AIN NEWS 1 लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर यूपी की सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के पलटवार के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और अहंकारी बताते हुए उनसे न केवल जयंत चौधरी और RLD, बल्कि पूरे जाट समाज से माफी मांगने की मांग की है।
मायावती के इस बयान के बाद यह विवाद केवल सपा और RLD के बीच की जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसके व्यापक असर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका को देखते हुए इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है ‘चवन्नी से रुपया’ वाला विवाद?
विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव की एक टिप्पणी से हुई। उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक सहयोगियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने कुछ नेताओं और सहयोगी दलों को आगे बढ़ाने का काम किया, लेकिन इसके बावजूद वे साथ छोड़कर चले गए। इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘चवन्नी को रुपया बना दिया, फिर भी छोड़कर चले गए।’

इस बयान को राजनीतिक तौर पर जयंत चौधरी और RLD से जोड़कर देखा गया। दरअसल, सपा और RLD के बीच 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन था। बाद में दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए। जयंत चौधरी ने भी अखिलेश यादव के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें सस्ती भाषा में बात करनी थी तो उनका नाम लेकर बोलना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत है।
मायावती ने अखिलेश पर साधा निशाना
अब मायावती ने इस मामले में जयंत चौधरी का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सपा प्रमुख का अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी RLD और उसके नेता के बारे में इस तरह सार्वजनिक बयान देना पूरी तरह अमर्यादित और शर्मनाक है।
मायावती के मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह के परिवार से जुड़े संदर्भ के कारण इस बयान का असर जाट समाज पर भी पड़ता है। इसलिए अखिलेश यादव को RLD और जयंत चौधरी से माफी मांगने के साथ-साथ जाट समाज से भी तत्काल माफी मांगनी चाहिए।
चौधरी चरण सिंह के परिवार का भी जिक्र
मायावती ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से जयंत चौधरी पर टिप्पणी की गई, उससे चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान हुआ है।
मायावती की आपत्ति केवल एक राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि सहयोगी दलों के साथ उसका व्यवहार अक्सर राजनीतिक स्वार्थ से जुड़ा रहा है। उनके अनुसार, गठबंधन के दौरान साथ रहना और राजनीतिक परिस्थिति बदलते ही सहयोगियों पर टिप्पणी करना उचित राजनीतिक व्यवहार नहीं है।
सपा और बसपा गठबंधन का पुराना विवाद भी सामने आया
मायावती ने इस पूरे विवाद को अपने और समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक संबंधों से भी जोड़ दिया। उन्होंने सपा-बसपा के पुराने गठबंधन और उसके टूटने का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव परिणाम दोनों दलों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे और इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन समाप्त हो गया। मायावती लंबे समय से सपा के साथ अपने राजनीतिक अनुभवों को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधती रही हैं।
जयंत चौधरी पहले ही दे चुके हैं जवाब
‘चवन्नी’ टिप्पणी सामने आने के बाद जयंत चौधरी ने भी अखिलेश यादव को जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति या दल को बड़ा बनाने वाली जनता होती है। जयंत के बयान को अखिलेश यादव की टिप्पणी का सीधा राजनीतिक जवाब माना गया।
जयंत चौधरी ने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। इस पूरे विवाद के बीच RLD की ओर से अखिलेश यादव की टिप्पणी को जाट समाज से जोड़कर भी सवाल उठाए गए हैं।
WhatsApp सिर्फ चैटिंग नहीं, ये 5 काम भी कर सकते हैं आप; नए फीचर्स जानकर हो जाएंगे हैरान
शिवपाल यादव ने किया अखिलेश का बचाव
जहां मायावती और जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव की टिप्पणी पर सवाल उठाए, वहीं सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव उनके बचाव में सामने आए। शिवपाल यादव ने कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला जा रहा है और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह और समाजवादी आंदोलन के पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव ने चौधरी चरण सिंह को हमेशा सम्मान दिया था। शिवपाल का यह बयान सपा की ओर से विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी अहमियत
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं की अहम भूमिका है और RLD का इस क्षेत्र में पारंपरिक राजनीतिक आधार माना जाता है।
ऐसे में अखिलेश यादव की टिप्पणी पर मायावती का जयंत चौधरी के समर्थन में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विपक्षी खेमे में चल रही राजनीतिक खींचतान और ज्यादा स्पष्ट हुई है। हाल के दिनों में सपा और RLD के बीच कई मुद्दों पर बयानबाजी देखने को मिली है।
पश्चिमी यूपी में क्या हो सकता है असर?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय की राजनीतिक भूमिका को देखते हुए इस विवाद का असर चुनावी रणनीतियों पर पड़ सकता है। हालांकि किसी एक बयान से चुनावी परिणाम तय नहीं होते, लेकिन चुनाव से पहले राजनीतिक दल छोटे-बड़े सामाजिक मुद्दों को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश जरूर करते हैं।
मायावती के बयान से यह भी स्पष्ट है कि BSP इस विवाद को केवल सपा-RLD के बीच की लड़ाई के रूप में नहीं देख रही है। उन्होंने इसे सामाजिक सम्मान और राजनीतिक मर्यादा से जोड़ दिया है। इससे आने वाले दिनों में सपा, बसपा और RLD के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
मायावती ने क्या मांग की?
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। उनकी मांग केवल जयंत चौधरी या RLD तक सीमित नहीं है। उन्होंने चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से भी माफी मांगने की बात कही है।
फिलहाल इस विवाद में सियासी बयान लगातार सामने आ रहे हैं। एक तरफ जयंत चौधरी अपने जवाब से अखिलेश यादव को घेर रहे हैं, वहीं मायावती ने भी सपा प्रमुख पर तीखा हमला बोल दिया है। दूसरी तरफ सपा की ओर से शिवपाल यादव अखिलेश के बयान का बचाव कर रहे हैं।
ऐसे में ‘चवन्नी से रुपया’ वाला बयान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा, RLD और BSP के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस विवाद पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।
नोट: इस रिपोर्ट में नेताओं के बयानों को उनके राजनीतिक दावों और प्रतिक्रियाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किसी बयान को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
The political controversy over Akhilesh Yadav’s ‘chavanni se rupaya’ remark has intensified in Uttar Pradesh after BSP chief Mayawati strongly criticized the Samajwadi Party leader. Mayawati supported RLD chief Jayant Chaudhary and demanded an apology from Akhilesh Yadav to Jayant Chaudhary, the family of former Prime Minister Chaudhary Charan Singh and the Jat community. The controversy has gained significance ahead of the UP Assembly Election 2027 and could influence political equations in western Uttar Pradesh.



















