spot_imgspot_img

E20 का खेल: क्या आम जनता इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रही है?

spot_img

Date:

इथेनॉल नीति: सब्सिडी, राजनीति और अनुत्तरित सवाल

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी बयानों, न्यायालयी कार्यवाहियों, कंपनी फाइलिंग और दोनों पक्षों के बयानों पर आधारित है। जहां कोई आरोप है, वहां आरोप लगाने वाले का नाम और संबंधित पक्ष का जवाब (यदि उपलब्ध हो) दिया गया है।

पृष्ठभूमि: E20 अनिवार्य क्यों हुआ

भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य मूल रूप से 2030 के लिए तय किया था, लेकिन यह लक्ष्य दिसंबर 2025 में, यानी करीब पांच साल पहले ही हासिल कर लिया गया। 1 अप्रैल 2026 से देश के हर पेट्रोल पंप पर सिर्फ E20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य कर दिया गया, और बिना मिश्रण वाला शुद्ध पेट्रोल कुछ प्रीमियम ब्रांड (जैसे इंडियन ऑयल का XP100, जिसकी कीमत ₹150 प्रति लीटर से ऊपर है) को छोड़कर बाज़ार से लगभग गायब हो गया।

सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम से 2014-15 से अब तक विदेशी मुद्रा में लगभग ₹1.9 लाख करोड़ की बचत हुई है, किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है, और कार्बन उत्सर्जन में करीब 930 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने जुलाई 2026 में एक विस्तृत बयान जारी कर इंजन क्षति, पानी की खपत और सुरक्षा से जुड़ी सोशल मीडिया पर फैली आशंकाओं को खारिज किया, और कहा कि ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के करीब 40,000 किलोमीटर के परीक्षणों में कोई बड़ी इंजन क्षति नहीं पाई गई।

विवाद की जड़: मार्च 2023 से पहले बिकी करोड़ों गाड़ियां — कार, बाइक — केवल E10 या उससे कम इथेनॉल मिश्रण के लिए प्रमाणित थीं। दो प्रमुख टू-व्हीलर निर्माताओं और शेल इंडिया ने चेतावनी दी है कि 2023 से पहले बनी अधिकांश गाड़ियों को E20 चलाने के लिए फ्यूल सिस्टम में बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है, और नुकसान होने पर वारंटी वाहन मालिक के जोखिम पर होगी। नीति आयोग ने 2021 में ही सुझाव दिया था कि उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को पेट्रोल से सस्ता रखा जाए और टैक्स में छूट दी जाए ताकि उपभोक्ता स्वेच्छा से इसे अपनाएं — लेकिन ये सुझाव लागू नहीं हुए, जो मौजूदा असंतोष की बड़ी वजह है।

एक सर्वेक्षण एजेंसी लोकलसर्किल्स के अनुसार, अगस्त 2025 में देशभर के 36,000 वाहन मालिकों में से करीब 66 प्रतिशत ने E20 के राष्ट्रव्यापी रोलआउट का विरोध किया — जिसमें 44 प्रतिशत ने इसे वापस लेने और 22 प्रतिशत ने विकल्प देने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ — “एक्सपेरिमेंट” वाला विवाद

30 जून 2026 को कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि E20 कार्यक्रम अभी भी एक “चल रहा प्रयोग” (ongoing experiment) है, और इसका पूरा असर अगले साल स्पष्ट होगा।

वास्तविक मामला क्या था: यह सुनवाई E20 की वैज्ञानिकता या सुरक्षा पर नहीं, बल्कि एक ठेके के विवाद पर थी। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें तेल कंपनियों को एक निजी आपूर्तिकर्ता, VINP डिस्टिलरीज़ को अधिक इथेनॉल आवंटन देने पर विचार करने को कहा गया था। VINP ने 9.3 करोड़ लीटर के लिए बोली लगाई थी, लेकिन उसे केवल 3.9 करोड़ लीटर आवंटित हुआ।

30 जून की रिपोर्टों के बाद, अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने उसी सप्ताह स्पष्ट खंडन जारी किया: “किसी भी स्तर पर यह प्रस्तुत नहीं किया गया कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम या E20 कार्यक्रम एक ‘प्रयोग’ है।” कार्यालय के अनुसार, अदालत में केवल आवंटन विवाद और अन्य हाई कोर्ट में लंबित समान मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने पर चर्चा हुई थी।

