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मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय को सोशल मीडिया पर मिली धमकियों पर गरमाई सियासत, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी से की सख्त कार्रवाई की मांग!

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मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय को सोशल मीडिया पर धमकियों का मामला, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी से की कार्रवाई की मांग

AIN NEWS 1: मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर कथित रूप से दी गई धमकियों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में मेरठ में एक दलित छात्रा की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले से ही माहौल संवेदनशील बना हुआ है। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और वीडियो वायरल हुए, जिनमें एसएसपी अविनाश पांडेय और उनके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा और गंभीर धमकियां दी गईं।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि फेसबुक पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसे हजारों लोगों ने देखा और साझा किया। इस वीडियो में एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, उनके परिवार को भी निशाना बनाया गया और जान से मारने तक की धमकियां दिए जाने का आरोप लगाया गया।

अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि इस तरह की भाषा और सार्वजनिक रूप से किसी अधिकारी को नुकसान पहुंचाने की बात करना केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला नहीं है, बल्कि यह गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

डीजीपी को भेजे पत्र में क्या कहा?

शनिवार को लिखे गए अपने पत्र में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि वायरल वीडियो में न केवल मेरठ एसएसपी का अपमान किया गया है, बल्कि उन्हें कथित तौर पर जिंदा जलाने जैसी गंभीर धमकियां भी दी गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी और उसके परिवार के खिलाफ इस प्रकार की सार्वजनिक धमकी कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती है।

उन्होंने डीजीपी से मांग की कि पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए और संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट एवं वीडियो की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

कानूनी कार्रवाई की मांग

अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध बनता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से धमकी देना, हिंसा के लिए उकसाना तथा उसके परिवार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना गंभीर अपराध है।

उन्होंने यह भी मांग की कि—

वायरल फेसबुक वीडियो को तत्काल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाए।

वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों की पहचान की जाए।

दोषियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

दो दिन पहले एसएसपी के खिलाफ भी की थी शिकायत

इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि दो दिन पहले यही अमिताभ ठाकुर मेरठ पुलिस की कार्रवाई को लेकर एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज करा चुके थे।

उन्होंने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए कथित व्यवहार पर सवाल उठाए थे और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि, अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाना अलग विषय है, लेकिन उसके परिवार को धमकी देना और हिंसा के लिए उकसाना पूरी तरह अस्वीकार्य और कानून के खिलाफ है।

दलित छात्रा हत्याकांड के बाद बढ़ा विवाद

मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली थी। पुलिस की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित रूप से एसएसपी और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां और धमकी भरे संदेश साझा किए, जिसके बाद यह मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया।

सोशल मीडिया पर बढ़ती हेट स्पीच चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति, विशेषकर सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना, उसके परिवार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना या हिंसा के लिए उकसाना कानूनी रूप से अपराध माना जाता है।

पुलिस क्या कर सकती है?

यदि जांच में वायरल वीडियो और पोस्ट में धमकी, नफरत फैलाने या हिंसा के लिए उकसाने जैसी बातें प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की लागू धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

अब तक इस मामले में अमिताभ ठाकुर द्वारा डीजीपी को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को लेकर भी चर्चा जारी है। फिलहाल पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान या किसी एफआईआर की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।

आने वाले दिनों में जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो और पोस्ट के संबंध में क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं। वहीं, यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक धमकी के बीच की सीमा का पालन करना कितना आवश्यक है।

Former IPS officer Amitabh Thakur has urged the Uttar Pradesh Director General of Police (DGP) to take immediate legal action against individuals accused of posting abusive and threatening content targeting Meerut SSP Avinash Pandey and his family on social media. The controversy emerged after a Facebook video allegedly containing hate speech, personal insults, and death threats against the senior police officer went viral. The incident has sparked debate over online abuse, freedom of expression, and the need for strict action against social media threats in Uttar Pradesh. Authorities are expected to examine the viral content and initiate legal proceedings if the allegations are found to be true.

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