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ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिका की बड़ी प्रतिक्रिया: एडमिरल पपारो ने की भारत की रणनीति और संयम की खुलकर सराहना

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AIN NEWS 1 | भारत के सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब अमेरिका ने भी इस अभियान की खुलकर प्रशंसा की है। अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान (INDO-PACOM) के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पपारो ने नई दिल्ली दौरे के दौरान भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक संतुलन और संयम को शांति बनाए रखने की मिसाल बताया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव, सैन्य प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं।

यह बयान सिर्फ एक सैन्य टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।

दिल्ली दौरे पर क्या बोले एडमिरल पपारो

15 फरवरी 2026 को भारत पहुंचे एडमिरल पपारो ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह इस अभियान को अंजाम दिया, वह आधुनिक युद्ध रणनीति और जिम्मेदार सैन्य व्यवहार का उदाहरण है।

उनके अनुसार, किसी भी सैन्य कार्रवाई में ताकत के साथ संयम दिखाना सबसे बड़ी चुनौती होती है और भारत ने इस संतुलन को सफलतापूर्वक बनाए रखा।

उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।

1. संयम और रणनीतिक सटीकता की तारीफ

एडमिरल पपारो ने सबसे पहले भारतीय सेना के संयम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने स्पष्ट सैन्य लक्ष्य तय किए और अनावश्यक नुकसान से बचने की कोशिश की।

उन्होंने विशेष रूप से “टैक्टिकल एक्सीक्यूशन” यानी अभियान की रणनीतिक योजना और उसके क्रियान्वयन को प्रभावशाली बताया। उनके अनुसार, ऑपरेशन के बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व द्वारा आत्ममंथन और सीखने की प्रक्रिया भी पेशेवर सैन्य संस्कृति को दर्शाती है।

उनका कहना था कि ऐसे अभियानों को पूरी दुनिया के शांतिप्रिय देश गंभीरता से देखते हैं, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

2. चीन से जुड़े अप्रत्यक्ष संकेत

बातचीत के दौरान एडमिरल पपारो ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए चीनी मूल के हथियारों और तकनीक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी के हथियार, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और “किल चेन” की जटिलता नई चुनौतियां पैदा कर रही है।

हालांकि उन्होंने सीधे चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता और दबाव की राजनीति पर चिंता जरूर जताई। विशेषज्ञ इसे चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता की ओर इशारा मान रहे हैं।

3. भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर जोर

एडमिरल पपारो ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को क्षेत्रीय शांति के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी का “डिटरेंस इफेक्ट” यानी संभावित संघर्षों को रोकने में बड़ा योगदान है।

उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश संप्रभुता, समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।

उनके अनुसार, साझा सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग भविष्य में क्षेत्रीय स्थिरता को और मजबूत करेंगे।

4. हिंद-प्रशांत क्षेत्र का बढ़ता महत्व

एडमिरल पपारो ने बताया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बन चुका है। दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी और वैश्विक GDP का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में मौजूद है।

उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष सैन्य शक्तियों में से अधिकांश इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं, इसलिए यहां स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि सैन्य नेतृत्व को भी लगातार अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुए एक भीषण आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र की बायसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर हमला किया गया।

इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिनमें 25 भारतीय नागरिक और एक नेपाली नागरिक शामिल था। 20 से अधिक लोग घायल हुए। यह घटना 2008 मुंबई हमलों के बाद नागरिकों पर सबसे बड़ा आतंकी हमला मानी गई।

जांच एजेंसियों ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों — लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और द रेसिस्टेंस फ्रंट — का हाथ बताया।

क्यों रखा गया नाम ‘सिंदूर’

सरकार ने इस सैन्य अभियान का नाम “सिंदूर” रखा, जिसका प्रतीकात्मक महत्व बताया गया। हमले में आतंकियों द्वारा पुरुष पर्यटकों को विशेष रूप से निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी।

सिंदूर भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस नाम को आतंकवाद के खिलाफ जवाब और सामाजिक संदेश दोनों के रूप में देखा गया।

कैसे चला ऑपरेशन सिंदूर

7 मई 2025 को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त अभियान शुरू किया। चार दिनों तक चले इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी लॉन्चपैड और प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया।

अभियान की प्रमुख विशेषताएं:

  • 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले

  • ब्रह्मोस मिसाइल और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल

  • एयर स्ट्राइक और स्वदेशी हथियार प्रणालियां

  • AI आधारित निगरानी और लक्ष्य चयन

  • सैन्य और नागरिक ठिकानों से दूरी बनाए रखना

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्रवाई में करीब 100 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई।

भारत की एयर सुपीरियरिटी पर चर्चा

ऑपरेशन के बाद भारत की वायु शक्ति और तकनीकी क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और सीमा पार गोलीबारी का सहारा लिया और नागरिक हताहतों का दावा किया।

हालांकि रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की सैन्य बढ़त स्पष्ट रूप से दिखाई दी और अंततः तनाव कम करने के लिए युद्धविराम की स्थिति बनी।

कुछ अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों ने इसे दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन बदलने वाली घटना बताया।

वैश्विक स्तर पर भारत की छवि मजबूत

एडमिरल पपारो के बयान से यह संकेत मिलता है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को केवल आतंकवाद के खिलाफ सख्त देश के रूप में ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार सैन्य शक्ति के रूप में भी स्थापित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान भारत की नई सुरक्षा नीति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सोच को दर्शाता है। साथ ही, भारत-अमेरिका सहयोग भविष्य में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक संदेश था — आतंकवाद के खिलाफ कठोरता और वैश्विक शांति के प्रति जिम्मेदारी का संतुलन। अमेरिका की खुली सराहना ने यह भी दिखा दिया कि भारत अब क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।

आने वाले समय में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।

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