निष्कर्ष: यह दावा कि “सरकार ने अदालत में स्वीकार किया कि वह जनता पर बिना सहमति प्रयोग कर रही है” — दस्तावेज़ी रूप से प्रमाणित नहीं होता। यह एक मीडिया व्याख्या थी, जिसे सरकार ने आधिकारिक रूप से खारिज किया। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए दोनों बातें — मूल रिपोर्ट और सरकार का खंडन — साथ में देना ज़रूरी है।

गडकरी और उनके बेटों पर आरोप

यह एक सक्रिय, सार्वजनिक राजनीतिक विवाद है, हाशिये की बात नहीं।

आरोप (कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा, सितंबर-अक्टूबर 2025): केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दो बेटे, निखिल और सारंग, सियान एग्रो (Cian Agro) और मानस एग्रो (Manas Agro) चलाते हैं। खेड़ा के अनुसार सियान एग्रो का राजस्व जून 2024 में ₹18 करोड़ से बढ़कर जून 2025 में ₹523 करोड़ हो गया, और कंपनी का शेयर मूल्य जनवरी 2025 से अगस्त 2025 के बीच 2,100 प्रतिशत से अधिक बढ़ा। कांग्रेस ने इसे “स्पष्ट हितों का टकराव” बताते हुए प्रधानमंत्री से लोकपाल जांच की मांग की — “पिता सरकार में बैठकर नीति बनाते हैं, बेटे पैसा कमाते हैं।”

गडकरी का जवाब (न्यूज़18 इंडिया चौपाल, अक्टूबर 2025): गडकरी ने हितों के टकराव से इनकार किया और कहा कि उनके बेटों की कंपनी देश की कुल इथेनॉल आपूर्ति में 0.5 प्रतिशत से भी कम का योगदान देती है। उनके अनुसार परिवार की चीनी मिल इथेनॉल कार्यक्रम शुरू होने से पहले से मौजूद थी और पहले शराब (alcohol) बनाती थी। उन्होंने बताया कि सरकार सालाना करीब 1,400 करोड़ टन इथेनॉल खरीदती है, जिसके लिए 500-550 कंपनियां आपूर्तिकर्ता हैं, और कीमतें कैबिनेट तय करती है, टेंडर के ज़रिए। उन्होंने पूरे विवाद को “स्वार्थी तत्वों” द्वारा फैलाया गया दुष्प्रचार बताया।

क्या सत्यापित है, क्या नहीं: सार्वजनिक कंपनी रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि करते हैं कि गडकरी परिवार से जुड़ी कंपनियां इथेनॉल और संबंधित कारोबार में हैं, और उक्त राजस्व वृद्धि व शेयर मूल्य के आंकड़े कंपनी के फाइलिंग से मेल खाते प्रतीत होते हैं। परंतु यह दावा कि नीति विशेष रूप से बेटों को फायदा पहुंचाने के इरादे से बनाई गई — यह एक आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं। अब तक न तो सेबी ने शेयर में उछाल पर कोई जांच बिठाई है, न ही लोकपाल जांच का औपचारिक आदेश हुआ है।

विपक्ष भी चीनी मिलों से जुड़ा है — यह हिस्सा सबसे कम विवादित है

चीनी मिलों और राजनीतिक दलों का रिश्ता किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है — यह दशकों पुराना, दस्तावेज़ी रूप से स्थापित तथ्य है।

  • महाराष्ट्र में शरद पवार और उनका परिवार दर्जनों चीनी मिलों को नियंत्रित करता है। एक उद्योग अधिकारी के हवाले से पुरानी रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य की करीब 95 प्रतिशत सहकारी चीनी मिलें कांग्रेस के प्रभाव में हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत एनसीपी (NCP) के नियंत्रण में, जबकि सिर्फ 5 प्रतिशत भाजपा-संबद्ध यूनियनों के अधीन हैं।
  • कर्नाटक में कांग्रेस, भाजपा और जेडी(एस) से जुड़े नेता राज्य की करीब 65 चीनी मिलों में से आधी के मालिकाना हक से जुड़े हैं।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) महाराष्ट्र में घाटे में चल रही सहकारी चीनी मिलों की बिक्री की जांच कर रहा है, जिसमें आरोप है कि करीब एक दर्जन मिलों को कम कीमत पर आंककर नेताओं और उनके रिश्तेदारों की निजी कंपनियों को बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को करीब ₹25,000 करोड़ का नुकसान हुआ। इस मामले में एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का नाम भी आया है (वे राज्य सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में थे जिसने बिक्री को मंज़ूरी दी) — पवार ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि बिक्री बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर हुई थी।
  • अगस्त 2024 में महाराष्ट्र सरकार ने 13 चीनी मिलों को ₹1,898 करोड़ के ऋण की मंज़ूरी दी — पांच भाजपा-नियंत्रित, सात एनसीपी (अजित पवार गुट)-नियंत्रित — यानी सभी 13 सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन से जुड़ी थीं; विपक्ष-नियंत्रित किसी मिल को कुछ नहीं मिला।

