिक का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिखा होता है। इसे लेकर हिंदू संगठनों को आपत्ति है। संगठनों का कहना है कि अगर किसी होटल का नाम किसी विशेष धर्म को छिपाकर रखा गया है या जानबूझकर हिंदू नाम देकर किसी अन्य धर्म के व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है, तो यह श्रद्धालुओं को भ्रमित करता है।

क्यूआर कोड स्कैन कर हो रही पहचान

मेरठ, मुज़फ्फरनगर और गाजियाबाद जैसे जिलों में हिंदू संगठन अब खुद अभियान चलाकर होटलों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर रहे हैं। जैसे ही क्यूआर कोड स्कैन किया जाता है, मालिक का नाम मोबाइल पर दिखाई देता है। यदि नाम किसी गैर-हिंदू धर्म से संबंधित पाया जाता है और होटल का नाम हिंदू प्रतीत होता है, तो संगठन इसका विरोध करते हैं।

कहां-कहां चल रहा है अभियान?

यह अभियान बीते तीन दिनों से मेरठ हाईवे और कांवड़ मार्गों पर लगातार चल रहा है।

इस अभियान की शुरुआत सुभारती चौकी से की गई और इसे गाजियाबाद तक फैलाया गया।

संगठनों की यह मांग है कि हर होटल व ढाबे पर मालिक का नाम और धर्म स्पष्ट रूप से लिखा जाए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

इस पूरे अभियान के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में संगठन के लोग होटलों के बाहर खड़े होकर नाम पूछते और पुलिस से शिकायत करते नजर आते हैं। इन वीडियो में कुछ स्थानों पर संचालकों से कड़ी पूछताछ होती दिखाई दे रही है।

उत्तराखंड सरकार के आदेश का दिया जा रहा हवाला

संगठनों की यह भी मांग है कि उत्तराखंड सरकार की तरह उत्तर प्रदेश सरकार को भी नियम बनाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर होटल व ढाबे पर संचालक का नाम लिखा जाए। इससे श्रद्धालुओं को पारदर्शिता मिलेगी और किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं होगी।

किन लोगों ने लिया हिस्सा?

इस अभियान में शामिल प्रमुख नामों में अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही, योग आश्रम संचालक यशवीर महाराज, विहिप पदाधिकारी रंजना वर्मा और दीपक सिंधु का नाम सामने आया है। ये सभी मिलकर कांवड़ यात्रा मार्ग पर होटलों की जांच कर रहे हैं और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को सूचना भी दे रहे हैं।

हिंदू संगठनों की यह मांग साफ है कि धार्मिक यात्रा के दौरान होटल और ढाबों की पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है। उनका कहना है कि कांवड़ यात्रा आस्था का विषय है और किसी भी प्रकार की छिपी पहचान से श्रद्धालुओं की भावना आहत हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार को उत्तराखंड की तर्ज पर नियम बनाना चाहिए जिससे कि होटल मालिकों की पहचान स्पष्ट रूप से सामने आ सके।

During the Kanwar Yatra season, Hindu organizations such as the VHP and Akhil Bharatiya Hindu Suraksha Sangathan have launched a campaign to scan QR codes on hotels and dhabas along the Kanwar route in Meerut, Muzaffarnagar, and Ghaziabad. This step is aimed at identifying the religion and identity of hotel owners, especially where online payment systems reveal ownership details. Citing the Uttarakhand government’s order, these groups are urging the Uttar Pradesh government to mandate visible display of hotel owners’ names and prevent religious misrepresentation during this sensitive religious period.

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