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मोदीनगर में कोचिंग संस्थानों की सीलिंग पर शिक्षकों का विरोध तेज, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; छात्रों के भविष्य और रोजगार पर जताई चिंता!

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मोदीनगर में कोचिंग संस्थानों की सीलिंग के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; छात्रों की पढ़ाई और रोजगार बचाने की मांग

AIN NEWS 1 मोदीनगर। गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र में कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी पर की गई सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में अब शिक्षकों का आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। बुधवार को टीचर एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन, मोदीनगर के पदाधिकारियों, शिक्षकों और संस्थान संचालकों ने तहसील परिसर पहुंचकर प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, शिक्षकों के रोजगार और नए शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सील किए गए संस्थानों को खोलने की अनुमति दी जाए।

शिक्षकों का कहना है कि 24 जून 2026 से शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र के कई कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी बंद पड़े हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, जबकि सैकड़ों शिक्षक, कर्मचारी और अन्य स्टाफ आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

बिना पूर्व सूचना की कार्रवाई पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कई संस्थानों को बिना किसी पूर्व सूचना या पर्याप्त समय दिए सील कर दिया। उनका कहना है कि यदि संस्थानों में किसी प्रकार की कमी थी तो पहले नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था। अचानक हुई कार्रवाई से न केवल शिक्षण कार्य ठप हो गया बल्कि शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया।

एसोसिएशन के अनुसार मोदीनगर क्षेत्र के अधिकांश कोचिंग संस्थान भूतल पर संचालित हो रहे थे। ऐसे में एक साथ कई संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई होने से पूरे क्षेत्र की कोचिंग व्यवस्था प्रभावित हो गई।

24 जून से लगातार कर रहे हैं प्रयास

टीचर एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन ने बताया कि 24 जून 2026 से अब तक संगठन के 150 से अधिक सदस्य लगातार तहसील प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों से मुलाकात की गई और ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक किसी भी संस्थान की सील हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

शिक्षकों का कहना है कि वे प्रशासन से टकराव नहीं चाहते, बल्कि नियमों का पालन करते हुए समाधान चाहते हैं। उनका आग्रह है कि यदि किसी संस्थान में कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी है तो उसे दूर करने के लिए उचित समय और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं।

नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से बढ़ी चिंता

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में कहा कि प्रदेशभर में विद्यालय खुल चुके हैं और नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। ऐसे समय में प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षाओं और अन्य प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र नियमित कक्षाओं से वंचित हो रहे हैं।

कोचिंग संस्थानों के बंद रहने का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है जो अपनी पढ़ाई के लिए इन संस्थानों पर निर्भर हैं। कई छात्रों की तैयारी बीच में रुक गई है, जिससे उनके भविष्य को लेकर अभिभावकों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है।

शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट

प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों के बंद होने के बाद अनेक शिक्षकों की आय पूरी तरह रुक गई है। कई कर्मचारी और अन्य स्टाफ भी बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

उनका कहना है कि अधिकांश शिक्षक केवल कोचिंग के माध्यम से ही अपना परिवार चलाते हैं। लंबे समय तक संस्थान बंद रहने की स्थिति में उनके सामने आर्थिक संकट और गंभीर हो सकता है।

ज्ञापन में क्या रखी गईं प्रमुख मांगें?

एसोसिएशन द्वारा एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख रूप से कहा गया कि—

सील किए गए कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी को जल्द खोलने की अनुमति दी जाए।

यदि किसी संस्थान में नियमों से संबंधित कमियां हैं तो उन्हें दूर करने के लिए उचित समय दिया जाए।

प्रशासन स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे ताकि सभी संस्थान निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कर सकें।

विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शीघ्र निर्णय लिया जाए।

शिक्षकों और कर्मचारियों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

प्रशासन से सहयोग की अपील

शिक्षकों ने कहा कि वे प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों का सम्मान करते हैं और सभी आवश्यक मानकों का पालन करने के लिए तैयार हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध नहीं बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा और शिक्षकों के रोजगार की रक्षा करना है।

उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि वह व्यावहारिक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए जल्द समाधान निकाले ताकि शिक्षण कार्य दोबारा शुरू हो सके।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके लिए आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

शिक्षकों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन यदि लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

ज्ञापन में क्या लिखा गया?

2 जुलाई 2026 को उपजिलाधिकारी, मोदीनगर को दिए गए ज्ञापन में टीचर एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन ने उल्लेख किया कि 24 जून 2026 से प्रशासन द्वारा बिना पूर्व सूचना के की जा रही सीलिंग कार्रवाई के कारण अनेक कोचिंग संस्थान बंद हैं। संगठन के अनुसार 150 से अधिक सदस्य लगातार प्रशासन से मिलकर सील हटाने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि लंबे समय से संस्थान बंद रहने के कारण शिक्षक और कर्मचारी बेरोजगारी की स्थिति में पहुंच गए हैं। संगठन ने प्रशासन से पुनर्विचार करते हुए शीघ्र राहत प्रदान करने और सील हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

प्रशासन की ओर से क्या स्थिति?

समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से सील हटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि वे प्रशासन से संवाद बनाए हुए हैं और उम्मीद है कि विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए जल्द कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

यदि प्रशासन की ओर से कोई नया आदेश या निर्णय जारी किया जाता है तो उससे संबंधित जानकारी भी सामने आने की संभावना है।

छात्रों और अभिभावकों की नजर प्रशासन के फैसले पर

फिलहाल मोदीनगर के हजारों छात्र और उनके अभिभावक प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों का जल्द संचालन शुरू होना विद्यार्थियों के लिए राहत साबित हो सकता है।

दूसरी ओर शिक्षक भी चाहते हैं कि नियमों का पालन करते हुए ऐसा समाधान निकले जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और रोजगार भी सुरक्षित रह सके। आने वाले दिनों में प्रशासन और टीचर एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

The Teachers and Library Association in Modinagar has intensified its protest against the sealing of coaching institutes and libraries by the local administration. Teachers submitted a memorandum to the SDM, demanding the immediate removal of seals, stating that the closure has affected thousands of students and left many teachers and staff without employment. The association urged the administration to allow coaching centres to reopen while ensuring compliance with government regulations. The issue has become one of the major education-related developments in Ghaziabad, drawing attention to both students’ academic future and teachers’ livelihoods.

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