यह दिखाता है कि चीनी/इथेनॉल उद्योग पर राजनीतिक नियंत्रण भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी — सभी बड़े दलों में फैला हुआ है, न कि किसी एक पार्टी तक सीमित।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (POCA/PC Act) — संशोधन, निरस्तीकरण नहीं

एक स्पष्टीकरण ज़रूरी है: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 को निरस्त (repeal) नहीं किया गया है — इसमें 2018 में संशोधन (amendment) हुआ था। यह इथेनॉल नीति से सीधे जुड़ा नहीं है, लेकिन आलोचकों के निशाने पर रहा है:

  • संशोधन ने किसी लोक सेवक (यहां तक कि पद छोड़ चुके अधिकारी) के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले पूर्व स्वीकृति (prior sanction) अनिवार्य कर दी। आलोचकों का कहना है कि इससे जांच में देरी होती है क्योंकि स्वीकृति देने वाला प्राधिकरण अक्सर उसी सरकार का हिस्सा होता है जिसकी जांच होनी है।
  • संशोधन ने “आय से अधिक संपत्ति” के मामलों में पुराने कड़े प्रावधान को भी सीमित किया, जिससे अभियोजन पक्ष के लिए सिद्ध करने की शर्तें बदल गईं।

समर्थकों का तर्क है कि ये बदलाव ईमानदार अधिकारियों को राजनीति से प्रेरित मुकदमों से बचाते हैं; आलोचकों का कहना है कि इनसे जवाबदेही कमज़ोर हुई है। यह एक पुराना (2018) और सामान्य कानून है — इसे इथेनॉल नीति से जोड़ने का कोई दस्तावेज़ी आधार नहीं मिला।

जो अभी असत्यापित है

  • गडकरी की नीति और उनके बेटों के मुनाफे के बीच सीधा कारणात्मक (causal) संबंध — अभी तक केवल आरोप, कोई जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं है।
  • लोकपाल जांच का औपचारिक आदेश — अभी तक नहीं हुआ है।
  • POCA संशोधन का इथेनॉल नीति से कोई सीधा संबंध — कोई प्रमाण नहीं मिला।

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
26 ° C
26 °
26 °
72%
3.7m/s
53%
Sat
25 °
Sun
23 °
Mon
29 °
Tue
36 °
Wed
38 °
Video thumbnail
सोनम यादव की AI वीडियो वायरल करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी, पुलिस से सख्त एक्शन की मांग
01:59
Video thumbnail
लखनऊ: चंद्रशेखर आजाद का दावा, फार्म हाउस पर रची गई हत्या की साजिश; सरकार से जांच की मांग
02:43
Video thumbnail
क्या आरती करते समय Salman Khan से गलती हुई ?
00:31
Video thumbnail
कनॉट प्लेस में मिंटो ब्रिज के पास चलती सड़क पर गिरा रेड लाइट का खंभा
00:19
Video thumbnail
अरविंद केजरीवाल का अमित शाह पर निशाना, बोले- लॉरेंस बिश्नोई को दामाद की तरह क्यों रखा जा रहा?
00:21
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जब तक ये मुख्यमंत्री रहेंगे, जब तक ये सरकार रहेगी कानून से काम नहीं होगा"
02:10
Video thumbnail
अभिनेता गुलशन पांडे और निशिकांत दीक्षित तक पहुंचा ‘पीड़ित को न्याय’ का नया अंक | AIN NEWS 1
02:16
Video thumbnail
इशारों-इशारों में फायरब्रांड Yogi ने Abhijeet Dipke को दिया मुंहतोड़ जवाब !
02:36
Video thumbnail
Meerut Kesarganj Masjid Controversy : मेरठ केसरगंज मस्जिद विवाद पर योगी से क्या बोले टी राजा सिंह ?
04:26
Video thumbnail
Hanuman Ansh Actor Gulshan Pandey in Ghaziabad | ‘हनुमान अंश’ अभिनेता गुलशन पांडे का भव्य स्वागत
04:47

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related