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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत की बड़ी रणनीति, रूस और UAE से बढ़ाई कच्चे तेल की खरीद!

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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने बदली तेल खरीद रणनीति, रूस और UAE से बढ़ाया आयात

AIN NEWS 1: दुनिया के तेल बाजार पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर देखने को मिल रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे तेल की खरीद रणनीति में बदलाव किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जून महीने में भारत ने रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।

अगर इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

इसी संभावना को देखते हुए भारत ने पहले से ही वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीद बढ़ाने पर ध्यान दिया है, ताकि देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे।

रूस बना भारत का बड़ा तेल सप्लायर

पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। कीमतों में प्रतिस्पर्धी होने के कारण भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल खरीद में काफी बढ़ोतरी की है।

रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारत की रिफाइनरी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिली है और वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करने में भी सहायता मिली है।

UAE से बढ़ी खरीद क्यों अहम?

संयुक्त अरब अमीरात भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तेल साझेदार है। पश्चिम एशिया में मौजूदगी और बेहतर व्यापारिक संबंधों के कारण UAE भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।

ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान UAE से बढ़ी खरीद भारत के लिए आपूर्ति के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

भारत सरकार लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति बेहद जरूरी है।

तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाना इसी रणनीति का हिस्सा है। भारत केवल किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों से तेल खरीद कर जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान-अमेरिका संबंधों का तेल बाजार पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की राजनीतिक या सैन्य हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखाई देता है।

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौते की कोशिशों से बाजार में कुछ राहत की उम्मीद रहती है, लेकिन तेल व्यापार से जुड़े देश अभी भी सतर्क हैं।

तेल बाजार में स्थिरता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों

भारत के लिए बढ़ती तेल मांग एक बड़ी चुनौती है। देश में परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन जैसे कई क्षेत्र कच्चे तेल पर निर्भर हैं।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी महंगाई को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि भारत लगातार नए ऊर्जा स्रोतों और बेहतर आपूर्ति नेटवर्क पर काम कर रहा है।

दूसरी ओर, अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की नीति भारत को वैश्विक संकट के समय अधिक मजबूत स्थिति प्रदान करती है।

ईरान-अमेरिका तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी तेल खरीद रणनीति में बदलाव करते हुए रूस और UAE से आयात बढ़ाया है।

यह कदम दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और तेल बाजार की स्थिति पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ सकता है।

India has increased crude oil imports from Russia and the United Arab Emirates amid rising concerns over Iran US tensions and Strait of Hormuz shipping risks. The move highlights India’s energy security strategy, global oil supply management, and efforts to maintain stable crude oil availability. With Russia becoming a major oil supplier and UAE strengthening its role, India is diversifying its crude oil sources to reduce dependency and protect its economy from global oil market fluctuations.

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